मणिपुर: 9 नागा विधायकों ने अमित शाह को पत्र लिखकर कुकी-जो नेताओं की गिरफ्तारी और SoO रद्द करने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के 9 नागा विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राज्य में छह नागा नागरिकों की कथित हत्या और उनके शवों को क्षत-विक्षत करने की जिम्मेदारी लेने वाले कुकी-जो नेताओं की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। 1 सितंबर को सामने आए इस पत्र में विधायकों ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र ने कार्रवाई नहीं की, तो उनके लिए मणिपुर सरकार का समर्थन जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
पत्र में क्या मांगें रखी गई हैं
विधायकों ने गृह मंत्री से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली — उन कुकी-जो नेताओं की तत्काल गिरफ्तारी जिन्होंने सार्वजनिक रूप से छह नागा नागरिकों की हत्या और शवों को क्षत-विक्षत करने की जिम्मेदारी ली। दूसरी — कुकी उग्रवादी समूहों के साथ लागू 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' (SoO) समझौते को तत्काल रद्द करना, जिसका बार-बार उल्लंघन और नागरिकों पर हमले हुए बताए गए हैं। तीसरी — डिप्टी सीएम नेमचा किपजेन और उनके पति केएनएफ-पी के थांगबोई किपजेन के खिलाफ कार्रवाई — हालाँकि पत्र में लगाए गए ये आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम जिनका पत्र में उल्लेख
पत्र में 27 अगस्त को इंफाल-तामेंगलोंग रोड पर हुए उस हमले का विशेष उल्लेख है जिसमें चार नागा नागरिक मारे गए थे। इसके अलावा एनएच-202 पर टीएम कासोम में हुई पिछली घटनाओं और लंगका गाँव पर कथित हमले व आगजनी का भी जिक्र किया गया है, जिसमें दो किसान मारे गए बताए जाते हैं।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले विधायक
इस पत्र पर डिप्टी सीएम लोसी डिखो, नागा विधायक मंच के संयोजक अवांगबो न्यूमाई, सचिव जे. कुमो शा, एचएसी अध्यक्ष डिंगांगलुंग गंगमेई और विधायक खासिम वाशुम, लेशियो कीशिंग, जांगहेमलुंग पानमेई, राम मुइवाह तथा एस.एस. ओलिष के हस्ताक्षर हैं।
राजनीतिक दबाव और व्यापक संदर्भ
यह मांग ऐसे समय में आई है जब मणिपुर मई 2023 से जातीय हिंसा की चपेट में है और केंद्र सरकार पर शांति बहाली का दबाव लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि SoO समझौता केंद्र और राज्य सरकार दोनों के साथ हस्ताक्षरित है, और इसे रद्द करना एक जटिल राजनीतिक और सुरक्षा निर्णय होगा। विधायकों का सरकार समर्थन वापस लेने की चेतावनी देना मणिपुर में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक नई चुनौती पेश करता है।
आगे क्या हो सकता है
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मणिपुर में जातीय तनाव की पृष्ठभूमि में यह पत्र राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है और केंद्र को शीघ्र निर्णय लेने के लिए बाध्य कर सकता है।