नागालैंड-असम-केंद्र के बीच तेल-गैस एक्सप्लोरेशन एमओयू, अमित शाह बोले — उत्तर-पूर्व के विकास का ऐतिहासिक पल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में 11 जून 2026 को नई दिल्ली में नागालैंड सरकार, असम सरकार और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण को लेकर एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। शाह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'विकसित उत्तर-पूर्व' परिकल्पना की दिशा में उठाया गया अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा-केंद्रित कदम बताया।
समझौते में क्या है
इस एमओयू के तहत नागालैंड के छह प्रमुख क्षेत्रों में तेल एवं प्राकृतिक गैस के अन्वेषण का रास्ता खुलेगा। इसके साथ ही पूरे नागालैंड में तेल खोज की अनुमति मिलेगी। अमित शाह के अनुसार, वर्तमान में 1,000 से 1,500 बैरल प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता को इस समझौते के बाद लगभग 10 गुना तक बढ़ाने की संभावना है। तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य खनिज संसाधनों के दोहन से क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
अमित शाह की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि आने वाले समय में इस पहल को इतिहास में याद किया जाएगा। उन्होंने इसे सहकारी संघवाद का बेहतरीन उदाहरण करार देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से ही देश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। शाह ने नागालैंड के मुख्यमंत्री को विशेष रूप से बधाई दी।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरा उत्तर-पूर्व आज 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है और यह समझौता क्षेत्र की प्रगति के लिए नई राह खोलेगा।
दशकों की देरी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि लंबे समय तक कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और अन्य कारणों से उत्तर-पूर्व की प्राकृतिक संपदा का पूरा उपयोग नहीं हो सका। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार उत्तर-पूर्व में निजी निवेश, पर्यटन और शांति प्रक्रिया तीनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है। अमित शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर-पूर्व के विकास के लिए स्वतंत्र भारत के इतिहास में सर्वाधिक काम किया है और वे सबसे अधिक बार इस क्षेत्र का दौरा करने वाले प्रधानमंत्री हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर असर
अमित शाह के अनुसार, नागालैंड और उत्तर-पूर्व में तेल एवं प्राकृतिक गैस संसाधनों का दोहन बढ़ने से भारत की विदेशों पर ऊर्जा निर्भरता में कमी आएगी। इसके साथ ही असम और नागालैंड के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
आगे की राह
यह समझौता उत्तर-पूर्व में ऊर्जा क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है। अब नज़र इस बात पर होगी कि अन्वेषण कार्य कब शुरू होता है, निजी निवेशकों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाती है और स्थानीय रोज़गार सृजन के वादे किस रूप में ज़मीन पर उतरते हैं।