30 जुलाई 2026
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नागालैंड-असम-केंद्र के बीच तेल-गैस एक्सप्लोरेशन एमओयू, अमित शाह बोले — उत्तर-पूर्व के विकास का ऐतिहासिक पल

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नागालैंड-असम-केंद्र के बीच तेल-गैस एक्सप्लोरेशन एमओयू, अमित शाह बोले — उत्तर-पूर्व के विकास का ऐतिहासिक पल

सारांश

नागालैंड, असम और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच हुआ यह त्रिपक्षीय एमओयू सिर्फ एक प्रशासनिक दस्तावेज़ नहीं — यह दशकों से ठंडे बस्ते में पड़ी उत्तर-पूर्व की ऊर्जा क्षमता को जगाने का दांव है। उत्पादन क्षमता 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य और छह प्रमुख क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन की अनुमति इसे क्षेत्र के लिए संभावित गेम-चेंजर बनाती है।

मुख्य बातें

नागालैंड सरकार , असम सरकार और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच 11 जून 2026 को नई दिल्ली में तेल-गैस एक्सप्लोरेशन एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे 'विकसित उत्तर-पूर्व' की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
नागालैंड के छह प्रमुख क्षेत्रों में तेल अन्वेषण की अनुमति; वर्तमान 1,000–1,500 बैरल उत्पादन क्षमता को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य।
शाह ने कहा — इससे भारत की विदेशी ऊर्जा निर्भरता घटेगी और असम व नागालैंड में रोज़गार के नए अवसर बनेंगे।
शाह ने इसे सहकारी संघवाद का उदाहरण बताते हुए केंद्र-राज्य समन्वय की सराहना की।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में 11 जून 2026 को नई दिल्ली में नागालैंड सरकार, असम सरकार और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण को लेकर एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। शाह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'विकसित उत्तर-पूर्व' परिकल्पना की दिशा में उठाया गया अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा-केंद्रित कदम बताया।

समझौते में क्या है

इस एमओयू के तहत नागालैंड के छह प्रमुख क्षेत्रों में तेल एवं प्राकृतिक गैस के अन्वेषण का रास्ता खुलेगा। इसके साथ ही पूरे नागालैंड में तेल खोज की अनुमति मिलेगी। अमित शाह के अनुसार, वर्तमान में 1,000 से 1,500 बैरल प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता को इस समझौते के बाद लगभग 10 गुना तक बढ़ाने की संभावना है। तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य खनिज संसाधनों के दोहन से क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अमित शाह की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि आने वाले समय में इस पहल को इतिहास में याद किया जाएगा। उन्होंने इसे सहकारी संघवाद का बेहतरीन उदाहरण करार देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से ही देश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। शाह ने नागालैंड के मुख्यमंत्री को विशेष रूप से बधाई दी।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरा उत्तर-पूर्व आज 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है और यह समझौता क्षेत्र की प्रगति के लिए नई राह खोलेगा।

दशकों की देरी की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि लंबे समय तक कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और अन्य कारणों से उत्तर-पूर्व की प्राकृतिक संपदा का पूरा उपयोग नहीं हो सका। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार उत्तर-पूर्व में निजी निवेश, पर्यटन और शांति प्रक्रिया तीनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है। अमित शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर-पूर्व के विकास के लिए स्वतंत्र भारत के इतिहास में सर्वाधिक काम किया है और वे सबसे अधिक बार इस क्षेत्र का दौरा करने वाले प्रधानमंत्री हैं।

ऊर्जा सुरक्षा पर असर

अमित शाह के अनुसार, नागालैंड और उत्तर-पूर्व में तेल एवं प्राकृतिक गैस संसाधनों का दोहन बढ़ने से भारत की विदेशों पर ऊर्जा निर्भरता में कमी आएगी। इसके साथ ही असम और नागालैंड के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

आगे की राह

यह समझौता उत्तर-पूर्व में ऊर्जा क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है। अब नज़र इस बात पर होगी कि अन्वेषण कार्य कब शुरू होता है, निजी निवेशकों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाती है और स्थानीय रोज़गार सृजन के वादे किस रूप में ज़मीन पर उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उत्तर-पूर्व में ऊर्जा अन्वेषण के वादे नए नहीं हैं — असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। दशकों तक कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का हवाला देकर इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को अनदेखा किया गया, और अब 10 गुना उत्पादन वृद्धि का लक्ष्य बिना किसी समयसीमा या स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के रखा गया है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी, पर्यावरणीय मंज़ूरियाँ और राजस्व-साझेदारी का ढाँचा — ये तीन सवाल अभी अनुत्तरित हैं, जिनके बिना यह समझौता महज़ एक और उच्च-स्तरीय घोषणा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागालैंड-असम-केंद्र के बीच हुआ तेल-गैस एमओयू क्या है?
यह 11 जून 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित एक त्रिपक्षीय समझौता है, जिसमें नागालैंड सरकार, असम सरकार और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय शामिल हैं। इसका उद्देश्य नागालैंड के छह प्रमुख क्षेत्रों सहित पूरे राज्य में तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण को गति देना है।
इस एमओयू से नागालैंड की तेल उत्पादन क्षमता पर क्या असर पड़ेगा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, वर्तमान में 1,000 से 1,500 बैरल प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता को इस समझौते के बाद लगभग 10 गुना तक बढ़ाने की संभावना है। हालाँकि इसके लिए कोई आधिकारिक समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
अमित शाह ने इस समझौते को 'सहकारी संघवाद' का उदाहरण क्यों बताया?
अमित शाह ने कहा कि इस एमओयू में केंद्र सरकार और दो राज्य सरकारें — नागालैंड और असम — मिलकर एक साझा ऊर्जा लक्ष्य की ओर काम कर रही हैं, जो उनके अनुसार केंद्र-राज्य समन्वय का आदर्श उदाहरण है।
इस एमओयू से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अमित शाह के अनुसार, उत्तर-पूर्व में तेल और प्राकृतिक गैस संसाधनों का दोहन बढ़ने से भारत की विदेशों पर ऊर्जा निर्भरता कम होगी। साथ ही असम और नागालैंड के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।
उत्तर-पूर्व में तेल अन्वेषण में इतनी देरी क्यों हुई?
केंद्रीय गृह मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया कि लंबे समय तक कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और अन्य कारणों से इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा का पूरा उपयोग नहीं हो सका। यह एमओयू उन्हीं बाधाओं को पार कर अन्वेषण की नई शुरुआत का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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