दीमापुर-कोहिमा रेल परियोजना: दिसंबर 2029 तक नागालैंड की राजधानी को मिलेगा पहला रेल संपर्क
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने सोमवार, 15 जून 2026 को नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव को सूचित किया कि 78.42 किलोमीटर लंबी दीमापुर-कोहिमा रेलवे परियोजना पर निर्माण कार्य तेज़ गति से जारी है और दिसंबर 2029 तक राज्य की राजधानी कोहिमा को पहली बार राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत के उन दुर्गम क्षेत्रों में रेल संपर्क स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ
राज्यपाल नंद किशोर यादव ने कोहिमा में एनएफआर (निर्माण) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ धनसिरी-जुब्जा (दीमापुर-कोहिमा) नई रेलवे लाइन परियोजना की प्रगति और दीमापुर रेलवे स्टेशन के एकीकृत पुनर्विकास की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। लोकभवन के एक अधिकारी के अनुसार, बैठक में परियोजना की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
अधिकारियों ने बताया कि धनसिरी-शोखुवी और शोखुवी-मोलवोम खंड पहले ही चालू किए जा चुके हैं। शेष खंडों पर कठिन भूभाग और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों के बावजूद निर्माण कार्य निरंतर जारी है।
परियोजना का भौगोलिक विस्तार
यह राष्ट्रीय परियोजना असम के कार्बी आंगलोंग जिले और नागालैंड के चुमौकेदिमा तथा कोहिमा जिलों से होकर गुजरती है। परियोजना पूरी होने पर कोहिमा जिले को पहली बार सीधी रेल सुविधा मिलेगी — जो दशकों से पूर्वोत्तर के इस क्षेत्र की एक प्रमुख माँग रही है।
निर्माण में आ रही चुनौतियाँ
एनएफआर के अधिकारियों ने परियोजना के समक्ष कई गंभीर चुनौतियों की जानकारी दी। इनमें कठिन भूवैज्ञानिक परिस्थितियाँ, भूस्खलन-संभावित भूभाग, भारी मानसूनी वर्षा, खराब चट्टान गुणवत्ता, सीमित कार्य मौसम, कुशल श्रमिकों की कमी और बुनियादी ढाँचे की बाधाएँ शामिल हैं।
विशेष रूप से सुरंग निर्माण के दौरान उच्च दबाव वाले भूजल रिसाव और फॉल्ट जोन से उत्पन्न तकनीकी कठिनाइयाँ परियोजना की रफ़्तार को प्रभावित करती रही हैं। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर की पहाड़ी भूगोल में रेल परियोजनाएँ ऐतिहासिक रूप से निर्धारित समय-सीमा से पीछे रहती आई हैं।
आम जनता और क्षेत्र पर असर
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परियोजना पूरी होने पर दीमापुर और कोहिमा के बीच यात्रा का समय उल्लेखनीय रूप से घटेगा। इससे छात्रों, रोगियों और दैनिक यात्रियों की आवाजाही सुगम होगी। माल ढुलाई में सुविधा के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे।
यह परियोजना नागालैंड और व्यापक पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में दीर्घकालिक योगदान देने वाली मानी जा रही है। यह ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में बुनियादी ढाँचे के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है।
आगे क्या होगा
एनएफआर के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि शेष खंडों पर काम में तेज़ी लाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। दिसंबर 2029 की समय-सीमा को पूरा करना प्राथमिकता बताई गई है। राज्यपाल ने परियोजना की नियमित निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए हैं।