31 जुलाई 2026
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दीमापुर-कोहिमा रेल परियोजना: दिसंबर 2029 तक नागालैंड की राजधानी को मिलेगा पहला रेल संपर्क

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दीमापुर-कोहिमा रेल परियोजना: दिसंबर 2029 तक नागालैंड की राजधानी को मिलेगा पहला रेल संपर्क

सारांश

नागालैंड की राजधानी कोहिमा को पहली बार रेल नक्शे पर लाने की तैयारी है। एनएफआर ने राज्यपाल नंद किशोर यादव को बताया कि 78.42 किमी लंबी दीमापुर-कोहिमा परियोजना दिसंबर 2029 तक पूरी होगी। भूस्खलन-संभावित भूभाग और मानसूनी चुनौतियों के बीच यह पूर्वोत्तर के लिए एक बड़ा कनेक्टिविटी दांव है।

मुख्य बातें

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने 15 जून 2026 को राज्यपाल नंद किशोर यादव को दीमापुर-कोहिमा परियोजना की प्रगति से अवगत कराया।
78.42 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से दिसंबर 2029 तक कोहिमा को पहली बार राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
धनसिरी-शोखुवी और शोखुवी-मोलवोम खंड पहले ही चालू हो चुके हैं; शेष खंडों पर कार्य जारी।
परियोजना असम के कार्बी आंगलोंग और नागालैंड के चुमौकेदिमा व कोहिमा जिलों से होकर गुजरती है।
भूस्खलन-संभावित भूभाग, उच्च दबाव भूजल रिसाव और फॉल्ट जोन प्रमुख निर्माण चुनौतियाँ बताई गई हैं।
परियोजना पूर्ण होने पर यात्रा समय में कमी, माल ढुलाई, पर्यटन और रोज़गार सृजन में सुधार अपेक्षित।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने सोमवार, 15 जून 2026 को नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव को सूचित किया कि 78.42 किलोमीटर लंबी दीमापुर-कोहिमा रेलवे परियोजना पर निर्माण कार्य तेज़ गति से जारी है और दिसंबर 2029 तक राज्य की राजधानी कोहिमा को पहली बार राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत के उन दुर्गम क्षेत्रों में रेल संपर्क स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

समीक्षा बैठक में क्या हुआ

राज्यपाल नंद किशोर यादव ने कोहिमा में एनएफआर (निर्माण) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ धनसिरी-जुब्जा (दीमापुर-कोहिमा) नई रेलवे लाइन परियोजना की प्रगति और दीमापुर रेलवे स्टेशन के एकीकृत पुनर्विकास की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। लोकभवन के एक अधिकारी के अनुसार, बैठक में परियोजना की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

अधिकारियों ने बताया कि धनसिरी-शोखुवी और शोखुवी-मोलवोम खंड पहले ही चालू किए जा चुके हैं। शेष खंडों पर कठिन भूभाग और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों के बावजूद निर्माण कार्य निरंतर जारी है।

परियोजना का भौगोलिक विस्तार

यह राष्ट्रीय परियोजना असम के कार्बी आंगलोंग जिले और नागालैंड के चुमौकेदिमा तथा कोहिमा जिलों से होकर गुजरती है। परियोजना पूरी होने पर कोहिमा जिले को पहली बार सीधी रेल सुविधा मिलेगी — जो दशकों से पूर्वोत्तर के इस क्षेत्र की एक प्रमुख माँग रही है।

निर्माण में आ रही चुनौतियाँ

एनएफआर के अधिकारियों ने परियोजना के समक्ष कई गंभीर चुनौतियों की जानकारी दी। इनमें कठिन भूवैज्ञानिक परिस्थितियाँ, भूस्खलन-संभावित भूभाग, भारी मानसूनी वर्षा, खराब चट्टान गुणवत्ता, सीमित कार्य मौसम, कुशल श्रमिकों की कमी और बुनियादी ढाँचे की बाधाएँ शामिल हैं।

विशेष रूप से सुरंग निर्माण के दौरान उच्च दबाव वाले भूजल रिसाव और फॉल्ट जोन से उत्पन्न तकनीकी कठिनाइयाँ परियोजना की रफ़्तार को प्रभावित करती रही हैं। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर की पहाड़ी भूगोल में रेल परियोजनाएँ ऐतिहासिक रूप से निर्धारित समय-सीमा से पीछे रहती आई हैं।

आम जनता और क्षेत्र पर असर

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परियोजना पूरी होने पर दीमापुर और कोहिमा के बीच यात्रा का समय उल्लेखनीय रूप से घटेगा। इससे छात्रों, रोगियों और दैनिक यात्रियों की आवाजाही सुगम होगी। माल ढुलाई में सुविधा के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे।

यह परियोजना नागालैंड और व्यापक पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में दीर्घकालिक योगदान देने वाली मानी जा रही है। यह ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में बुनियादी ढाँचे के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है।

आगे क्या होगा

एनएफआर के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि शेष खंडों पर काम में तेज़ी लाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। दिसंबर 2029 की समय-सीमा को पूरा करना प्राथमिकता बताई गई है। राज्यपाल ने परियोजना की नियमित निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्वोत्तर की रेल परियोजनाओं का इतिहास बार-बार समय-सीमा चूकने का रहा है — और इस बार भी भूवैज्ञानिक चुनौतियाँ वही हैं जो पहले थीं। धनसिरी-शोखुवी जैसे खंड पहले चालू हो चुके हैं, यह उत्साहजनक है, लेकिन सुरंग-भारी शेष खंड ही असली परीक्षा हैं। 2029 की समय-सीमा तब विश्वसनीय बनेगी जब सरकार खंड-वार पूर्णता की सार्वजनिक समयरेखा और स्वतंत्र निगरानी तंत्र सामने रखे — अन्यथा यह एक और समीक्षा बैठक की सुर्खी बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीमापुर-कोहिमा रेलवे परियोजना क्या है?
यह 78.42 किलोमीटर लंबी एक राष्ट्रीय रेलवे परियोजना है जिसका उद्देश्य नागालैंड की राजधानी कोहिमा को पहली बार राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ना है। यह परियोजना असम के कार्बी आंगलोंग और नागालैंड के चुमौकेदिमा व कोहिमा जिलों से होकर गुजरती है।
कोहिमा को रेल संपर्क कब तक मिलेगा?
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के अनुसार, दिसंबर 2029 तक परियोजना पूरी होने और कोहिमा को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य है। अधिकारियों ने बताया कि काम में तेज़ी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
परियोजना में अब तक कितना काम पूरा हुआ है?
धनसिरी-शोखुवी और शोखुवी-मोलवोम खंड पहले ही चालू हो चुके हैं। शेष खंडों पर कठिन भूभाग और मानसूनी परिस्थितियों के बावजूद निर्माण जारी है।
इस रेल परियोजना से नागालैंड को क्या फायदा होगा?
परियोजना पूरी होने पर दीमापुर और कोहिमा के बीच यात्रा समय घटेगा, माल ढुलाई सुगम होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे। छात्रों, रोगियों और यात्रियों की आवाजाही में भी उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।
परियोजना के निर्माण में कौन-सी मुख्य बाधाएँ हैं?
एनएफआर अधिकारियों के अनुसार, भूस्खलन-संभावित भूभाग, भारी मानसूनी वर्षा, खराब चट्टान गुणवत्ता, सुरंग निर्माण में उच्च दबाव भूजल रिसाव और फॉल्ट जोन प्रमुख चुनौतियाँ हैं। कुशल श्रमिकों की कमी और सीमित कार्य मौसम भी काम की रफ़्तार को प्रभावित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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