नागालैंड CM नेफियू रियो ने दीमापुर में खाद्य प्रसंस्करण इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया, युवा उद्यमिता पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने 9 जून 2025 को दीमापुर के तोलुवी स्थित राज्य औद्योगिक क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण के लिए इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन करते हुए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को राज्य की आर्थिक रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि नागालैंड की लगभग 70 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है, इसलिए इस क्षेत्र को मजबूत करना राज्य की प्राथमिकता है।
उद्घाटन और योजना की पृष्ठभूमि
यह इनक्यूबेशन सेंटर भारत सरकार की राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता (SASCI) योजना के तहत स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री रियो ने बताया कि इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना और आर्थिक विकास को गति देना है। खाद्य प्रसंस्करण और लघु उद्योग को उन्होंने नागालैंड में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के सर्वाधिक आशाजनक क्षेत्र बताया।
आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
रियो ने स्वीकार किया कि नागालैंड मुख्यतः एक उपभोक्ता राज्य है, जो बाहर से आयातित उत्पादों पर अत्यधिक निर्भर है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये इनक्यूबेशन केंद्र स्थानीय उत्पादन और मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करेंगे, जिससे राज्य आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ये सुविधाएँ स्थानीय उद्यमियों को बाज़ार संपर्क स्थापित करने और कच्चे माल को बाज़ार के लिए तैयार उत्पादों में बदलने में सक्षम बनाएँगी।
किसानों और बिचौलियों का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने बिचौलियों की भूमिका को कम करने पर विशेष बल दिया, ताकि किसानों को उनकी उपज का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने केंद्र प्रबंधन के लिए गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने, नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने और बुनियादी ढाँचे का पूरा उपयोग करने का आह्वान किया।
युवा बेरोजगारी और उद्यमिता
रियो ने शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी दर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रोजगार मेलों में कम भागीदारी कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और उद्यमिता को प्राथमिकता देने की जरूरत को रेखांकित करती है। उन्होंने युवाओं से मुख्यमंत्री सूक्ष्म वित्त योजना सहित विभिन्न सरकारी पहलों का लाभ उठाने का आग्रह किया।
आगे की राह
इस पहल के माध्यम से नागालैंड सरकार राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन केंद्रों का संचालन प्रभावी ढंग से हुआ, तो यह पूर्वोत्तर भारत में कृषि-आधारित उद्यमिता का एक मॉडल बन सकता है।