24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नागपुर में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने कुर्क की 3.35 करोड़ की संपत्तियां

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नागपुर में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने कुर्क की 3.35 करोड़ की संपत्तियां

सारांश

नागपुर में ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत सचिन पांडे और उनके परिवार से जुड़ी 3.35 करोड़ की संपत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों के चलते की गई है।

मुख्य बातें

ईडी ने 3.35 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं।
सचिन पांडे पर आपराधिक गतिविधियों का आरोप।
जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं।
आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
मामले में आगे की जांच जारी।

नागपुर, 6 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय के उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने नागपुर में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत सचिन शत्रुघ्न पांडे और उनके परिवार से संबंधित 3.35 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर दिया है। कुर्क की गई संपत्तियों में तीन व्यावसायिक दुकानें और कुल 10.37 एकड़ क्षेत्रफल वाली दो ज़मीनें शामिल हैं। यह कार्रवाई ईडी ने प्राथमिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर की है।

ईडी ने अपनी जांच की शुरुआत नागपुर के धंतोली और सीताबर्डी पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। आरोप है कि सचिन शत्रुघ्न पांडे और उनके सहयोगी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं। जांच के दौरान यह पाया गया कि पांडे और उनकी पत्नी खुशी पांडे का नागपुर की दो संपत्तियों में कोई वैध हिस्सा नहीं था, फिर भी उन्होंने शिकायतकर्ता के साथ संपत्ति से संबंधित एक समझौता किया। जब संपत्ति का विधिवत हस्तांतरण नहीं हुआ, तो आरोपियों ने 31 मार्च 2013 तक पैसे लौटाने का वादा करते हुए एक कैंसलेशन एग्रीमेंट किया।

हालांकि, जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने जानबूझकर समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और शिकायतकर्ता को 2.2 करोड़ रुपए नहीं लौटाए। इस राशि का निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया, जिससे शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान हुआ।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सचिन पांडे और उनके सहयोगियों ने चंद्रप्रकाश वाधवानी को उनकी कंपनी मेसर्स लुफ्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से बिना किसी सुरक्षा के 18 करोड़ रुपए का विदेशी ऋण दिलाने का झांसा दिया। आरोप है कि लोन की व्यवस्था के नाम पर 1.2 करोड़ रुपए नकद लिए गए, लेकिन न तो वादा पूरा किया गया, न ही ऋण दिया गया, और न ही ली गई राशि वापस की गई। ईडी के अनुसार, इस प्रकार शिकायतकर्ता को 1.2 करोड़ रुपए का अतिरिक्त नुकसान हुआ।

धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी से प्राप्त रकम का एक हिस्सा उनके और उनके परिवार के सदस्यों तथा संबंधित कंपनियों के बैंक खातों में जमा किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 90 लाख रुपए पायनियर ग्रुप की एक परियोजना में फ्लैट खरीदने में लगाए गए, 20 लाख रुपए सहयोगी स्वर्णिम जयकुमार दीक्षित के खाते में ट्रांसफर किए गए और 70 लाख रुपए से अधिक की राशि रोजमर्रा के निजी खर्चों में खर्च की गई। इसके अलावा कुछ धनराशि का उपयोग आरोपी की पत्नी के भारत और विदेश में इलाज के लिए तथा अन्य अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें आरोपी पर गंभीर आरोप लगे हैं। यह जांच इस बात का संकेत है कि कानून कमजोर नहीं है और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने किस आधार पर संपत्तियां कुर्क कीं?
ईडी ने प्राथमिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर संपत्तियां कुर्क कीं।
कुर्क की गई संपत्तियों में क्या शामिल है?
कुर्क की गई संपत्तियों में तीन व्यावसायिक दुकानें और दो ज़मीनें शामिल हैं।
सचिन पांडे पर क्या आरोप हैं?
सचिन पांडे और उनके सहयोगियों पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं।
जांच में क्या पाया गया?
जांच में पता चला कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को पैसे लौटाने का वादा किया था, लेकिन वह पूरा नहीं किया।
ईडी की कार्रवाई का महत्व क्या है?
ईडी की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले