नागपुर में 81 वर्षीय महिला से ₹3.05 लाख की ठगी, 'मां जगदंबा रूठी हैं' का झांसा देकर चार आरोपी फरार
सारांश
मुख्य बातें
नागपुर के इमामवाड़ा थाना क्षेत्र में अंधविश्वास की आड़ लेकर एक 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला से ₹3.05 लाख मूल्य के सोने के जेवरात और मोबाइल फोन की ठगी का मामला सामने आया है। 10 जुलाई को घटित इस वारदात में आरोपियों ने धार्मिक भय का सहारा लेकर पीड़िता को विश्वास दिलाया कि उनके परिवार पर बड़ा संकट आने वाला है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमें गठित की हैं।
कैसे दिया गया झांसा
मेडिकल रोड निवासी सुजाता भगवानलाल अग्रवाल सुबह मंदिर में दर्शन के बाद अपनी बेटी के घर जा रही थीं। इसी दौरान दो अज्ञात युवक उनके पास पहुँचे। एक युवक ने दावा किया कि 'मां जगदंबा उनसे रूठी हुई हैं', जबकि दूसरे ने कहा कि महिला और उनके बेटों पर गंभीर संकट आने वाला है। इसके बाद दोनों ने विशेष पूजा के माध्यम से यह संकट दूर करने का झांसा दिया।
आरोपियों ने पीड़िता को एक पीले रंग की थैली दी और कहा कि पूजा की सफलता के लिए अपनी सोने की चेन, कंगन, अन्य आभूषण और मोबाइल उसमें रख दें। साथ ही यह भी कहा गया कि 51 कदम तक पीछे मुड़कर नहीं देखना, अन्यथा पूजा निष्फल हो जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
जैसे ही महिला आगे बढ़ीं, दोनों युवक जेवरात और मोबाइल लेकर फरार हो गए। कुछ दूरी तय करने के बाद जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो आरोपी गायब थे। ठगी का एहसास होते ही उन्होंने तत्काल इमामवाड़ा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों की सीसीटीवी फुटेज खंगाली, जिसमें सामने आया कि इस वारदात में केवल दो नहीं, बल्कि चार आरोपी शामिल थे। सभी मोटरसाइकिल पर सवार होकर घटनास्थल से फरार हुए।
पुलिस की जाँच और संदिग्धों का विवरण
इमामवाड़ा थाने के पुलिस निरीक्षक जयवंत पाटिल ने बताया कि आरोपियों की भाषा हिंदी थी। प्रारंभिक जाँच के आधार पर आशंका है कि वे मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश के रहने वाले हो सकते हैं। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनकी पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
आम जनता के लिए पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के बहकावे में न आएँ और धार्मिक आस्था या अंधविश्वास के नाम पर किसी को भी कीमती सामान न सौंपें। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में तत्काल पुलिस को सूचना देना ही सबसे प्रभावी बचाव है।
गौरतलब है कि अंधविश्वास-आधारित ठगी के ऐसे मामले देश के कई शहरों में सामने आते रहे हैं, जिनमें बुजुर्ग और अकेले व्यक्तियों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है। पुलिस आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।