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नागपुर में 81 वर्षीय महिला से ₹3.05 लाख की ठगी, 'मां जगदंबा रूठी हैं' का झांसा देकर चार आरोपी फरार

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नागपुर में 81 वर्षीय महिला से ₹3.05 लाख की ठगी, 'मां जगदंबा रूठी हैं' का झांसा देकर चार आरोपी फरार

सारांश

नागपुर में 'मां जगदंबा रूठी हैं' का धार्मिक भय दिखाकर चार ठगों ने 81 वर्षीय सुजाता अग्रवाल से ₹3.05 लाख के सोने के जेवरात और मोबाइल लूट लिए। मोटरसाइकिल पर फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की दो विशेष टीमें सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं।

मुख्य बातें

नागपुर के इमामवाड़ा थाना क्षेत्र में 10 जुलाई को 81 वर्षीय महिला सुजाता भगवानलाल अग्रवाल से ₹3.05 लाख मूल्य के सोने के जेवरात और मोबाइल की ठगी हुई।
आरोपियों ने 'मां जगदंबा रूठी हैं' और परिवार पर संकट का भय दिखाकर पीड़िता को पीले रंग की थैली में आभूषण रखवाए।
पीड़िता को 51 कदम तक पीछे न देखने का निर्देश दिया गया, इसी दौरान आरोपी फरार हो गए।
सीसीटीवी जाँच में सामने आया कि वारदात में चार आरोपी शामिल थे, जो मोटरसाइकिल पर भागे।
पुलिस निरीक्षक जयवंत पाटिल के अनुसार आरोपी हिंदी भाषी हैं और संभवतः मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश से हैं।
गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमें गठित की गई हैं।

नागपुर के इमामवाड़ा थाना क्षेत्र में अंधविश्वास की आड़ लेकर एक 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला से ₹3.05 लाख मूल्य के सोने के जेवरात और मोबाइल फोन की ठगी का मामला सामने आया है। 10 जुलाई को घटित इस वारदात में आरोपियों ने धार्मिक भय का सहारा लेकर पीड़िता को विश्वास दिलाया कि उनके परिवार पर बड़ा संकट आने वाला है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमें गठित की हैं।

कैसे दिया गया झांसा

मेडिकल रोड निवासी सुजाता भगवानलाल अग्रवाल सुबह मंदिर में दर्शन के बाद अपनी बेटी के घर जा रही थीं। इसी दौरान दो अज्ञात युवक उनके पास पहुँचे। एक युवक ने दावा किया कि 'मां जगदंबा उनसे रूठी हुई हैं', जबकि दूसरे ने कहा कि महिला और उनके बेटों पर गंभीर संकट आने वाला है। इसके बाद दोनों ने विशेष पूजा के माध्यम से यह संकट दूर करने का झांसा दिया।

आरोपियों ने पीड़िता को एक पीले रंग की थैली दी और कहा कि पूजा की सफलता के लिए अपनी सोने की चेन, कंगन, अन्य आभूषण और मोबाइल उसमें रख दें। साथ ही यह भी कहा गया कि 51 कदम तक पीछे मुड़कर नहीं देखना, अन्यथा पूजा निष्फल हो जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

जैसे ही महिला आगे बढ़ीं, दोनों युवक जेवरात और मोबाइल लेकर फरार हो गए। कुछ दूरी तय करने के बाद जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो आरोपी गायब थे। ठगी का एहसास होते ही उन्होंने तत्काल इमामवाड़ा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों की सीसीटीवी फुटेज खंगाली, जिसमें सामने आया कि इस वारदात में केवल दो नहीं, बल्कि चार आरोपी शामिल थे। सभी मोटरसाइकिल पर सवार होकर घटनास्थल से फरार हुए।

पुलिस की जाँच और संदिग्धों का विवरण

इमामवाड़ा थाने के पुलिस निरीक्षक जयवंत पाटिल ने बताया कि आरोपियों की भाषा हिंदी थी। प्रारंभिक जाँच के आधार पर आशंका है कि वे मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश के रहने वाले हो सकते हैं। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनकी पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

आम जनता के लिए पुलिस की अपील

पुलिस ने नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के बहकावे में न आएँ और धार्मिक आस्था या अंधविश्वास के नाम पर किसी को भी कीमती सामान न सौंपें। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में तत्काल पुलिस को सूचना देना ही सबसे प्रभावी बचाव है।

गौरतलब है कि अंधविश्वास-आधारित ठगी के ऐसे मामले देश के कई शहरों में सामने आते रहे हैं, जिनमें बुजुर्ग और अकेले व्यक्तियों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है। पुलिस आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मोटरसाइकिल पर त्वरित पलायन और राज्य की सीमाओं से परे संभावित ठिकाना, ये सब किसी अकस्मात् वारदात के नहीं बल्कि पूर्व-नियोजित अपराध के संकेत हैं। धार्मिक आस्था को हथियार बनाना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पीड़िता मंदिर से लौट रही थीं — यानी अपराधियों ने उनकी दिनचर्या और मनोदशा दोनों को भाँपकर वारदात की। पुलिस को केवल इस एक मामले की जाँच नहीं, बल्कि यह पड़ताल करनी चाहिए कि क्या यही गिरोह अन्य शहरों में भी सक्रिय है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागपुर में 81 वर्षीय महिला से कैसे हुई ठगी?
आरोपियों ने मंदिर से लौट रही सुजाता भगवानलाल अग्रवाल को 'मां जगदंबा रूठी हैं' और परिवार पर संकट का भय दिखाकर एक पीली थैली में उनके सोने के जेवरात और मोबाइल रखवाए। 51 कदम तक पीछे न देखने का निर्देश देकर आरोपी ₹3.05 लाख का सामान लेकर फरार हो गए।
ठगी में कितने आरोपी शामिल थे और वे कहाँ के हो सकते हैं?
सीसीटीवी फुटेज की जाँच में सामने आया कि वारदात में कुल चार आरोपी शामिल थे, जो मोटरसाइकिल पर सवार होकर फरार हुए। पुलिस निरीक्षक जयवंत पाटिल के अनुसार आरोपी हिंदी भाषी हैं और प्रारंभिक जाँच के आधार पर वे मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश के हो सकते हैं।
पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए क्या कदम उठा रही है?
इमामवाड़ा पुलिस ने दो विशेष टीमें गठित की हैं जो सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और तलाश में जुटी हैं। घटनास्थल के आसपास के सभी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
अंधविश्वास-आधारित ठगी से बुजुर्ग खुद को कैसे बचाएँ?
पुलिस ने अपील की है कि कोई भी अनजान व्यक्ति धार्मिक आस्था या संकट का भय दिखाकर कीमती सामान माँगे तो तत्काल मना करें और नज़दीकी पुलिस थाने में सूचना दें। परिवार के बुजुर्गों को ऐसी ठगी के तरीकों के बारे में जागरूक करना सबसे प्रभावी बचाव है।
क्या नागपुर में इस तरह की ठगी पहले भी हुई है?
अंधविश्वास-आधारित ठगी के मामले देशभर के कई शहरों में सामने आते रहे हैं, जिनमें बुजुर्गों और अकेले व्यक्तियों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है। वर्तमान मामले में गिरोह का संगठित स्वरूप — चार सदस्य, मोटरसाइकिल और सुनियोजित भूमिकाएँ — यह संकेत देता है कि यह स्थानीय नहीं बल्कि बाहरी गिरोह हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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