नाखूनों में दिखें ये 5 बदलाव तो न करें अनदेखा — शरीर की अंदरूनी बीमारी के हो सकते हैं संकेत
सारांश
मुख्य बातें
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नाखून केवल हाथों की सुंदरता का हिस्सा नहीं हैं — उनकी रंगत, मोटाई और बनावट में आने वाले बदलाव शरीर की अंदरूनी स्वास्थ्य स्थिति के महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। चूँकि नाखून धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए शरीर में लंबे समय से चल रही किसी परेशानी का असर उन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। हालाँकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि नाखून में कोई बदलाव दिखते ही किसी गंभीर बीमारी का अनुमान लगाना उचित नहीं है — चोट, संक्रमण या सामान्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
पीले और मोटे नाखून: फंगल इंफेक्शन की आशंका
नाखूनों का पीला पड़ना अक्सर फंगल इंफेक्शन की ओर इशारा करता है। ऐसे मामलों में नाखून मोटे, कमज़ोर और बेजान हो सकते हैं, और उनकी सामान्य चमक भी खत्म हो जाती है। कुछ लोगों में नाखून आसानी से टूटने लगते हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से जाँच कराना उचित है।
सफेद या फीके नाखून: एनीमिया और लिवर से जुड़ा संकेत
नाखूनों का अत्यधिक सफेद या फीका दिखना कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। कुछ स्थितियों में यह खून की कमी (एनीमिया) से जुड़ा हो सकता है — विशेषकर जब इसके साथ लगातार थकान या कमज़ोरी भी महसूस हो। चिकित्सा शोध में नाखूनों के असामान्य रूप से सफेद होने को कुछ मामलों में लिवर की बीमारी और अन्य अंदरूनी समस्याओं से भी जोड़ा गया है। हालाँकि नाखून का रंग अकेले किसी बीमारी की पुष्टि नहीं करता।
मोटाई और बनावट में बदलाव: थायरॉइड का संभावित संकेत
यदि नाखून लगातार मोटे, सूखे या जल्दी टूटने लगें, तो इसके पीछे संक्रमण के अलावा अन्य कारण भी हो सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं में नाखूनों की वृद्धि और बनावट में बदलाव देखा गया है। यदि इसके साथ वजन में उतार-चढ़ाव, थकान या शरीर में अन्य परेशानियाँ भी हों, तो जाँच कराना आवश्यक है।
ब्यूज़ लाइंस: गंभीर बीमारी या कीमोथेरेपी का निशान
नाखून पर बनने वाली गहरी आड़ी लकीरों को चिकित्सा भाषा में 'ब्यूज़ लाइंस' कहा जाता है। ये तब उभरती हैं जब नाखून की वृद्धि की प्रक्रिया किसी कारण से अस्थायी रूप से धीमी पड़ जाती है — जैसे तेज बुखार, गंभीर बीमारी, चोट या शरीर पर पड़े किसी बड़े तनाव के बाद। कीमोथेरेपी के बाद भी ऐसी लकीरें देखी जा सकती हैं। चूँकि नाखून धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए बीमारी या तनाव समाप्त होने के काफी समय बाद भी उसका निशान नाखून पर दिखाई दे सकता है।
नाखून के नीचे काली-भूरी लकीर: तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ
सबसे अधिक सतर्कता की आवश्यकता तब होती है जब नाखून के नीचे कोई नई काली या भूरी लकीर उभरे। यह चोट या त्वचा के रंग में सामान्य बदलाव के कारण भी हो सकती है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में यह नाखून के नीचे होने वाले मेलानोमा — एक गंभीर प्रकार के त्वचा कैंसर — का संकेत हो सकती है। यदि ऐसी लकीर अचानक दिखे, समय के साथ चौड़ी या गहरी होती जाए, उसका रंग बदले या आसपास की त्वचा पर भी कोई बदलाव नज़र आए, तो बिना देरी किए त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना ज़रूरी है।
गौरतलब है कि नाखूनों में दिखने वाले ये बदलाव हमेशा किसी बड़ी बीमारी के संकेत नहीं होते, लेकिन यदि बदलाव लंबे समय तक बना रहे या अन्य शारीरिक लक्षणों के साथ हो, तो समय पर चिकित्सीय जाँच ही सबसे सही कदम है।