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राजस्थान हाई कोर्ट ने नरेश मीणा को एसडीएम थप्पड़ कांड में दी जमानत, सशर्त बेल मंजूर

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राजस्थान हाई कोर्ट ने नरेश मीणा को एसडीएम थप्पड़ कांड में दी जमानत, सशर्त बेल मंजूर

सारांश

राजस्थान हाई कोर्ट ने एसडीएम को कथित थप्पड़ मारने के मामले में निर्दलीय नेता नरेश मीणा को दूसरी बार सशर्त जमानत दी — पहली बेल जुलाई में रद्द होने के बाद।

मुख्य बातें

राजस्थान हाई कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को निर्दलीय नेता नरेश मीणा को एसडीएम थप्पड़ कांड में सशर्त जमानत दी।
जस्टिस अनिल उपमन ने आदेश दिया कि मीणा हर महीने के पहले सप्ताह में संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी देंगे।
बेल अवधि में किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल होने और सार्वजनिक छवि प्रचार पर प्रतिबंध लगाया गया।
टोंक की स्पेशल SC/ST कोर्ट ने जुलाई में बेल शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाकर पूर्व जमानत रद्द की थी।
मूल घटना 13 नवंबर 2024 को टोंक जिले के समरावता गाँव में एसडीएम अमित चौधरी को कथित थप्पड़ मारने की है।
कोर्ट ने नोट किया कि मीणा के खिलाफ दर्ज तीन में से दो मामलों में उन्हें आरोपी नहीं पाया गया।

राजस्थान हाई कोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को निर्दलीय नेता नरेश मीणा को नवंबर 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम अमित चौधरी को कथित तौर पर थप्पड़ मारने के मामले में एक बार फिर जमानत प्रदान कर दी। जस्टिस अनिल उपमन की पीठ ने यह सशर्त बेल मंजूर की और मीणा पर कड़ी शर्तें लगाई हैं।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस अनिल उपमन ने आदेश दिया कि नरेश मीणा बेल अवधि के दौरान हर महीने के पहले सप्ताह में संबंधित पुलिस स्टेशन में अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज कराएँगे। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बेल पर रहते हुए वह किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल नहीं होंगे। रिहाई के बाद अपनी सार्वजनिक छवि को प्रचार-प्रसार से चमकाने पर भी कोर्ट ने रोक लगाई है।

पहले की बेल रद्द होने की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि राजस्थान हाई कोर्ट ने इसी मामले में मीणा को पहले भी जमानत दी थी। हालाँकि, टोंक स्थित एससी/एसटी मामलों की स्पेशल कोर्ट ने जुलाई में अभियोजन पक्ष की अर्जी को स्वीकार करते हुए उनकी बेल रद्द कर दी थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि मीणा ने बेल की शर्तों का उल्लंघन किया। इसके बाद अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जिसके बाद मीणा ने स्वयं सरेंडर किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

बेल रद्द होने का सीधा संबंध नगरफोर्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अलग मामले से था। पुलिस का आरोप था कि झालावाड़ में एक स्कूल से जुड़ी घटना में सात बच्चों की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तारी के बाद मीणा ने बेल शर्तों का उल्लंघन किया।

हाई कोर्ट की नई टिप्पणियाँ

नए आदेश में राजस्थान हाई कोर्ट ने रेखांकित किया कि मीणा को शुरुआती बेल मिलने के बाद उनके खिलाफ दर्ज तीन मामलों में से दो में उन्हें आरोपी नहीं पाया गया। तीसरे मामले के संदर्भ में कोर्ट ने नोट किया कि मीणा को हाई कोर्ट से बेल पहले ही मिल चुकी थी और वह नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगा रहे थे।

बचाव पक्ष की दलीलें

मीणा के अधिवक्ता रजनीश गुप्ता और फतेह राम मीणा ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले राजनीति से प्रेरित हैं। अधिवक्ताओं ने झालावाड़ मामले का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि हाई कोर्ट ने उस मामले में बेल देते समय कहा था कि यह मामला प्रथमदृष्टया राजनीतिक प्रतीत होता है।

मूल घटना और उसके बाद की हिंसा

यह पूरा विवाद 13 नवंबर 2024 की उस घटना से जुड़ा है जब नरेश मीणा — जो उस समय देवली-उनियारा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी थे — ने टोंक जिले के समरावता गाँव में एसडीएम अमित चौधरी को कथित तौर पर थप्पड़ मारा था। इस घटना के बाद समरावता सहित कई इलाकों में आगजनी और तोड़-फोड़ की घटनाएँ हुई थीं। बाद में मीणा को हिंसा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला राजस्थान की न्यायिक और राजनीतिक गतिविधियों में लंबे समय से सुर्खियों में है, और अब हाई कोर्ट के नए आदेश के साथ एक नया मोड़ आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजस्थान में चुनावी राजनीति और कानून के बीच बढ़ते टकराव का प्रतीक बन चुका है। बचाव पक्ष का 'राजनीतिक प्रेरणा' का तर्क और हाई कोर्ट की यह टिप्पणी कि झालावाड़ मामला 'प्रथमदृष्टया राजनीतिक' लगता है — दोनों मिलकर यह सवाल उठाते हैं कि क्या आपराधिक मशीनरी का इस्तेमाल विपक्षी निर्दलीय उम्मीदवारों को लंबित मुकदमेबाजी में उलझाने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, एक निर्वाचित लोकतंत्र में सरकारी अधिकारी पर हमले को किसी भी राजनीतिक संदर्भ में सामान्य नहीं माना जा सकता — यह प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर चोट है। इस मामले का असली परीक्षण अदालत के अगले दौर में होगा, जहाँ बचे हुए आरोपों पर सुनवाई होगी।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेश मीणा कौन हैं और उनके खिलाफ मामला क्या है?
नरेश मीणा राजस्थान के एक निर्दलीय नेता हैं, जो नवंबर 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी थे। उन पर 13 नवंबर 2024 को टोंक जिले के समरावता गाँव में एसडीएम अमित चौधरी को कथित तौर पर थप्पड़ मारने और उसके बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों में आरोप हैं।
राजस्थान हाई कोर्ट ने इस बार जमानत देते हुए क्या शर्तें लगाई हैं?
जस्टिस अनिल उपमन ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत देते हुए तीन प्रमुख निर्देश दिए — हर महीने के पहले सप्ताह में संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी, बेल अवधि में किसी नए आपराधिक मामले में संलिप्त न होना, और रिहाई के बाद सार्वजनिक छवि प्रचार पर प्रतिबंध।
पहले की जमानत क्यों रद्द हुई थी?
टोंक की एससी/एसटी स्पेशल कोर्ट ने जुलाई में अभियोजन पक्ष की अर्जी मंजूर करते हुए पहले की बेल रद्द की थी। आरोप था कि झालावाड़ में एक स्कूल घटना में सात बच्चों की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में गिरफ्तारी के बाद मीणा ने बेल की शर्तों का उल्लंघन किया था।
हाई कोर्ट ने नए आदेश में क्या अहम बात कही?
हाई कोर्ट ने नोट किया कि मीणा के खिलाफ दर्ज तीन मामलों में से दो में उन्हें आरोपी नहीं पाया गया। तीसरे मामले में कोर्ट ने पाया कि मीणा को पहले ही हाई कोर्ट से बेल मिल चुकी थी और वह नियमित पुलिस हाजिरी दे रहे थे।
एसडीएम थप्पड़ कांड के बाद क्या हुआ था?
13 नवंबर 2024 की घटना के बाद समरावता और आसपास के इलाकों में आगजनी और तोड़-फोड़ की घटनाएँ हुई थीं। नरेश मीणा को बाद में हिंसा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला राजस्थान में चुनावी और न्यायिक गतिविधियों में लंबे समय से चर्चा का विषय है।
राष्ट्र प्रेस
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