नरवर किले से 500 साल पुरानी अष्टधातु तोप चोरी, 25-30 हथियारबंद बदमाशों ने दिया वारदात को अंजाम
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले से 500 साल पुरानी अष्टधातु की तोप चोरी हो गई। 15 और 16 जुलाई 2026 की दरमियानी रात को 25-30 हथियारबंद बदमाशों ने इस सुनियोजित वारदात को अंजाम दिया। लगभग 3,000 किलोग्राम वजनी यह तोप सिंधिया राजवंश के काल की अमूल्य धरोहर थी, और इसकी चोरी ने ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बदमाश किले के पिछले रास्ते से अंदर दाखिल हुए और भारी-भरकम तोप को उठाने के लिए क्रेन व ट्रक जैसे लोडिंग वाहन साथ लाए थे। घटना के समय ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड बालकिशन के अनुसार, बदमाशों के पास आधुनिक हथियार थे, जबकि सुरक्षाकर्मियों के पास केवल लाठियाँ थीं। इलाके में रोशनी की कमी और टॉर्च जैसे बुनियादी उपकरणों का अभाव था, जिससे प्रतिरोध करना असंभव हो गया। जान के डर से बालकिशन को पीछे हटना पड़ा।
किले के खुले कचहरी परिसर में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से एक यह तोप उठाकर ले जाई गई। चोर पीछे केवल 13 तोपें छोड़ गए।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच
कराइरा के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर प्रशांत शर्मा ने बताया, 'अंधेरे का फायदा उठाकर बदमाशों ने बहुत सोच-समझकर इस वारदात को अंजाम दिया।' उन्होंने कहा कि जाँचकर्ता सीसीटीवी फुटेज, वाहनों की आवाजाही और संभावित स्थानीय संपर्कों की जाँच कर रहे हैं। जाँच में ऐसे सुरागों पर काम हो रहा है जो एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।
शर्मा ने यह भी कहा, 'हो सकता है कि गार्ड ड्यूटी पर न हो। अगर उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी होती, तो शायद यह घटना न होती।' इससे सुरक्षा व्यवस्था की खामियाँ और उजागर हुई हैं।
पूर्व चेतावनियाँ और प्रशासनिक लापरवाही
गौरतलब है कि चोरी से लगभग 12 दिन पहले किले के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। आलोचकों का कहना है कि पुलिस ने इन संकेतों को नज़रअंदाज़ किया, जिसने अपराधियों को निर्बाध तैयारी का मौका दिया। इस चूक ने प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल और गहरे कर दिए हैं।
अष्टधातु तोप का ऐतिहासिक महत्व
आठ धातुओं — सोना, चाँदी, ताँबा, जस्ता, लोहा, टिन, सीसा और पारा — के मिश्रण से बनी यह तोप सिंधिया राजवंश के शासनकाल की बेशकीमती निशानी थी। इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व केवल धातु के मूल्य तक सीमित नहीं, बल्कि यह मध्य प्रदेश की समृद्ध विरासत का अभिन्न हिस्सा थी। एंटीक तस्करी के अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऐसी दुर्लभ वस्तुओं की माँग को देखते हुए, अधिकारी इसे संगठित अपराध का हिस्सा मान रहे हैं।
क्या होगा आगे
पुलिस ने विस्तृत जाँच शुरू कर दी है और प्रशांत शर्मा ने दोषियों को जल्द पकड़ने का भरोसा दिलाया है। यह घटना राज्य के पुरातत्व विभाग और गृह मंत्रालय के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश भर के असुरक्षित ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा नीति की तत्काल समीक्षा की जरूरत है।