नसीम बानो: जिस 'ब्यूटी क्वीन' ने सायरा-दिलीप की प्रेम कहानी को दी नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा की नसीम बानो — जिन्हें उनके दौर में 'ब्यूटी क्वीन' कहा जाता था — की पुण्यतिथि (18 जून) पर उनकी वह भूमिका एक बार फिर चर्चा में है, जिसने बेटी सायरा बानो और दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। 1935 में रुपहले पर्दे पर कदम रखने वाली नसीम बानो ने अभिनय, फिल्म निर्माण और कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग — तीनों मोर्चों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
पुरानी दिल्ली से रुपहले पर्दे तक का सफर
4 जुलाई 1916 को पुरानी दिल्ली में रोशन आरा बेगम के रूप में जन्मी नसीम बानो की माँ चाहती थीं कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनें। लेकिन फिल्मों का आकर्षण बचपन से ही उन पर हावी था। एक बार शूटिंग देखने के दौरान उनकी मुलाकात मशहूर फिल्मकार सोहराब मोदी से हुई, जिन्होंने उन्हें अपनी फिल्म में काम करने का प्रस्ताव दिया। माँ ने शुरुआत में इनकार किया, लेकिन नसीम की दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे उन्हें हाँ कहनी पड़ी।
करियर का सुनहरा दौर
1935 में फिल्म 'खून का खून' से अभिनय की शुरुआत करने के बाद नसीम बानो को असली पहचान 1939 में आई फिल्म 'पुकार' से मिली, जिसमें उन्होंने नूरजहाँ का किरदार निभाया। इस भूमिका ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया और 'ब्यूटी क्वीन' की उपाधि दिलाई। उनकी लोकप्रियता भारत की सीमाओं से परे विदेशों तक फैली थी।
उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में 'तलाक', 'वसंती', 'चल चल रे नौजवान', 'अनोखी अदा', 'शीश महल' और 'शबिस्तान' शामिल हैं। वह अपने दौर की सर्वाधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने फिल्म निर्माण और कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
वह मोड़ जिसने सायरा और दिलीप को एक किया
नसीम बानो ने मियां एहसान-उल-हक से विवाह किया। उनकी बेटी सायरा बानो बचपन से ही अभिनेता दिलीप कुमार की प्रशंसक थीं। जब सायरा का नाम अभिनेता राजेंद्र कुमार के साथ जोड़ा जाने लगा, तो नसीम बानो चिंतित हो उठीं। कई रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने दिलीप कुमार से सायरा को समझाने की बात की। इसी बातचीत के क्रम में दिलीप कुमार और सायरा बानो के बीच नज़दीकियाँ बढ़ीं और 1966 में दोनों ने विवाह कर लिया। माना जाता है कि इस रिश्ते को सही दिशा देने में नसीम बानो की भूमिका निर्णायक रही।
विरासत और अंतिम विदाई
फिल्मों में लंबा और सफल सफर तय करने के बाद नसीम बानो ने अभिनय से किनारा कर लिया। 18 जून 2002 को 85 वर्ष की आयु में मुंबई में उनका निधन हो गया। उनकी विरासत आज भी बेटी सायरा बानो के रूप में जीवित है — और उस प्रेम कहानी में, जिसे शायद नसीम बानो ने खुद लिखी थी।