मध्य प्रदेश के सीहोर में बनेगा नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट, 20 हेक्टेयर भूमि आवंटित
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 11 अगस्त 2026 को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में राज्य सरकार ने ग्राम भाऊखेड़ी, तहसील इछावर, जिला सीहोर में 20 हेक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने का निर्णय लिया। यह संस्थान देश के लगभग 50 लाख सोयाबीन किसानों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करेगा।
संस्थान की पृष्ठभूमि और संरचना
नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) के अंतर्गत गठित एक उपक्रम है। यह केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा पूर्णरूप से वित्त पोषित किया जाता है। आवंटित भूमि का उपयोग विशुद्ध रूप से कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करने के लिए किया जाएगा।
किसानों पर असर और कृषि प्रगति की उम्मीद
यह संस्थान सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्य प्रदेश देश का प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्य है और इस केंद्र की स्थापना से प्रदेश में सोयाबीन की खेती में चहुँमुखी प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि यह निर्णय किसान वर्ष के संदर्भ में लिया गया है, जो सोयाबीन उत्पादकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे पर बड़े फैसले
मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम और स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था सहित कई योजनाओं के 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए ₹44,515.13 करोड़ की स्वीकृति दी।
इसके साथ ही भोपाल-विदिशा मार्ग को 2-लेन से 4-लेन में उन्नत करने के लिए ₹1,757.57 करोड़ की मंजूरी भी दी गई। सांची स्तूप और कर्क रेखा जैसे प्रमुख स्थलों से गुजरने वाले इस मार्ग के निर्माण से औद्योगिक निवेश और प्रादेशिक कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भोपाल बायपास पर टोल संग्रहण की अवधि बढ़ी
मंत्रि-परिषद ने भोपाल बायपास को 6-लेन बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए टोल टैक्स शुल्क संग्रहण की अनुमति 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। यह निर्णय भोपाल को मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की व्यापक योजना का हिस्सा बताया जा रहा है।
इन निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार कृषि अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढाँचे — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।