3 जुलाई 2026
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प्राकृतिक खेती से लागत घटेगी, जन स्वास्थ्य सुधरेगा: गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत का भावनगर में आह्वान

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प्राकृतिक खेती से लागत घटेगी, जन स्वास्थ्य सुधरेगा: गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत का भावनगर में आह्वान

सारांश

गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भावनगर के सरतानपार गाँव में साफ कहा — प्राकृतिक खेती सिर्फ कृषि पद्धति नहीं, यह 'विष मुक्त भारत' का राष्ट्रीय मिशन है। 105 महिलाओं के स्तन दूध में कीटनाशकों के अंश मिलने की वैज्ञानिक चेतावनी के साथ उन्होंने किसानों से जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 2 जुलाई 2026 को भावनगर के सरतानपार गाँव में प्राकृतिक खेती सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने प्राकृतिक खेती को 'विष मुक्त भारत' के निर्माण से जुड़ा राष्ट्रीय मिशन बताया।
एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार 105 महिलाओं के स्तन दूध के नमूनों में कीटनाशकों, डिटर्जेंट और यूरिया के अंश पाए गए।
रासायनिक खेती से मिट्टी, जल, वायु प्रदूषण के साथ-साथ उर्वरक आयात और स्वास्थ्य व्यय का भारी बोझ देश पर पड़ रहा है।
राज्यपाल ने प्रत्येक प्राकृतिक किसान से गाँव के कम से कम दस और किसानों को इस पद्धति से जोड़ने की अपील की।

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 2 जुलाई 2026 को भावनगर जिले के सरतानपार गाँव में आयोजित एक प्राकृतिक खेती सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि खेती की लागत घटाने, जन स्वास्थ्य में सुधार लाने और 'विष मुक्त भारत' के निर्माण के लिए जन भागीदारी के ज़रिए प्राकृतिक खेती को एक व्यापक जन आंदोलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को महज एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा एक राष्ट्रीय मिशन बताया।

रासायनिक खेती से बढ़ता संकट

राज्यपाल देवव्रत ने सम्मेलन में कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी, जल, वायु और भोजन को प्रदूषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे गंभीर बीमारियों में वृद्धि हुई है और उर्वरक आयात तथा स्वास्थ्य देखभाल व्यय के रूप में देश पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि रासायनिक खेती से मिट्टी सख्त हो जाती है, जिससे भूजल पुनर्भरण में बाधा आती है।

वैज्ञानिक अध्ययन की चेतावनी

एक वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए राज्यपाल ने बताया कि शोधकर्ताओं ने 105 महिलाओं से एकत्र किए गए स्तन दूध के नमूनों में कीटनाशकों, डिटर्जेंट और यूरिया के अंश पाए हैं। उन्होंने इन निष्कर्षों को मानव स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कैंसर और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों की दर चिंताजनक गति से बढ़ रही है।

प्राकृतिक खेती के लाभ

राज्यपाल ने कहा कि प्रकृति के पास मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की अपनी व्यवस्था है। केंचुए, सूक्ष्मजीव और देसी गायों पर आधारित खेती से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है और वर्षा जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने जोर दिया कि प्राकृतिक खेती से खेती की लागत घटती है, विष-मुक्त और पौष्टिक भोजन का उत्पादन होता है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।

हिमाचल प्रदेश का अनुभव और आगे की राह

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में अपने पूर्व कार्यकाल का उल्लेख करते हुए आचार्य देवव्रत ने बताया कि प्राकृतिक खेती की सफलता ने वहाँ के हज़ारों किसानों को इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित किया, और अब यह संख्या लाखों में पहुँच गई है। गौरतलब है कि यह देश में प्राकृतिक खेती के बढ़ते प्रसार का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती कर रहे प्रत्येक किसान से अपील की कि वे अपने गाँव के कम से कम दस और किसानों को इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें और स्थानीय निवासियों से मिशन मोड में इसे लागू करने का आह्वान किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस आंदोलन को नीतिगत समर्थन और बाज़ार-संपर्क कैसे मिलेगा। हिमाचल प्रदेश में लाखों किसानों के अपनाने का दावा उत्साहजनक है, पर स्वतंत्र सत्यापित आँकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। 105 महिलाओं के स्तन दूध में कीटनाशकों के अंश की वैज्ञानिक चेतावनी गंभीर है, परंतु इस अध्ययन का पूरा संदर्भ और प्रकाशन-स्रोत स्पष्ट होना ज़रूरी है ताकि इसे नीति-निर्माण का आधार बनाया जा सके।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य देवव्रत ने भावनगर में प्राकृतिक खेती सम्मेलन में क्या कहा?
गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 2 जुलाई 2026 को भावनगर के सरतानपार गाँव में कहा कि प्राकृतिक खेती को जन भागीदारी के ज़रिए एक राष्ट्रीय आंदोलन बनाना होगा ताकि खेती की लागत घटे, जन स्वास्थ्य सुधरे और 'विष मुक्त भारत' का निर्माण हो सके।
प्राकृतिक खेती से किसानों को क्या फायदा होता है?
राज्यपाल देवव्रत के अनुसार प्राकृतिक खेती से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, विष-मुक्त और पौष्टिक भोजन का उत्पादन होता है और किसानों की आय में वृद्धि होती है। देसी गायों, केंचुओं और सूक्ष्मजीवों पर आधारित यह पद्धति वर्षा जल संरक्षण में भी सहायक है।
रासायनिक खेती से स्वास्थ्य पर क्या खतरे हैं?
सम्मेलन में उद्धृत एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार 105 महिलाओं के स्तन दूध के नमूनों में कीटनाशकों, डिटर्जेंट और यूरिया के अंश पाए गए हैं। राज्यपाल ने इसे मानव स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चेतावनी बताया।
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती का क्या अनुभव रहा है?
आचार्य देवव्रत ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल में प्राकृतिक खेती की सफलता ने वहाँ के हज़ारों किसानों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया और अब यह संख्या लाखों में पहुँच गई है।
राज्यपाल ने किसानों से क्या अपील की?
राज्यपाल देवव्रत ने प्राकृतिक खेती कर रहे प्रत्येक किसान से अनुरोध किया कि वे अपने गाँव के कम से कम दस और किसानों को इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें और मिशन मोड में इसे लागू करें।
राष्ट्र प्रेस
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