प्राकृतिक खेती से लागत घटेगी, जन स्वास्थ्य सुधरेगा: गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत का भावनगर में आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 2 जुलाई 2026 को भावनगर जिले के सरतानपार गाँव में आयोजित एक प्राकृतिक खेती सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि खेती की लागत घटाने, जन स्वास्थ्य में सुधार लाने और 'विष मुक्त भारत' के निर्माण के लिए जन भागीदारी के ज़रिए प्राकृतिक खेती को एक व्यापक जन आंदोलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को महज एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा एक राष्ट्रीय मिशन बताया।
रासायनिक खेती से बढ़ता संकट
राज्यपाल देवव्रत ने सम्मेलन में कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी, जल, वायु और भोजन को प्रदूषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे गंभीर बीमारियों में वृद्धि हुई है और उर्वरक आयात तथा स्वास्थ्य देखभाल व्यय के रूप में देश पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि रासायनिक खेती से मिट्टी सख्त हो जाती है, जिससे भूजल पुनर्भरण में बाधा आती है।
वैज्ञानिक अध्ययन की चेतावनी
एक वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए राज्यपाल ने बताया कि शोधकर्ताओं ने 105 महिलाओं से एकत्र किए गए स्तन दूध के नमूनों में कीटनाशकों, डिटर्जेंट और यूरिया के अंश पाए हैं। उन्होंने इन निष्कर्षों को मानव स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कैंसर और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों की दर चिंताजनक गति से बढ़ रही है।
प्राकृतिक खेती के लाभ
राज्यपाल ने कहा कि प्रकृति के पास मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की अपनी व्यवस्था है। केंचुए, सूक्ष्मजीव और देसी गायों पर आधारित खेती से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है और वर्षा जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने जोर दिया कि प्राकृतिक खेती से खेती की लागत घटती है, विष-मुक्त और पौष्टिक भोजन का उत्पादन होता है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।
हिमाचल प्रदेश का अनुभव और आगे की राह
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में अपने पूर्व कार्यकाल का उल्लेख करते हुए आचार्य देवव्रत ने बताया कि प्राकृतिक खेती की सफलता ने वहाँ के हज़ारों किसानों को इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित किया, और अब यह संख्या लाखों में पहुँच गई है। गौरतलब है कि यह देश में प्राकृतिक खेती के बढ़ते प्रसार का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती कर रहे प्रत्येक किसान से अपील की कि वे अपने गाँव के कम से कम दस और किसानों को इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें और स्थानीय निवासियों से मिशन मोड में इसे लागू करने का आह्वान किया।