10 अगस्त 2026
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एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को एनईपी 2020 से जोड़ने पर सुकांत मजूमदार का लोकसभा में बड़ा बयान

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एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को एनईपी 2020 से जोड़ने पर सुकांत मजूमदार का लोकसभा में बड़ा बयान

सारांश

एनसीईआरटी एनईपी 2020 की सिफारिशों के अनुरूप पाठ्यक्रम को नए सिरे से ढाल रहा है — एनसीएफ-एफएस 2022 और एनसीएफ-एसई 2023 के जरिए। 13 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी से तैयार ये फ्रेमवर्क और एनसीईआरटी का 'मानित विश्वविद्यालय' दर्जा, भारतीय स्कूली शिक्षा में बड़े ढाँचागत बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने 10 अगस्त को लोकसभा में बताया कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को एनईपी 2020 के अनुरूप संरेखित किया जा रहा है।
एनसीएफ-एफएस को 20 अक्टूबर 2022 और एनसीएफ-एसई को 23 अगस्त 2023 को जारी किया गया।
फ्रेमवर्क तैयार करने में 13 लाख से अधिक नागरिकों और 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों-अभिभावकों की भागीदारी रही।
32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1,550 से अधिक जिला-स्तरीय परामर्श बैठकें आयोजित की गईं।
शिक्षा मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में एनसीईआरटी को 'मानित विश्वविद्यालय' का दर्जा दिया, जिसकी जाँच यूजीसी ने की थी।
एनसीईआरटी ने एनएसटीसी के तहत 13 पाठ्यचर्या क्षेत्र समूह बनाए हैं जो नई पाठ्यपुस्तकें विकसित करेंगे।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अपने पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप व्यवस्थित रूप से संरेखित कर रहा है। इस क्रम में एनसीईआरटी ने फाउंडेशनल स्टेज के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ-एफएस) 2022 और स्कूल शिक्षा के लिए एनसीएफ-एसई 2023 जारी किया है।

पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क का उद्देश्य

मजूमदार ने बताया कि ये दोनों फ्रेमवर्क विभिन्न शैक्षणिक चरणों और विषयों के अनुसार पाठ्यक्रम के लक्ष्य, दक्षताएँ, सीखने के परिणाम, सिलेबस, पाठ्यपुस्तकें, शिक्षण-पद्धतियाँ और मूल्यांकन प्रणाली तय करते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एनसीईआरटी हर वर्ष पुनर्मुद्रण के दौरान छात्रों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर पाठ्यपुस्तकों में आवश्यक सुधार करता है, हालाँकि इस दौरान कोई ढाँचागत परिवर्तन नहीं किया जाता।

व्यापक परामर्श प्रक्रिया

मंत्री ने बताया कि एनसीएफ तैयार करने के लिए एक राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) गठित की गई थी, जिसने शिक्षकों, अभिभावकों, छात्रों, विद्वानों और शैक्षणिक संस्थानों सहित विभिन्न हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए। राष्ट्रीय स्तर पर मोबाइल ऐप सर्वे के माध्यम से 13 लाख से अधिक नागरिकों — जिनमें छात्र और अभिभावक शामिल थे — की भागीदारी सुनिश्चित की गई। राज्य स्तर पर इसी माध्यम से 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों, अभिभावकों, छात्रों और शिक्षाविदों ने अपनी राय दी।

32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिला स्तर पर 1,550 से अधिक परामर्श बैठकें आयोजित की गईं। संस्थानों के 35 समूहों तथा विश्वविद्यालयों व नागरिक समाज संगठनों के साथ 12 परामर्श बैठकों में 8,000 हितधारकों ने भाग लिया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के फोकस ग्रुप्स — जिनमें कुल 4,000 से अधिक विशेषज्ञ शामिल थे — ने 25 विशेष विषयों पर 600 से अधिक पोजीशन पेपर प्रस्तुत किए। एनसीईआरटी द्वारा गठित राष्ट्रीय फोकस ग्रुप्स — जिनमें 175 से अधिक सदस्य थे — ने भी 25 पेपर प्रस्तुत किए।

फ्रेमवर्क जारी होने की तिथियाँ

इन सभी इनपुट के विश्लेषण के बाद एनसीएफ-एफएस को 20 अक्टूबर 2022 को और एनसीएफ-एसई को 23 अगस्त 2023 को औपचारिक रूप से जारी किया गया। फ्रेमवर्क जारी होने के बाद एनसीईआरटी ने राष्ट्रीय सिलेबस एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री समिति (एनएसटीसी) का गठन किया है, जिसके तहत सभी विषयों और कक्षाओं के लिए 13 पाठ्यचर्या क्षेत्र समूह (सीएजी) और पाठ्यपुस्तक विकास दल (टीडीटी) बनाए गए हैं।

एनसीईआरटी को 'मानित विश्वविद्यालय' का दर्जा

मजूमदार ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में बताया कि अप्रैल 2026 में शिक्षा मंत्रालय ने एनसीईआरटी को 'डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी' (मानित विश्वविद्यालय) का दर्जा प्रदान किया। इस दर्जे के लिए एनसीईआरटी के आवेदन की जाँच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपनी विशेषज्ञ समिति के माध्यम से यूजीसी (संस्थान जिन्हें विश्वविद्यालय माना जाता है) विनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुसार की थी। यह दर्जा एनसीईआरटी को शैक्षिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग में मजबूती देगा। मंत्री ने कहा कि इससे एनसीईआरटी की 'थिंक टैंक' के रूप में भूमिका और सुदृढ़ होगी तथा यह केंद्र और राज्य सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करने वाले राष्ट्रीय संसाधन संस्थान के रूप में और प्रभावी बनेगा।

आगे की राह

एनएसटीसी को पाठ्यपुस्तकों सहित समस्त शिक्षण-अधिगम सामग्री तैयार करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। यह प्रक्रिया एनईपी 2020 के उस व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है जो भारतीय स्कूली शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और सीखने के परिणामों को मापनीय बनाने की दिशा में काम कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन इनपुट का फ्रेमवर्क में वास्तविक प्रतिबिंब कितना हुआ — परामर्श और क्रियान्वयन के बीच की खाई भारतीय नीति-निर्माण की पुरानी चुनौती है। एनसीईआरटी को 'मानित विश्वविद्यालय' का दर्जा देना उसकी भूमिका को संस्थागत रूप से मजबूत करता है, पर इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या एक नीति-निर्माण संस्था का शैक्षणिक डिग्री देने वाली संस्था में रूपांतरण उसके मूल जनादेश को प्रभावित करेगा। नई पाठ्यपुस्तकों का वास्तविक परीक्षण तब होगा जब वे कक्षाओं में पहुँचेंगी और सीखने के परिणामों में मापनीय सुधार दिखाएँगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीईआरटी एनईपी 2020 के तहत पाठ्यक्रम कैसे बदल रहा है?
एनसीईआरटी ने एनईपी 2020 की सिफारिशों के आधार पर एनसीएफ-एफएस 2022 और एनसीएफ-एसई 2023 जारी किए हैं, जो पाठ्यक्रम लक्ष्य, सिलेबस, शिक्षण-पद्धतियाँ और मूल्यांकन प्रणाली तय करते हैं। इसके अलावा एनएसटीसी के तहत नई पाठ्यपुस्तकें भी विकसित की जा रही हैं।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क (एनसीएफ) कब जारी हुआ?
एनसीएफ-एफएस (फाउंडेशनल स्टेज) 20 अक्टूबर 2022 को और एनसीएफ-एसई (स्कूल एजुकेशन) 23 अगस्त 2023 को जारी किया गया। दोनों फ्रेमवर्क व्यापक राष्ट्रीय परामर्श प्रक्रिया के बाद तैयार किए गए।
एनसीईआरटी को 'मानित विश्वविद्यालय' का दर्जा क्यों और कब मिला?
शिक्षा मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में एनसीईआरटी को 'डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी' का दर्जा दिया, ताकि यह शैक्षिक अनुसंधान, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में और सक्षम बन सके। इस आवेदन की जाँच यूजीसी ने अपनी विशेषज्ञ समिति के माध्यम से की थी।
एनसीएफ तैयार करने में कितने लोगों ने भाग लिया?
राष्ट्रीय स्तर पर 13 लाख से अधिक नागरिकों और राज्य स्तर पर 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों-अभिभावकों ने मोबाइल ऐप सर्वे के जरिए भाग लिया। इसके अलावा 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1,550 से अधिक जिला-स्तरीय परामर्श बैठकें भी आयोजित की गईं।
एनएसटीसी क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
राष्ट्रीय सिलेबस एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री समिति (एनएसटीसी) एनसीएफ के बाद एनसीईआरटी द्वारा गठित समिति है। इसके तहत 13 पाठ्यचर्या क्षेत्र समूह और पाठ्यपुस्तक विकास दल बनाए गए हैं, जो सभी विषयों और कक्षाओं के लिए नई पाठ्यपुस्तकें और शिक्षण सामग्री तैयार करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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