एनसीएलटी की जर्जर हालत पर सस्मित पात्रा का केंद्र को पत्र, 'न्याय भवन' और स्थायी स्टाफ की माँग
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की बदहाल आधारभूत सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष गंभीर चिंता दर्ज कराई है। उन्होंने 18 मई को कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री डॉ. हर्ष मल्होत्रा को पत्र और ईमेल भेजकर इन न्यायिक संस्थाओं की स्थिति सुधारने की माँग की है।
क्या है पूरा मामला
पात्रा ने बताया कि NCLT और NCLAT देश की कंपनी कानून व्यवस्था, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) और बंद हो चुकी कंपनियों के पुनरुद्धार जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करते हैं। इसके बावजूद इन संस्थाओं में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।
उन्होंने एक ठोस उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में नई दिल्ली स्थित NCLT में एक सुनवाई के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि बैकअप जनरेटर तक उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण करीब डेढ़ घंटे तक न्यायिक कार्यवाही ठप रही।
बुनियादी सुविधाओं की दयनीय स्थिति
पात्रा के अनुसार, कई कोर्टरूम में बारिश के दौरान पानी भर जाता है और पानी रिसने की समस्या के कारण कुछ अदालतों में केवल आधे दिन ही सुनवाई हो पाती है। उन्होंने कहा कि ये समस्याएँ पिछले एक वर्ष से अधिक समय से बनी हुई हैं और अब तक उनका समाधान नहीं हुआ है।
यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक है जब देश की न्यायिक प्रणाली पर मामलों के बढ़ते बोझ को लेकर पहले से ही सवाल उठाए जाते रहे हैं। गौरतलब है कि CGO कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली जैसे केंद्रीय परिसर में स्थित NCLT की यह दशा देश भर की अन्य पीठों की स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है।
किराये के दफ्तरों में चल रहा महत्वपूर्ण ट्रिब्यूनल
पात्रा ने उजागर किया कि NCLT फिलहाल किराये के कमरों और CGO कॉम्प्लेक्स में MTNL के किराये के दफ्तरों से संचालित हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के लिए आधुनिक 'कर्तव्य भवन' जैसे भव्य परिसर बनाए जा सकते हैं, तो NCLT और NCLAT जैसी महत्वपूर्ण न्यायिक संस्थाओं के लिए एक समर्पित 'न्याय भवन' क्यों नहीं बनाया जा सकता।
स्थायी स्टाफ की जगह कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी
राज्यसभा सदस्य ने यह भी रेखांकित किया कि इन ट्रिब्यूनलों में स्थायी कर्मचारियों के स्थान पर अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) आधारित स्टाफ रखा गया है, जो आदेश लिखने और अन्य प्रशासनिक कार्य संभालते हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे इन संस्थाओं की दीर्घकालिक कार्यक्षमता और जवाबदेही प्रभावित होती है।
क्या होगा आगे
पात्रा ने केंद्र सरकार से माँग की है कि NCLT और NCLAT के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थायी स्टाफ और आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। उनका तर्क है कि इन संस्थाओं को सशक्त बनाए बिना देश की न्यायिक और आर्थिक व्यवस्था को वास्तविक मज़बूती नहीं मिल सकती। अब देखना यह होगा कि डॉ. हर्ष मल्होत्रा के मंत्रालय की ओर से इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया आती है और सुधारात्मक कदम कब उठाए जाते हैं।