31 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एनसीपी की 2029 चुनाव रणनीति: बूथ स्तर तक संगठन, 22 जिला परिषदों के लिए विशेष समिति गठित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एनसीपी की 2029 चुनाव रणनीति: बूथ स्तर तक संगठन, 22 जिला परिषदों के लिए विशेष समिति गठित

सारांश

2029 को ध्यान में रखकर एनसीपी ने बूथ से लेकर जिला परिषद तक संगठन की नई बुनावट शुरू की है — दिलीप वलसे पाटिल की समिति, नवाब मलिक की मतदाता सूची टीम और 27 सितंबर का नासिक चिंतन शिविर। पार्टी का लक्ष्य है मौजूदा 1 सांसद और 41 विधायकों की संख्या बढ़ाना।

मुख्य बातें

सुनेत्रा अजित पवार की अध्यक्षता में 31 अगस्त को मुंबई में एनसीपी कोर कमेटी की बैठक हुई।
22 जिला परिषद चुनावों की तैयारी के लिए पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटिल की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित।
पूर्व मंत्री नवाब मलिक की अगुवाई में मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) टीम बनाई गई।
'माय बूथ, माय विलेज' अभियान को तेज़ी से लागू करने पर जोर; 27 सितंबर को नासिक में 'चिंतन शिविर' की घोषणा।
पार्टी का लक्ष्य 2029 तक मौजूदा 1 सांसद और 41 विधायकों की संख्या बढ़ाना।
पूर्व राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह के पत्रों का औपचारिक जवाब अभी तक नहीं दिया गया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की कोर कमेटी की बैठक सोमवार, 31 अगस्त को मुंबई में राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 22 जिला परिषद चुनावों की तैयारी को लेकर विस्तृत रणनीति पर मंथन किया गया। बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को सुदृढ़ करने और मतदाताओं से सीधा संपर्क बढ़ाने को प्राथमिकता दी गई।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने जानकारी दी कि 22 जिला परिषद चुनावों की तैयारी की देखरेख के लिए पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटिल की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये चुनाव ओबीसी आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले के बाद ही आयोजित हो सकेंगे।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, यह समिति सभी 22 जिला परिषद क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का आकलन करेगी। समिति यह भी तय करेगी कि एनसीपी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़े अथवा महायुति गठबंधन के भीतर अधिक सीटों की मांग रखे।

मतदाता सूची और 'माय बूथ, माय विलेज' अभियान

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान का लाभ उठाने के लिए पूर्व मंत्री नवाब मलिक की अध्यक्षता में एक पृथक टीम बनाई गई है। इस टीम की जिम्मेदारी होगी कि पार्टी समर्थकों के नाम मतदाता सूची में सटीक रूप से दर्ज रहें।

बैठक में 'माय बूथ, माय विलेज' अभियान को तीव्र गति से लागू करने पर विशेष बल दिया गया। इस अभियान का लक्ष्य ग्राम और बूथ स्तर पर पार्टी की उपस्थिति को इतना सशक्त बनाना है कि भावी निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन और सीमांकन परिवर्तनों का भी सफलतापूर्वक सामना किया जा सके।

नासिक में 'चिंतन शिविर' की घोषणा

तटकरे ने घोषणा की कि 27 सितंबर को नासिक में एक दिवसीय 'चिंतन शिविर' आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श होगा। कोर कमेटी ने 2029 के चुनावों में पार्टी की वर्तमान शक्ति — 1 सांसद और 41 विधायक — को और बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

पृष्ठभूमि और संगठनात्मक सुधार

यह बैठक 22 अगस्त को हुई पिछली कोर कमेटी बैठक के बाद आयोजित की गई, जिसमें चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा सुझाए गए संगठनात्मक सुधारों पर विचार हुआ था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी 2024 के विधानसभा चुनावों में मिली सफलता को आधार बनाकर अपनी जड़ें और गहरी करना चाहती है।

पार्टी के भीतर प्रशासनिक सवाल

हालांकि, पार्टी के भीतर कुछ प्रशासनिक प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं। पूर्व राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार के 26 फरवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया को लेकर जुलाई और अगस्त में कई पत्र भेजे थे, जिनका औपचारिक जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी में पूरी तरह जुटा हुआ है। आने वाले महीनों में नासिक चिंतन शिविर और जिला दौरों से यह स्पष्ट होगा कि एनसीपी की जमीनी रणनीति कितनी प्रभावी रूप में मूर्त रूप ले पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब समितियाँ जमीन पर उतरेंगी — खासकर तब जब ओबीसी आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला अभी आना बाकी है और जिला परिषद चुनावों की तारीख अनिश्चित है। पार्टी के भीतर सच्चिदानंद सिंह के अनुत्तरित पत्र यह संकेत देते हैं कि नेतृत्व की वैधता को लेकर आंतरिक असहमति को सार्वजनिक रूप से संबोधित करने की बजाय दबाया जा रहा है। महायुति गठबंधन में सीट-बँटवारे की अनिश्चितता के बीच 'अकेले लड़ें या अधिक सीटें माँगें' वाली दुविधा बताती है कि एनसीपी अभी भी अपनी सौदेबाज़ी की ताकत को आँक रही है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीपी कोर कमेटी की 31 अगस्त की बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
बैठक में 22 जिला परिषद चुनावों के लिए दिलीप वलसे पाटिल की अध्यक्षता में विशेष समिति, मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए नवाब मलिक की टीम और 27 सितंबर को नासिक में चिंतन शिविर का निर्णय लिया गया। साथ ही 'माय बूथ, माय विलेज' अभियान को तेज़ करने पर सहमति बनी।
एनसीपी के 22 जिला परिषद चुनाव कब होंगे?
ये चुनाव ओबीसी आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले के बाद ही आयोजित हो सकेंगे, इसलिए अभी तारीख अनिश्चित है। तब तक पार्टी की विशेष समिति सभी 22 क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी तैयारी करेगी।
'माय बूथ, माय विलेज' अभियान क्या है?
यह एनसीपी का बूथ और ग्राम स्तरीय संगठन सुदृढ़ीकरण अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं से सीधा जुड़ाव बनाना और भावी परिसीमन बदलावों के लिए पार्टी को तैयार करना है। इसे 2029 के चुनावों से पहले पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य है।
एनसीपी का 2029 चुनावों में क्या लक्ष्य है?
पार्टी की कोर कमेटी ने 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मौजूदा 1 सांसद और 41 विधायकों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को मज़बूत करने की रणनीति बनाई जा रही है।
एनसीपी में सच्चिदानंद सिंह के पत्रों का विवाद क्या है?
पूर्व राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार के 26 फरवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जुलाई और अगस्त में कई पत्र भेजे थे। इन पत्रों का औपचारिक जवाब अभी तक नहीं दिया गया है, जो पार्टी के भीतर एक अनसुलझे प्रशासनिक प्रश्न की ओर इशारा करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले