मतदाता सूची रिवीजन का इंतजार ज़रूरी नहीं, नए वोटर कभी भी करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन: चुनाव आयोग
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग ने 24 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है, या जिसने जनवरी, अप्रैल, जुलाई या अक्टूबर की पहली तारीख को 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, वह मतदाता सूची के किसी भी रिवीजन का इंतजार किए बिना नए वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन करा सकता है। यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें आशंका जताई गई थी कि वार्षिक पुनरीक्षण में देरी से पात्र युवा मतदाता सूची से बाहर रह सकते हैं।
कानूनी आधार क्या है
आयोग के अधिकारियों के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 14 में हुए संशोधन को धारा 19 के साथ मिलाकर पढ़ने पर यह प्रावधान स्पष्ट होता है। इस व्याख्या के अनुसार, पात्र नागरिक को मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के लिए किसी निर्धारित रिवीजन चक्र की प्रतीक्षा करने की कोई बाध्यता नहीं है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) दोनों धारा 21(3) के तहत वैकल्पिक प्रक्रियाएँ हैं और इन्हें एक साथ कराने की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है।
रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी शर्तें
मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। साथ ही उसकी आयु निर्धारित तारीख पर 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
इसके अलावा, वह उस निर्वाचन क्षेत्र या मतदान क्षेत्र का सामान्य निवासी हो जहाँ नाम दर्ज कराना चाहता है, और मतदाता बनने के लिए किसी भी आधार पर अयोग्य घोषित न हो। ये शर्तें पूरी होते ही रजिस्ट्रेशन किसी भी समय कराया जा सकता है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब रिपोर्टों में दावा किया गया था कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से मतदाता सूचियों का वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण दोबारा शुरू नहीं हुआ है। इन रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि इस देरी से नए योग्य मतदाताओं, विशेषकर युवाओं का नाम समय पर सूची में जुड़ने से वंचित रह सकता है।
गौरतलब है कि इन्हीं रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों के दावे भी शामिल थे। आयोग के अधिकारियों ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि नियमित पंजीकरण प्रक्रिया हर समय उपलब्ध है।
युवा मतदाताओं पर असर
अधिकारियों ने बताया कि 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव आयोग लगातार प्रयासरत है। आँकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2025 तक भारत में युवा मतदाताओं की संख्या बढ़कर 21.7 करोड़ हो गई थी।
अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि नई पीढ़ी की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ़ती सक्रिय भागीदारी का संकेत देती है। रजिस्ट्रेशन की यह सुविधा उन युवाओं के लिए विशेष रूप से राहत की खबर है जो किसी विशेष तिमाही में 18 वर्ष के होते हैं और रिवीजन चक्र की प्रतीक्षा में अनिश्चितता में रहते थे।
आगे क्या होगा
चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद उम्मीद है कि एसएसआर और एसआईआर की स्थिति को लेकर जारी अनिश्चितता कम होगी। आयोग ने पात्र नागरिकों से आग्रह किया है कि वे रिवीजन की प्रतीक्षा किए बिना निर्धारित प्रक्रिया के तहत तुरंत पंजीकरण कराएँ, ताकि अगले किसी भी चुनाव में मतदान का अधिकार सुनिश्चित हो सके।