प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड: NIA ने अब्दुल नासिर और नौशाद को गिरफ्तार किया, कुल 24 आरोपी हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भाजपा युवा मोर्चा नेता प्रवीण नेट्टारू की 2022 में हुई लक्षित हत्या के मामले में दो प्रमुख फरार आरोपियों — अब्दुल नासिर और नौशाद — को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी शनिवार को क्रमशः कोच्चि (केरल) और होसुर (तमिलनाडु) से की गई। इन दो गिरफ्तारियों के साथ इस मामले में अब तक हिरासत में लिए गए आरोपियों की कुल संख्या 24 हो गई है, जबकि तीन आरोपी अभी भी फरार हैं।
गिरफ्तारी का अभियान
आंध्र प्रदेश पुलिस से मिली विश्वसनीय सूचना के आधार पर NIA ने दो राज्यों में एक सुनियोजित संयुक्त अभियान चलाया। अब्दुल नासिर को कोच्चि से और नौशाद को होसुर से पकड़ा गया। दोनों पर मुख्य हमलावरों को जानबूझकर और स्वेच्छा से पनाह देने का आरोप है।
इससे पहले बेंगलुरु स्थित NIA विशेष न्यायालय ने इन दोनों के विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर (LOC) और गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। NIA ने उनके ठिकाने की सूचना देने वाले को ₹4 लाख प्रति व्यक्ति का इनाम भी घोषित किया था।
आरोपों का विवरण
NIA ने अब्दुल नासिर और नौशाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र पहले ही दाखिल कर दिया था। जांच में सामने आया है कि ये दोनों प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े गुप्त हत्यारे गिरोहों के सदस्यों को शरण देने में सीधे संलिप्त थे।
नेट्टारू हत्याकांड की पृष्ठभूमि
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के सुलिया के निकट बेल्लारे में 26 जुलाई 2022 को भाजपा युवा मोर्चा के जिला कार्यकारी समिति सदस्य प्रवीण नेट्टारू की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई जब राज्य में 'हिजाब' विवाद अपने चरम पर था।
नेट्टारू की हत्या के बाद राज्य के कई हिस्सों में प्रतिशोध की घटनाएं और चाकूबाजी की वारदातें हुईं। जांच में खुलासा हुआ कि यह हत्या प्रतिबंधित PFI से जुड़े गुप्त गिरोहों द्वारा सुनियोजित रूप से की गई थी, जिसका उद्देश्य सांप्रदायिक आतंक फैलाना, अशांति भड़काना और विशिष्ट समुदायों के व्यक्तियों को निशाना बनाना था।
आगे की जांच
NIA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एजेंसी शेष तीन फरार आरोपियों को पकड़ने के प्रयास जारी रखे हुए है। यह मामला देश में सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में लक्षित हिंसा की बड़ी श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है, और NIA की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।