कंबोडिया साइबर गुलामी मामले में NIA की चार्जशीट, 5 आरोपियों पर शिकंजा; मास्टरमाइंड फरार

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कंबोडिया साइबर गुलामी मामले में NIA की चार्जशीट, 5 आरोपियों पर शिकंजा; मास्टरमाइंड फरार

सारांश

नौकरी के नाम पर ठगी, पासपोर्ट की जब्ती और बिजली के झटके — NIA ने कंबोडिया साइबर गुलामी गिरोह के 5 आरोपियों पर पटना अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मास्टरमाइंड मुन्ना सिंह फरार, हर पीड़ित की 'बिक्री' पर 2,000–3,000 डॉलर की कमाई।

मुख्य बातें

NIA ने 16 मई 2026 को पटना की विशेष अदालत में कंबोडिया मानव तस्करी मामले में 5 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह अभी भी फरार है।
गिरोह युवाओं को नौकरी का झाँसा देकर कंबोडिया भेजता था और वहाँ प्रत्येक पीड़ित को फर्जी कंपनी में 2,000–3,000 अमेरिकी डॉलर में 'बेचा' जाता था।
पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर उन्हें बिजली के झटके देने और भूखा रखने जैसी यातनाएँ दी जाती थीं।
अभय नाथ दुबे , अभिरंजन कुमार और रोहित यादव को फरवरी 2026 में कंबोडिया से दिल्ली लौटते समय गिरफ्तार किया गया; प्रह्लाद कुमार सिंह जमानत पर है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 16 मई 2026 को पटना स्थित विशेष अदालत में कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी मामले में पाँच आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की। इस संगठित गिरोह पर आरोप है कि यह भारतीय युवाओं को नौकरी का झाँसा देकर कंबोडिया भेजता था और वहाँ उन्हें जबरन फर्जी साइबर कंपनियों में काम करने पर मजबूर करता था। मामले का कथित मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह अभी भी फरार है।

चार्जशीट में किन आरोपियों के नाम

NIA की चार्जशीट में कुल पाँच नाम दर्ज हैं — फरार आनंद कुमार सिंह के अलावा अभय नाथ दुबे, अभिरंजन कुमार, रोहित यादव और प्रह्लाद कुमार सिंह। अभय नाथ दुबे और रोहित यादव उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जबकि अभिरंजन कुमार बिहार का रहने वाला है।

अभय, अभिरंजन और रोहित को फरवरी 2026 में कंबोडिया से नई दिल्ली लौटने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। वहीं प्रह्लाद कुमार सिंह फिलहाल जमानत पर बाहर है।

गिरोह का तरीकाकार: नौकरी का लालच, पासपोर्ट की जब्ती

जाँच एजेंसी के अनुसार, आनंद कुमार सिंह भारत में ट्रैवल एजेंटों और सब-एजेंटों के जरिए युवाओं की भर्ती करता था। उन्हें विदेश में अच्छी नौकरी और मोटी तनख्वाह का वादा कर कंबोडिया भेजा जाता था। वहाँ पहुँचते ही पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे और उन्हें फर्जी साइबर कंपनियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।

जाँच में सामने आया है कि गिरोह प्रत्येक युवक को फर्जी कंपनी में 'बेचने' के बदले 2,000 से 3,000 अमेरिकी डॉलर तक वसूलता था।

पीड़ितों पर अत्याचार: बिजली के झटके, भूखा रखना

NIA की जाँच के अनुसार, जो युवा विरोध करते थे, उन्हें गंभीर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी। पीड़ितों को बिजली के झटके दिए जाते थे, कमरों में बंद रखा जाता था और खाना-पानी तक से वंचित किया जाता था। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय नागरिकों की साइबर गुलामी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

जाँच की स्थिति और आगे की कार्रवाई

NIA अब इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है और पूरे नेटवर्क की जाँच जारी है। मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह की गिरफ्तारी एजेंसी की प्राथमिकता बताई जा रही है। गौरतलब है कि यह मामला उन दर्जनों मामलों में से एक है जिनमें भारतीय युवाओं को कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड जैसे देशों में साइबर धोखाधड़ी के लिए मजबूर किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यवस्थागत रोकथाम अब भी अधूरी है। असली सवाल यह है कि ट्रैवल एजेंटों और सब-एजेंटों का यह नेटवर्क इतने समय तक बिना जाँच के कैसे चलता रहा। मास्टरमाइंड का फरार होना और एक आरोपी का जमानत पर बाहर रहना यह भी बताता है कि जाँच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों में अभी लंबा रास्ता बाकी है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NIA ने कंबोडिया मानव तस्करी मामले में किन आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की?
NIA ने पाँच आरोपियों — आनंद कुमार सिंह (फरार), अभय नाथ दुबे, अभिरंजन कुमार, रोहित यादव और प्रह्लाद कुमार सिंह — के खिलाफ पटना की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इनमें से तीन को फरवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था।
कंबोडिया साइबर गुलामी गिरोह किस तरह काम करता था?
गिरोह भारत में ट्रैवल एजेंटों के जरिए युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी का लालच देकर कंबोडिया भेजता था। वहाँ पहुँचते ही पीड़ितों के पासपोर्ट छीन लिए जाते थे और उन्हें जबरन फर्जी साइबर कंपनियों में काम कराया जाता था।
पीड़ित युवाओं के साथ कंबोडिया में कैसा व्यवहार किया जाता था?
जाँच के अनुसार, विरोध करने वाले पीड़ितों को बिजली के झटके दिए जाते थे, कमरों में बंद रखा जाता था और खाना-पानी तक से वंचित किया जाता था। इस प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का उपयोग उन्हें काम करने के लिए मजबूर करने हेतु किया जाता था।
इस मामले का मास्टरमाइंड कौन है और उसकी स्थिति क्या है?
मामले का कथित मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह है, जो अभी भी फरार है। NIA उसकी गिरफ्तारी के लिए सक्रिय रूप से तलाश कर रही है।
गिरोह को प्रत्येक पीड़ित से कितनी कमाई होती थी?
NIA की जाँच के अनुसार, आनंद कुमार सिंह हर भारतीय युवक को फर्जी कंपनी में 'बेचने' के बदले 2,000 से 3,000 अमेरिकी डॉलर तक वसूलता था।
राष्ट्र प्रेस
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