8 जुलाई 2026
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एनआईए की बड़ी कार्रवाई: कंबोडिया साइबर गुलामी मामले में बिहार, यूपी, दिल्ली के 6 ठिकानों पर छापे

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एनआईए की बड़ी कार्रवाई: कंबोडिया साइबर गुलामी मामले में बिहार, यूपी, दिल्ली के 6 ठिकानों पर छापे

सारांश

एनआईए ने कंबोडिया साइबर गुलामी नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए एक साथ तीन राज्यों में 6 ठिकानों पर छापे मारे। मुख्य आरोपी मुन्ना सिंह का गिरोह भारतीय युवाओं को नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजता था, जहाँ उनसे जबरन साइबर ठगी करवाई जाती थी।

मुख्य बातें

एनआईए ने 7 जुलाई 2026 को बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
छापे कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी नेटवर्क की जांच के तहत हुए; स्मार्टफोन, लैपटॉप और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त।
मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह का गिरोह युवाओं को नौकरी का लालच देकर कंबोडिया भेजता था, जहाँ उनके पासपोर्ट जब्त कर साइबर ठगी में धकेला जाता था।
मई 2026 में मुख्य आरोपी सहित 5 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल; फरवरी 2026 में 3 सहयोगी गिरफ्तार।
पीड़ितों के अनुसार काम से इनकार करने पर बिजली के झटके, भोजन-पानी से वंचित रखना जैसी यातनाएं दी जाती थीं।
फरार आरोपियों की तलाश जारी; एनआईए ने इसे संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क करार दिया।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 7 जुलाई 2026 को कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस अभियान में स्मार्टफोन, लैपटॉप, डिजिटल उपकरण और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह के नेतृत्व वाले संगठित गिरोह की जांच का हिस्सा है।

छापेमारी का विवरण

एनआईए ने बिहार के गोपालगंज, सीवान, सारण और पूर्वी चंपारण जिलों में एक-एक स्थान पर तलाशी ली। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली में भी एक-एक ठिकाने पर छापा मारा गया। एजेंसी के अनुसार, ये सभी स्थान गिरफ्तार आरोपियों और फरार आरोपियों के सहयोगियों एवं समर्थकों से जुड़े हुए हैं।

बरामद सामग्री की फोरेंसिक जांच जारी है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इससे गिरोह के विस्तृत नेटवर्क और अन्य फरार सदस्यों की पहचान में मदद मिलेगी।

गिरोह का तरीकावार

जांच में सामने आया है कि यह संगठित गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर और रोजगार की तलाश में भटक रहे भारतीय युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी और आकर्षक वेतन का झांसा देकर कंबोडिया भेजता था। मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह भारत में विभिन्न सब-एजेंटों और ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से इन युवाओं को फंसाता था।

एनआईए के अनुसार, कंबोडिया पहुंचने के बाद पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे और उन्हें कथित तौर पर धोखाधड़ी में लिप्त कंपनियों के हवाले कर दिया जाता था, जहाँ उन्हें जबरन साइबर ठगी से जुड़े काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।

पीड़ितों पर अत्याचार

पीड़ितों ने अपने बयानों में बताया कि काम करने से इनकार करने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। आरोपों के अनुसार, बिजली के झटके दिए जाते थे, जबरन बंद करके रखा जाता था और भोजन व पानी तक से वंचित किया जाता था। यह ऐसे समय में सामने आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर गुलामी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कई देश इस पर लगाम कसने की कोशिश कर रहे हैं।

आरोपियों पर कार्रवाई का इतिहास

एनआईए ने बताया कि मई 2026 में मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह और उसके चार सहयोगियों — प्रह्लाद कुमार सिंह, अभयनाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव — के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इससे पहले फरवरी 2026 में अभिरंजन कुमार, रोहित यादव और एक अन्य सहयोगी को कंबोडिया से दिल्ली लौटने पर गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा है। एनआईए का मानना है कि यह गिरोह भारतीय युवाओं को मानव तस्करी के जरिए विदेश भेजकर साइबर अपराधों में धकेलता था।

आगे की जांच

एनआईए ने स्पष्ट किया है कि मामले में फरार आरोपियों और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश लगातार जारी है। जब्त डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच से नेटवर्क के और तार उजागर होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लाओस और कंबोडिया से ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं जिनमें भारतीय युवाओं को साइबर ठगी के अड्डों में बंधक बनाया गया। असली सवाल यह है कि ट्रैवल एजेंट और सब-एजेंट इतने लंबे समय तक बिना निगरानी के कैसे काम करते रहे। आरोपत्र दाखिल होने और गिरफ्तारियों के बाद भी फरार आरोपियों का नेटवर्क सक्रिय रहना दर्शाता है कि केवल छापेमारी से इस संगठित अपराध की जड़ें नहीं कटेंगी — जब तक भर्ती नेटवर्क और वित्तीय प्रवाह पर भी उतनी ही सख्ती न हो।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने कंबोडिया मानव तस्करी मामले में किन राज्यों में छापे मारे?
एनआईए ने 7 जुलाई 2026 को बिहार के गोपालगंज, सीवान, सारण और पूर्वी चंपारण जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कुल 6 ठिकानों पर छापेमारी की। ये सभी स्थान गिरफ्तार और फरार आरोपियों के सहयोगियों से जुड़े बताए गए हैं।
कंबोडिया साइबर गुलामी गिरोह कैसे काम करता था?
गिरोह भारत में सब-एजेंटों और ट्रैवल एजेंटों के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजता था। वहाँ पहुंचने के बाद पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर उन्हें साइबर ठगी करने वाली कंपनियों में जबरन काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।
इस मामले का मुख्य आरोपी कौन है और उस पर क्या कार्रवाई हुई?
मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह है। मई 2026 में उसके और चार सहयोगियों — प्रह्लाद कुमार सिंह, अभयनाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव — के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। फरवरी 2026 में तीन सहयोगियों को कंबोडिया से दिल्ली लौटने पर गिरफ्तार किया गया था।
पीड़ितों के साथ कंबोडिया में कैसा व्यवहार किया जाता था?
पीड़ितों के बयानों के अनुसार, काम से इनकार करने पर उन्हें बिजली के झटके दिए जाते थे, जबरन बंद करके रखा जाता था और भोजन व पानी तक से वंचित किया जाता था। एनआईए इन आरोपों की जांच कर रही है।
एनआईए की आगे की जांच में क्या होगा?
एनआईए ने स्पष्ट किया है कि फरार आरोपियों और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। जब्त डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच से नेटवर्क के और सदस्यों की पहचान होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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