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NISR लद्दाख में योग सत्र, विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले टिकाऊ जीवनशैली का संदेश

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NISR लद्दाख में योग सत्र, विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले टिकाऊ जीवनशैली का संदेश

सारांश

लद्दाख के साबू थांग स्थित NISR में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले मिशन लाइफ के तहत कॉमन योगा प्रोटोकॉल सत्र आयोजित हुआ। प्रशिक्षक गोपाल शर्मा के मार्गदर्शन में फैकल्टी, कर्मचारियों और छात्रों ने योग को कम उपभोग वाली, पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली से जोड़ने का संदेश साझा किया।

मुख्य बातें

NISR साबू थांग, लद्दाख में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले कॉमन योगा प्रोटोकॉल सत्र आयोजित।
आयोजन मिशन लाइफ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) पहल के अंतर्गत हुआ।
विषय: ‘योग अभ्यास को सचेत और कम उपभोग वाली जीवनशैली से जोड़ना’।
सत्र का संचालन प्रशिक्षक गोपाल शर्मा ने किया; योगासन, प्राणायाम और एकाग्रता तकनीकों का अभ्यास हुआ।
संस्थान विश्व पर्यावरण दिवस से पहले कई और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा (NISR), साबू थांग, लद्दाख में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले आयोजित गतिविधियों की कड़ी में मिशन लाइफ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) पहल के अंतर्गत एक कॉमन योगा प्रोटोकॉल सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य योग अभ्यास को पर्यावरण-अनुकूल और सचेत जीवनशैली से जोड़ना था, जिसमें संस्थान के फैकल्टी, कर्मचारियों और छात्रों ने भाग लिया।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम का केंद्रीय विषय ‘योग अभ्यास को सचेत और कम उपभोग वाली जीवनशैली से जोड़ना’ रखा गया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और संतुलित जीवनशैली अपनाने में भी सहायक है।

प्रशिक्षक का मार्गदर्शन

सत्र का संचालन प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक गोपाल शर्मा ने किया। उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया तथा सांस लेने की तकनीकों और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने के तरीकों की जानकारी ली। शर्मा ने बताया कि नियमित योग अभ्यास तनाव कम करने, स्वास्थ्य सुधारने और जीवन में अनुशासन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण का जुड़ाव

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। प्रतिभागियों को संदेश दिया गया कि जीवनशैली में संतुलन और संयम अपनाने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।

मिशन लाइफ का व्यापक उद्देश्य

आयोजकों के अनुसार, मिशन लाइफ का उद्देश्य लोगों को ऐसी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। यह पहल भारत द्वारा वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत उस व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ती है जिसमें व्यक्तिगत व्यवहार-परिवर्तन को जलवायु कार्रवाई का अहम हिस्सा माना गया है।

आगे क्या

यह कॉमन योगा प्रोटोकॉल सत्र उन कई गतिविधियों का हिस्सा है, जो संस्थान द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले आयोजित की जा रही हैं। प्रतिभागियों ने स्वस्थ, पर्यावरण-अनुकूल और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई, और संस्थान आने वाले दिनों में जागरूकता बढ़ाने वाले कई और कार्यक्रम आयोजित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ऐसे सत्र संस्थागत नीति-बदलाव में बदलते हैं या केवल वार्षिक अनुष्ठान बनकर रह जाते हैं। पारंपरिक चिकित्सा संस्थान जैसे NISR के पास इस संवाद को आगे ले जाने की अनूठी विश्वसनीयता है — बशर्ते आयोजन एकल सत्रों से आगे बढ़कर सतत पाठ्यक्रम और मापन-योग्य परिणामों तक पहुँचे।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NISR में आयोजित कॉमन योगा प्रोटोकॉल सत्र क्या था?
यह साबू थांग, लद्दाख स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा (NISR) में मिशन लाइफ पहल के अंतर्गत आयोजित एक योग सत्र था, जो विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले हुआ। इसका उद्देश्य योग अभ्यास को पर्यावरण-अनुकूल और कम उपभोग वाली जीवनशैली से जोड़ना था।
मिशन लाइफ पहल का उद्देश्य क्या है?
मिशन लाइफ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) का उद्देश्य लोगों को ऐसी रोज़मर्रा की आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। इसमें संतुलित उपभोग, संसाधनों का सचेत उपयोग और जिम्मेदार जीवनशैली शामिल है।
सत्र का संचालन किसने किया और प्रतिभागियों ने क्या सीखा?
सत्र का संचालन प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक गोपाल शर्मा ने किया। प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम, सांस लेने की तकनीकें और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने के तरीके सीखे।
यह आयोजन क्यों मायने रखता है?
आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच के गहरे जुड़ाव को रेखांकित करता है। लद्दाख जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में यह संदेश और भी प्रासंगिक बन जाता है।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले और कौन-सी गतिविधियाँ होंगी?
NISR ने संकेत दिया है कि यह सत्र कई आगामी गतिविधियों की शृंखला का हिस्सा है। आने वाले दिनों में संस्थान पर्यावरण जागरूकता और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाले कई और कार्यक्रम आयोजित करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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