अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: लेह में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — योग मानवता को भारत का प्राचीन उपहार
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 21 जून 2026 को लेह, लद्दाख में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में भाग लिया और नागरिकों से योग को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानवता के लिए भारत की ओर से एक प्राचीन उपहार है जो शरीर, मन और आत्मा तीनों को एक साथ पोषित करता है।
योग की वैश्विक यात्रा और भारत की भूमिका
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के ऋषियों ने वर्षों के ध्यान, तपस्या और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से एक ऐसी जीवन-प्रणाली विकसित की, जो आज पूरी दुनिया में अपनाई जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को इस वैश्विक पहचान का श्रेय देते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है।' उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में मोदी के आह्वान पर 175 से अधिक सदस्य देशों के समर्थन से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया था।
इस वर्ष की थीम: 'स्वस्थ आयु के लिए योग'
राधाकृष्णन ने इस वर्ष की थीम 'स्वस्थ आयु के लिए योग' का उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा और स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगति के साथ समाज की जिम्मेदारियाँ भी बढ़ी हैं। 'इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023' का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2050 तक भारत की लगभग एक-पाँचवीं आबादी बुजुर्ग होगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि 'जीवन में जुड़े वर्षों का अर्थ वर्षों में जीवन का जुड़ना भी हो' — और इस लक्ष्य के लिए योग एक सशक्त माध्यम है।
लद्दाख की विशेषता और योग का संदेश
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में जीवन के लिए सहनशक्ति, अनुशासन और अनुकूलन क्षमता अनिवार्य है — और योग इन्हीं गुणों को विकसित करने का साधन है। उन्होंने लद्दाख के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ के निवासी लंबे समय से लचीलेपन, सादगी और प्रकृति के साथ सामंजस्य का जीवंत उदाहरण रहे हैं — जो योग के मूल दर्शन से गहराई से जुड़े मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि योग का निरंतर अभ्यास इन लोगों की ऊर्जा व जीवन शक्ति को बनाए रखने में और उन्हें अपनी पूर्ण मानवीय क्षमता तक पहुँचाने में सहायक होगा।
महाबोधि ध्यान केंद्र का दौरा
समारोह से पूर्व उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने लेह स्थित महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (MIMC) का दौरा किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, समाज कल्याण, पर्यावरण संरक्षण तथा लद्दाख में योग व ध्यान को बढ़ावा देने में संस्थान के उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। गौरतलब है कि यह केंद्र दशकों से लद्दाख में आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा का केंद्र रहा है।
आगे की राह
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब विश्व के 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है और भारत इसे वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में प्रस्तुत करता है। राधाकृष्णन के लेह दौरे ने इस संदेश को रेखांकित किया कि योग की प्रासंगिकता सीमाओं और ऊँचाइयों से परे है — और भारत इस विरासत का संरक्षक एवं प्रसारक दोनों है।