29 अक्टूबर 2026
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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 'सक्षम-2026' अभ्यास, ICAO दिशा-निर्देशों के तहत आपातकालीन तंत्र की हुई परख

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 'सक्षम-2026' अभ्यास, ICAO दिशा-निर्देशों के तहत आपातकालीन तंत्र की हुई परख

सारांश

'सक्षम-2026' महज़ एक औपचारिक कवायद नहीं थी — यह उस एयरपोर्ट की असली परीक्षा थी जो जल्द ही सालाना 7 करोड़ यात्रियों को संभालने का दावा करता है। NDRF से लेकर इंडिगो तक, दर्जनों एजेंसियों की एक साथ भागीदारी यह बताती है कि नोएडा का नया हवाई अड्डा सुरक्षा ढाँचे को उड़ान से पहले ही मज़बूत करना चाहता है।

मुख्य बातें

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 29 अक्टूबर 2026 को ' सक्षम-2026 ' पूर्ण पैमाने पर आपातकालीन अभ्यास आयोजित हुआ।
अभ्यास ICAO के दिशा-निर्देशों के अनुरूप था; इसमें NDRF, CISF, AAI, UP पुलिस, इंडिगो सहित दर्जनों एजेंसियों ने भाग लिया।
आपातकालीन अलर्ट, अग्निशमन, ग्रीन कॉरिडोर स्थापना और घायलों की त्वरित निकासी की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया।
एयरपोर्ट की CEO नीतू सामरा ने कहा कि ऐसे अभ्यास कमियों की पहचान और सुधार में सहायक हैं।
एयरपोर्ट का संचालन YIAPL (ज्यूरिख एयरपोर्ट की सहायक कंपनी) करती है; रियायत अवधि 40 वर्ष ( 1 अक्टूबर 2021 से) है।
मास्टर प्लान के अनुसार भविष्य में सालाना 7 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) पर 29 अक्टूबर 2026 को 'सक्षम-2026' नामक पूर्ण पैमाने पर आपातकालीन तैयारी अभ्यास आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य किसी भी संकट की स्थिति में एयरपोर्ट की प्रतिक्रिया क्षमता और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को परखना था। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस अभ्यास में एयरपोर्ट प्रबंधन, एयरलाइंस, सुरक्षा बलों और जिला प्रशासन सहित दर्जनों एजेंसियों ने भाग लिया।

अभ्यास का स्वरूप और उद्देश्य

इस अभ्यास में एयरपोर्ट परिसर में काल्पनिक आपातकालीन परिस्थिति तैयार की गई, जिसके माध्यम से यह जाँचा गया कि संकट के दौरान राहत एवं बचाव दल कितनी तेज़ी से सक्रिय होते हैं। आपातकालीन अलर्ट जारी करने, आग बुझाने, बचाव अभियान चलाने और विभिन्न टीमों के बीच ज़िम्मेदारियों के बंटवारे की प्रक्रिया का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। संचार व्यवस्था की दक्षता और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान को भी इस परीक्षण का अहम हिस्सा बनाया गया।

भाग लेने वाली प्रमुख एजेंसियाँ

'सक्षम-2026' में इंडिगो एयरलाइंस, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), उत्तर प्रदेश पुलिस, एयरपोर्ट मेडिकल सर्विस, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), जिला स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इतने बड़े पैमाने पर एजेंसियों की एक साथ भागीदारी इस अभ्यास को बहु-स्तरीय समन्वय का एक व्यापक परीक्षण बनाती है।

यातायात प्रबंधन और घायलों की निकासी की परख

अभ्यास का एक महत्त्वपूर्ण पहलू ग्रीन कॉरिडोर की स्थापना और घायलों को निर्धारित चिकित्सा केंद्रों तक न्यूनतम समय में पहुँचाने की प्रक्रिया का परीक्षण था। अस्पतालों, एंबुलेंस सेवाओं, पुलिस और चिकित्सा टीमों के बीच वास्तविक समय के समन्वय का भी आकलन किया गया। गौरतलब है कि एयरपोर्ट जैसे उच्च-यातायात स्थलों पर त्वरित निकासी योजना जीवन-रक्षक साबित हो सकती है।

सीईओ की प्रतिक्रिया

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीतू सामरा ने कहा कि एयरपोर्ट संचालन में सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी सबसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास से निर्धारित प्रक्रियाओं की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप जाँच करने, कमियों को समझने और आवश्यक सुधारों की पहचान करने का अवसर मिलता है। सामरा के अनुसार, सरकारी विभागों और एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने से आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता और मज़बूत होती है।

एयरपोर्ट परियोजना की पृष्ठभूमि और भविष्य की योजनाएँ

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास एवं संचालन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) के माध्यम से किया जा रहा है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के अंतर्गत विकसित हो रही है। रियायत अवधि 1 अक्टूबर 2021 से आरंभ हुई और यह 40 वर्षों के लिए निर्धारित है। एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में भविष्य में सालाना 7 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है — ऐसे में मज़बूत आपातकालीन तंत्र की अहमियत और भी बढ़ जाती है। 'सक्षम-2026' जैसे नियमित अभ्यास इस बड़े लक्ष्य की दिशा में सुरक्षा ढाँचे को परिपक्व बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए 'सक्षम-2026' का समय सोचा-समझा है — आपातकालीन तंत्र को तब परखना जब भीड़ न हो, वास्तविक उड़ान संचालन शुरू होने से पहले कमियाँ दूर करने का सही अवसर देता है। हालाँकि, असली परीक्षा तब होगी जब एयरपोर्ट पर रोज़ाना हज़ारों यात्री होंगे और काल्पनिक परिस्थितियाँ वास्तविक संकट में बदलेंगी। इसके अलावा, इतनी एजेंसियों के बीच समन्वय का अभ्यास तो हुआ, लेकिन अभ्यास के परिणामों — क्या कमियाँ मिलीं, कितने समय में प्रतिक्रिया दर्ज की गई — की पारदर्शी सार्वजनिक रिपोर्ट ही इस तैयारी की विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सक्षम-2026' अभ्यास क्या था और यह क्यों आयोजित किया गया?
'सक्षम-2026' नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 29 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक पूर्ण पैमाने का आपातकालीन तैयारी अभ्यास था, जो ICAO के दिशा-निर्देशों के अनुरूप था। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की प्रभावशीलता और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय क्षमता को परखना था।
इस अभ्यास में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
अभ्यास में इंडिगो एयरलाइंस, AAI, CISF, उत्तर प्रदेश पुलिस, एयरपोर्ट मेडिकल सर्विस, DDMA, जिला स्वास्थ्य विभाग, UP अग्निशमन सेवाएँ, NDRF और विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधि शामिल थे। इन सभी ने एक साथ मिलकर काल्पनिक आपातकालीन परिस्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन कौन करता है?
एयरपोर्ट का विकास और संचालन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) करती है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत विकसित हो रही है।
नोएडा एयरपोर्ट की भविष्य की यात्री क्षमता क्या है?
एयरपोर्ट के मास्टर प्लान के अनुसार, भविष्य में सालाना 7 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। रियायत अवधि 1 अक्टूबर 2021 से शुरू होकर 40 वर्षों के लिए निर्धारित है।
इस अभ्यास में ग्रीन कॉरिडोर का परीक्षण क्यों किया गया?
ग्रीन कॉरिडोर का परीक्षण इसलिए किया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपातकालीन स्थिति में घायलों को निर्धारित चिकित्सा केंद्रों तक न्यूनतम समय में पहुँचाया जा सके। यह पहलू अस्पतालों, एंबुलेंस सेवाओं और पुलिस के बीच वास्तविक समय के समन्वय की परख के लिए महत्त्वपूर्ण था।
राष्ट्र प्रेस
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