नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 'सक्षम-2026' अभ्यास, ICAO दिशा-निर्देशों के तहत आपातकालीन तंत्र की हुई परख
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) पर 29 अक्टूबर 2026 को 'सक्षम-2026' नामक पूर्ण पैमाने पर आपातकालीन तैयारी अभ्यास आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य किसी भी संकट की स्थिति में एयरपोर्ट की प्रतिक्रिया क्षमता और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को परखना था। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस अभ्यास में एयरपोर्ट प्रबंधन, एयरलाइंस, सुरक्षा बलों और जिला प्रशासन सहित दर्जनों एजेंसियों ने भाग लिया।
अभ्यास का स्वरूप और उद्देश्य
इस अभ्यास में एयरपोर्ट परिसर में काल्पनिक आपातकालीन परिस्थिति तैयार की गई, जिसके माध्यम से यह जाँचा गया कि संकट के दौरान राहत एवं बचाव दल कितनी तेज़ी से सक्रिय होते हैं। आपातकालीन अलर्ट जारी करने, आग बुझाने, बचाव अभियान चलाने और विभिन्न टीमों के बीच ज़िम्मेदारियों के बंटवारे की प्रक्रिया का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। संचार व्यवस्था की दक्षता और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान को भी इस परीक्षण का अहम हिस्सा बनाया गया।
भाग लेने वाली प्रमुख एजेंसियाँ
'सक्षम-2026' में इंडिगो एयरलाइंस, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), उत्तर प्रदेश पुलिस, एयरपोर्ट मेडिकल सर्विस, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), जिला स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इतने बड़े पैमाने पर एजेंसियों की एक साथ भागीदारी इस अभ्यास को बहु-स्तरीय समन्वय का एक व्यापक परीक्षण बनाती है।
यातायात प्रबंधन और घायलों की निकासी की परख
अभ्यास का एक महत्त्वपूर्ण पहलू ग्रीन कॉरिडोर की स्थापना और घायलों को निर्धारित चिकित्सा केंद्रों तक न्यूनतम समय में पहुँचाने की प्रक्रिया का परीक्षण था। अस्पतालों, एंबुलेंस सेवाओं, पुलिस और चिकित्सा टीमों के बीच वास्तविक समय के समन्वय का भी आकलन किया गया। गौरतलब है कि एयरपोर्ट जैसे उच्च-यातायात स्थलों पर त्वरित निकासी योजना जीवन-रक्षक साबित हो सकती है।
सीईओ की प्रतिक्रिया
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीतू सामरा ने कहा कि एयरपोर्ट संचालन में सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी सबसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास से निर्धारित प्रक्रियाओं की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप जाँच करने, कमियों को समझने और आवश्यक सुधारों की पहचान करने का अवसर मिलता है। सामरा के अनुसार, सरकारी विभागों और एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने से आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता और मज़बूत होती है।
एयरपोर्ट परियोजना की पृष्ठभूमि और भविष्य की योजनाएँ
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास एवं संचालन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) के माध्यम से किया जा रहा है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के अंतर्गत विकसित हो रही है। रियायत अवधि 1 अक्टूबर 2021 से आरंभ हुई और यह 40 वर्षों के लिए निर्धारित है। एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में भविष्य में सालाना 7 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है — ऐसे में मज़बूत आपातकालीन तंत्र की अहमियत और भी बढ़ जाती है। 'सक्षम-2026' जैसे नियमित अभ्यास इस बड़े लक्ष्य की दिशा में सुरक्षा ढाँचे को परिपक्व बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।