एनएसजी ने महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स लॉन्च किया, मानेसर में 12 हफ्ते की कड़ी ट्रेनिंग शुरू
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) की मानेसर स्थित ट्रेनिंग अकादमी ने 25 अगस्त 2026 को राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की महिला कर्मियों के लिए देश का पहला 'महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स' (एमसीसीसी) शुरू किया। भारत के आतंकवाद-रोधी ढाँचे में महिलाओं की ऑपरेशनल भागीदारी को विस्तार देने की यह पहल एनएसजी के अनुसार 'नारी शक्ति' के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर है।
कोर्स की संरचना और प्रशिक्षण सामग्री
12 हफ्ते के इस सघन कार्यक्रम को शारीरिक रूप से सक्षम, तकनीकी रूप से दक्ष और ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार महिला कमांडो गढ़ने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। पाठ्यक्रम में कठोर फिजिकल कंडीशनिंग, हथियार संचालन और निशानेबाज़ी, टैक्टिकल इंटरवेंशन, बंधक-मुक्ति अभियान और आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन के अन्य विशेष पहलू शामिल हैं। एनएसजी के अनुसार यह प्रशिक्षण महिला कर्मियों को जटिल और उच्च-जोखिम वाली ऑपरेशनल भूमिकाओं के लिए तैयार करेगा।
व्यापक उद्देश्य: अंतर-बल तालमेल और संस्थागत क्षमता
एनएसजी ने स्पष्ट किया है कि एमसीसीसी का दायरा केवल व्यक्तिगत कौशल विकास तक सीमित नहीं है। इस कोर्स का एक बड़ा लक्ष्य विभिन्न सुरक्षा बलों की महिला कर्मियों तक एनएसजी की आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञता का प्रसार करना है। इससे एकसमान पेशेवर मानकों को बढ़ावा मिलेगा और विभिन्न बलों के बीच अंतर-संचालनीयता (इंटरऑपरेबिलिटी) मज़बूत होगी।
यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कोर्स पूरा करने के बाद महिला कर्मी अपनी उन्नत दक्षता और ऑपरेशनल ज्ञान को अपनी-अपनी मूल फोर्स में वापस ले जाएँ, जिससे देशभर में आतंकवाद-रोधी क्षमता का विस्तार हो सके।
महिला सशक्तीकरण और सुरक्षा बलों में बदलाव
एनएसजी ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस पहल की जानकारी साझा करते हुए लिखा: 'जो हिम्मत करती है, वही नेतृत्व करती है।' संगठन ने इसे भारत के सुरक्षा ढाँचे में महिलाओं के लिए एक अहम पड़ाव बताया। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों में महिलाओं की ऑपरेशनल भूमिकाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
आगे की राह
एमसीसीसी की शुरुआत एक बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत देती है — जहाँ महिला सुरक्षाकर्मियों को केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें अग्रिम पंक्ति की आतंकवाद-रोधी जिम्मेदारियों के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा। एनएसजी के अनुसार, इस कार्यक्रम की सफलता के आधार पर भविष्य में इसे और विस्तार दिया जा सकता है।