25 अगस्त 2026
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प्रोफेशनल सर्विसेज में हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में, जेन-Z का हिस्सा 17% से बढ़कर 34% हुआ

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प्रोफेशनल सर्विसेज में हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में, जेन-Z का हिस्सा 17% से बढ़कर 34% हुआ

सारांश

भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में कर्मचारी संकट गहरा गया है — हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी ढूँढ रहा है, 86% फ्रंटलाइन मैनेजर बाहर निकलने की राह देख रहे हैं, और जेन-Z की हिस्सेदारी तीन साल में दोगुनी हो गई है। ग्रेट प्लेस टू वर्क की रिपोर्ट बताती है कि सुविधाएँ सुधरी हैं, पर भरोसा नहीं।

मुख्य बातें

हर 2 में से 1 कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश में है; 4 में से 3 अगले 12 महीनों में कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं।
जेन-Z की कार्यबल में हिस्सेदारी 2023 के 17% से बढ़कर 34% हो गई है।
86% फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइज़र नई नौकरी की तलाश में हैं, जबकि व्यक्तिगत योगदानकर्ताओं में यह आँकड़ा 53% है।
10 में से 6 संगठन AI का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन केवल 10 में से 2 कर्मचारियों को AI जोखिमों-फायदों की पर्याप्त जानकारी मिली है।
रिपोर्ट 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले 130+ संगठनों के अध्ययन पर आधारित है।

भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में कर्मचारियों को बनाए रखने का संकट गहराता जा रहा है — ग्रेट प्लेस टू वर्क की 25 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, हर दो में से एक कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश में है और चार में से तीन कर्मचारी अगले 12 महीनों के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। यह रिपोर्ट 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले 130 से ज़्यादा संगठनों के व्यापक अध्ययन पर आधारित है।

जेन-Z की बढ़ती हिस्सेदारी और बदलती प्राथमिकताएँ

रिपोर्ट का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि जेन-Z अब कुल कार्यबल का 34 प्रतिशत है, जो 2023 में मात्र 17 प्रतिशत था — यानी महज़ तीन वर्षों में हिस्सेदारी दोगुनी हो गई। इस पीढ़ी में वेतन, पहचान और पदोन्नति के मानदंडों को लेकर अस्पष्टता के प्रति सहनशीलता काफी कम है। आँकड़ों के अनुसार, उम्मीदें पूरी न होने पर ये कर्मचारी नौकरी बदलने में देर नहीं करते।

यह ऐसे समय में आया है जब कंपनियाँ कार्यस्थल की बुनियादी सुविधाओं में सुधार कर रही हैं, फिर भी कर्मचारियों की वफादारी और अतिरिक्त प्रयास की इच्छा घट रही है। रिपोर्ट में कहा गया, "यह गिरावट दर्शाती है कि कर्मचारी कार्यस्थल की भौतिक या बुनियादी सुविधाओं में मामूली सुधार को तो स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक कंपनी के प्रति वफादारी और अतिरिक्त प्रयास के लिए ज़रूरी व्यापक प्रणालीगत और सांस्कृतिक बदलाव उन्हें अभी तक महसूस नहीं हुए हैं।"

फ्रंटलाइन मैनेजरों पर दोहरा दबाव

रिपोर्ट में एक गंभीर चिंता फ्रंटलाइन प्रबंधकों को लेकर सामने आई है। आँकड़ों के अनुसार, 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइज़र सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश में हैं, जबकि व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आँकड़ा 53 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में इन मैनेजरों की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा गया, "ये मैनेजर पूरे उद्योग के लिए शॉक एब्ज़ॉर्बर की तरह काम कर रहे हैं। वे प्रोजेक्ट पूरा करने का दबाव, ग्राहकों की माँगों और टीम की देखभाल का संयुक्त बोझ उठा रहे हैं, जबकि उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि वे संगठन में होने वाले हर बदलाव को बिना किसी व्यवधान के कर्मचारियों तक पहुँचाएँ।" गौरतलब है कि मध्य-प्रबंधन की यह थकान किसी एक कंपनी की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की संरचनागत समस्या बनती जा रही है।

AI अपनाने में पारदर्शिता का अभाव

रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को लेकर भी एक महत्वपूर्ण अंतर उजागर हुआ है। लगभग 10 में से 6 संगठन अपने रोज़मर्रा के कामकाज में AI का उपयोग कर रहे हैं। हालाँकि, केवल 10 में से 2 कर्मचारियों ने पूरी तरह सहमति जताई कि उन्हें इन AI टूल्स से जुड़े जोखिमों और फायदों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई है। यह पारदर्शिता का अभाव कर्मचारियों में अनिश्चितता और अविश्वास को बढ़ावा दे सकता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया के प्रबंध निदेशक अक्षत शाह ने कहा, "प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र के लीडर्स को अपने कर्मचारियों की भागीदारी और उन्हें बनाए रखने के तरीकों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा और विविध कार्यबल की व्यक्तिगत अपेक्षाओं के अनुरूप बनाना होगा।" उनके अनुसार, एकसमान नीतियाँ अब उस कार्यबल पर काम नहीं करतीं जिसमें कई पीढ़ियाँ एक साथ काम कर रही हों।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनियाँ केवल बुनियादी सुधारों से आगे बढ़कर सांस्कृतिक और प्रणालीगत बदलाव लाने में सफल होती हैं, क्योंकि जेन-Z की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ कार्यस्थल की अपेक्षाओं का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सांस्कृतिक और प्रणालीगत बदलाव से बच रही हैं, जो असल में कर्मचारियों को रोकता है। फ्रंटलाइन मैनेजरों का 86% जॉब-सर्च दर एक संरचनागत विफलता का संकेत है, न कि व्यक्तिगत असंतोष का। जेन-Z की हिस्सेदारी के दोगुने होने के साथ, कंपनियों के पास अब एकसमान 'एंगेजमेंट' नीतियों से काम चलाने का विकल्प नहीं बचा। AI अपनाने में पारदर्शिता की कमी इस संकट में एक नई परत जोड़ती है — जो भविष्य में और बड़े असंतोष का कारण बन सकती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेट प्लेस टू वर्क की इस रिपोर्ट में क्या पाया गया?
रिपोर्ट में पाया गया कि भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में हर 2 में से 1 कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश में है और 4 में से 3 कर्मचारी अगले 12 महीनों में कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। यह अध्ययन 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले 130 से ज़्यादा संगठनों पर आधारित है।
कार्यबल में जेन-Z की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी है?
जेन-Z की हिस्सेदारी 2023 के 17% से बढ़कर 2026 में 34% हो गई है, यानी तीन वर्षों में दोगुनी। इस पीढ़ी में वेतन, पहचान और पदोन्नति को लेकर अस्पष्टता के प्रति सहनशीलता कम है और वे जल्दी नौकरी बदलने में नहीं हिचकते।
फ्रंटलाइन मैनेजरों की स्थिति इतनी चिंताजनक क्यों है?
86% फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइज़र नई नौकरी की तलाश में हैं, जो व्यक्तिगत योगदानकर्ताओं (53%) से काफी अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार ये मैनेजर प्रोजेक्ट दबाव, ग्राहक माँगें और टीम प्रबंधन का तिहरा बोझ उठा रहे हैं, जिससे उनकी थकान और असंतोष बढ़ रहा है।
कंपनियाँ कर्मचारियों को बनाए रखने में क्यों विफल हो रही हैं?
रिपोर्ट के अनुसार कंपनियाँ कार्यस्थल की बुनियादी सुविधाओं में सुधार तो कर रही हैं, लेकिन कर्मचारियों को दीर्घकालिक जोड़े रखने के लिए ज़रूरी सांस्कृतिक और प्रणालीगत बदलाव नहीं हो रहे। कर्मचारी मामूली सुधार स्वीकार करते हैं, लेकिन वफादारी के लिए गहरे बदलाव की उम्मीद रखते हैं।
कार्यस्थल में AI के उपयोग को लेकर क्या चिंता सामने आई?
लगभग 10 में से 6 संगठन अपने रोज़मर्रा के काम में AI का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन केवल 10 में से 2 कर्मचारियों ने माना कि उन्हें AI के जोखिमों और फायदों की पर्याप्त जानकारी दी गई। यह पारदर्शिता की कमी कर्मचारियों में अनिश्चितता और अविश्वास बढ़ा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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