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नीट-यूजी 2026 की वायरल ओएमआर शीट्स फर्जी, एनटीए ने डिजिटल छेड़छाड़ का खुलासा किया

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नीट-यूजी 2026 की वायरल ओएमआर शीट्स फर्जी, एनटीए ने डिजिटल छेड़छाड़ का खुलासा किया

सारांश

नीट-यूजी 2026 की ओएमआर शीट्स को लेकर सोशल मीडिया पर उठा तूफान एनटीए की जाँच में झूठा साबित हुआ। अवनीश श्रीवास्तव समेत चार अभ्यर्थियों के मामलों में डिजिटल छेड़छाड़ के स्पष्ट सबूत मिले। फर्जी दस्तावेज फैलाना अब आपराधिक दायरे में आता है।

मुख्य बातें

एनटीए ने 20 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर वायरल नीट-यूजी 2026 की ओएमआर शीट्स फर्जी और डिजिटल रूप से परिवर्तित हैं।
जाँच में अतिरिक्त उत्तर चिह्न जोड़ने , नाम बदलने और निरीक्षक हस्ताक्षर में फेरबदल जैसी गड़बड़ियाँ पाई गईं।
अवनीश श्रीवास्तव , प्रतिभा त्रिवेदी , अभय यादव और लक्ष्य सिंह — चारों के मामलों में घोषित परिणाम वास्तविक रिकॉर्ड से मेल खाते पाए गए।
अवनीश के नाम पर वायरल शीट में अजीत सिंह, पिता लखन सिंह का विवरण था, जो नीट-यूजी 2026 डेटाबेस में किसी अभ्यर्थी से मेल नहीं खाता।
फर्जी ओएमआर प्रसारित करना सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 , भारतीय न्याय संहिता, 2023 और IT अधिनियम, 2000 के तहत दंडनीय अपराध है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 20 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही नीट-यूजी 2026 की ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएँ फर्जी हैं और एजेंसी द्वारा जारी किसी भी आधिकारिक दस्तावेज से उनका कोई संबंध नहीं है। एनटीए के अनुसार, जाँच में यह सामने आया है कि ये तस्वीरें मूल ओएमआर शीट्स के साथ डिजिटल छेड़छाड़ कर तैयार किए गए नकली संस्करण हैं।

क्या है पूरा मामला

सोशल मीडिया पर कुछ अभ्यर्थियों की कथित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं की तस्वीरें साझा कर यह दावा किया जा रहा था कि उनके घोषित परिणाम गलत हैं। एनटीए ने बताया कि प्रत्येक ऐसे मामले की जाँच की गई और हर बार रिकॉर्ड पर उपलब्ध वास्तविक दस्तावेज घोषित परिणामों का समर्थन करते पाए गए। एजेंसी ने कहा कि किसी भी मामले में मूल्यांकन संबंधी त्रुटि नहीं पाई गई।

डिजिटल छेड़छाड़ की प्रकृति

एनटीए के अनुसार, जाँचे गए मामलों में वायरल ओएमआर शीट्स में अतिरिक्त उत्तर चिह्न जोड़ने, नामों में बदलाव करने तथा निरीक्षक के प्रमाणित हस्ताक्षर के समय में फेरबदल जैसी गड़बड़ियाँ पाई गईं। असली ओएमआर उत्तर-पत्रिका पर अभ्यर्थी का सही रोल नंबर, टेस्ट बुकलेट नंबर, बारकोड, क्रम संख्या, टेस्ट बुकलेट कोड, अभ्यर्थी का नाम, अभिभावक का विवरण, दोनों निरीक्षकों के हस्ताक्षर और अभ्यर्थी का अंगूठे का निशान — सभी अभ्यर्थी की अपनी लिखावट और उपस्थिति में दर्ज हैं।

अवनीश श्रीवास्तव समेत चार अभ्यर्थियों के मामले

एनटीए ने अवनीश श्रीवास्तव की ओएमआर को लेकर किए जा रहे दावों पर विशेष स्पष्टीकरण दिया। एजेंसी के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीर में अजीत सिंह, पिता लखन सिंह तथा माता रीना सिंह का विवरण दर्ज है, जो नीट-यूजी 2026 के डेटाबेस में किसी भी पंजीकृत अभ्यर्थी से मेल नहीं खाता। वास्तविक रिकॉर्ड में अवनीश श्रीवास्तव, पिता मुकेश कुमार और माता रेखा कुमारी का विवरण दर्ज है। इसी प्रकार अभ्यर्थी प्रतिभा त्रिवेदी, अभय यादव और लक्ष्य सिंह के मामलों की भी जाँच की गई और सभी के घोषित परिणाम वास्तविक ओएमआर, आधिकारिक उत्तर-कुंजी तथा मूल्यांकन रिकॉर्ड के अनुरूप पाए गए।

कानूनी चेतावनी और आधिकारिक अपील

एनटीए ने चेतावनी दी है कि फर्जी, डिजिटल रूप से परिवर्तित या जाली ओएमआर उत्तर-पत्रिका का निर्माण, प्रस्तुतिकरण या प्रसार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत संज्ञेय अपराध है। इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। एनटीए के परीक्षा निदेशक ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अप्रमाणित सामग्री से भ्रमित न हों और केवल आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध सूचनाओं पर भरोसा करें। वास्तविक शिकायत होने पर 20 जुलाई 2026 को जारी सार्वजनिक सूचना में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी गई है।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नीट-यूजी परीक्षा प्रणाली पहले से ही जाँच के दायरे में है और अभ्यर्थियों में परिणामों को लेकर संशय का माहौल बना हुआ है। एनटीए का यह स्पष्टीकरण परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े संकट को नहीं ढकता जो नीट परीक्षा प्रणाली की साख को लेकर पिछले दो वर्षों में उभरा है — 2024 के पेपर-लीक विवाद से लेकर अब तक। जब संस्थागत भरोसा पहले से कमज़ोर हो, तो फर्जी दस्तावेज वायरल होने की ज़मीन खुद-ब-खुद तैयार हो जाती है। असली सवाल यह है कि एनटीए अपनी पारदर्शिता को सिर्फ खंडन तक सीमित रखेगा या ओएमआर सत्यापन की एक ऐसी सार्वजनिक प्रणाली विकसित करेगा जो अभ्यर्थी खुद रियल-टाइम में जाँच सकें। जब तक ऐसा नहीं होता, सोशल मीडिया पर हर परिणाम के बाद यही चक्र दोहराता रहेगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी 2026 की वायरल ओएमआर शीट्स को एनटीए ने क्यों खारिज किया?
एनटीए ने जाँच में पाया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित ओएमआर शीट्स मूल दस्तावेजों के साथ डिजिटल छेड़छाड़ कर बनाए गए नकली संस्करण हैं। इनमें अतिरिक्त उत्तर चिह्न जोड़ने, नाम बदलने और हस्ताक्षर में फेरबदल जैसी गड़बड़ियाँ पाई गईं।
अवनीश श्रीवास्तव की ओएमआर शीट को लेकर क्या विवाद था?
सोशल मीडिया पर अवनीश श्रीवास्तव के नाम पर एक ओएमआर शीट वायरल हुई, जिसमें 'अजीत सिंह, पिता लखन सिंह, माता रीना सिंह' का विवरण दर्ज था। एनटीए ने स्पष्ट किया कि यह विवरण नीट-यूजी 2026 के किसी भी पंजीकृत अभ्यर्थी से मेल नहीं खाता और वास्तविक रिकॉर्ड में अवनीश श्रीवास्तव का सही विवरण सुरक्षित है।
फर्जी ओएमआर शीट फैलाने पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
फर्जी ओएमआर उत्तर-पत्रिका का निर्माण, प्रस्तुतिकरण या प्रसार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत संज्ञेय अपराध है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
अभ्यर्थी अपनी असली ओएमआर उत्तर-पत्रिका कैसे सत्यापित कर सकते हैं?
एनटीए के अनुसार, वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका ओएमआर रिस्पॉन्स की-चैलेंज अवधि के दौरान अभ्यर्थियों के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेजी गई थी और एनटीए के आधिकारिक पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई थी। शिकायत के लिए 20 जुलाई 2026 को जारी सार्वजनिक सूचना में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
किन अभ्यर्थियों के मामलों की एनटीए ने जाँच की?
एनटीए ने अवनीश श्रीवास्तव, प्रतिभा त्रिवेदी, अभय यादव और लक्ष्य सिंह — चारों अभ्यर्थियों के मामलों की जाँच की। सभी मामलों में घोषित परिणाम वास्तविक ओएमआर, आधिकारिक उत्तर-कुंजी और मूल्यांकन रिकॉर्ड के अनुरूप पाए गए और कोई मूल्यांकन त्रुटि नहीं मिली।
राष्ट्र प्रेस
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