ओडिशा CM माझी ने गहरे दबाव से बारिश की समीक्षा की, 'जीरो कैजुअल्टी' नीति पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में एक उच्चस्तरीय बैठक में बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के चलते ओडिशा के दक्षिणी जिलों में हो रही भारी बारिश और राज्य की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रत्येक प्राकृतिक आपदा में राज्य की एकमात्र नीति 'जीरो कैजुअल्टी' है और इससे कोई समझौता नहीं होगा।
बैठक में कौन-कौन शामिल रहे
स्पेशल रिलीफ कमिश्नर राजेश प्रभाकर पाटिल ने मुख्यमंत्री को गहरे दबाव की स्थिति, अपेक्षित बारिश और सरकार द्वारा पहले से उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, मुख्य सचिव अनु गर्ग और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने आधिकारिक बयान में बताया कि माझी ने अधिकारियों को जलभराव वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने और पर्याप्त राहत सामग्री सुनिश्चित करने का आदेश दिया। हालाँकि चक्रवात का कोई खतरा नहीं है, फिर भी उन्होंने एहतियाती उपाय बनाए रखने पर बल दिया।
मुख्य घटनाक्रम और मौसम पूर्वानुमान
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि गहरे दबाव के प्रभाव से बुधवार और गुरुवार को भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी, जबकि 25 सितंबर के बाद स्थिति में सुधार का अनुमान है। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा के दक्षिणी जिले हर वर्ष मानसून के अंतिम चरण में अतिवृष्टि से जूझते हैं।
गौरतलब है कि ओडिशा ने पिछले कुछ वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा बनाई है, और 'जीरो कैजुअल्टी' का लक्ष्य अब राज्य की आपदा नीति की पहचान बन चुका है।
ODRAF की तैनाती और प्रभावित जिले
ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की कुल 33 टीमें विभिन्न जिलों में तैनात की गई हैं। इनमें गंजाम और कोरापुट में 6-6 टीमें, गजपति, मलकानगिरी और रायगढ़ा में 3-3 टीमें, कालाहांडी में 2 टीमें और बलांगीर में 1 टीम शामिल है। इसके अतिरिक्त, छत्रपुर (गंजाम) स्थित ODRAF यूनिट की 9 टीमें रिज़र्व में रखी गई हैं।
सर्वोच्च प्राथमिकता वाले जिलों में गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट, मलकानगिरी, नबरंगपुर और कालाहांडी हैं। राजस्व विभाग ने नुआपाड़ा, बलांगीर, कंधमाल, पुरी, खुर्दा और नयागढ़ में भी तैयारियाँ सुनिश्चित की हैं।
मछुआरों पर रोक, बंदरगाहों पर अलर्ट
समुद्र में अशांत मौसम की संभावना को देखते हुए सभी बंदरगाहों पर स्थानीय चेतावनी संकेत संख्या 3 जारी किया गया है। मछुआरों के समुद्र में जाने पर लगी रोक जारी रहेगी और जिला प्रशासन को इस प्रतिबंध का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
राज्य और जिला स्तर के अधिकारी वास्तविक समय में बारिश, जलभराव, आश्रय स्थलों की स्थिति, बिजली और पेयजल आपूर्ति, बचाव दल की उपलब्धता तथा जलाशयों में जल भंडारण की निगरानी कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
25 सितंबर के बाद मौसम में सुधार के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की जाएगी। प्रभावित जिलों में नुकसान का आकलन कर मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। ओडिशा सरकार का यह सक्रिय रुख यह संकेत देता है कि आपदा प्रबंधन अब प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्व-निवारक रणनीति पर आधारित है।