ओम बिड़ला का आह्वान: सार्वजनिक खर्च में ऑडिट निगरानी और जवाबदेही हो और मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने 4 नवंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में आयोजित संसद और राज्य विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (PAC) के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में सार्वजनिक खर्च की विधायी निगरानी को सुदृढ़ करने और सरकारों की जवाबदेही बढ़ाने का स्पष्ट आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता के धन का प्रत्येक रुपया पारदर्शी ढंग से और व्यापक जनहित में खर्च किया जाना अनिवार्य है।
सम्मेलन का संदर्भ और 'केरल प्रस्ताव'
केरल विधानसभा में आयोजित इस सम्मेलन में 27 राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने अनुभव व सुझाव साझा किए। बिड़ला ने बताया कि सम्मेलन में 'केरल प्रस्ताव' को स्वीकार किया गया, जो देशभर में PAC के कामकाज को सशक्त बनाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण रूपरेखा के रूप में काम करेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को वित्तीय प्रबंधन में सुधार, सार्वजनिक व्यय में अनुशासन और शासन को अधिक पारदर्शी व जवाबदेह बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। गौरतलब है कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढाँचे, सामाजिक कल्याण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में बजटीय आवंटन लगातार बढ़ रहा है, जिससे इन निधियों के सदुपयोग की जाँच और भी ज़रूरी हो जाती है।
ऑडिट रिपोर्ट के लंबित रहने पर चिंता
बिड़ला ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि ऑडिट रिपोर्ट और सिफारिशें उचित फ़ॉलो-अप के अभाव में वर्षों तक लंबित पड़ी रहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) स्वतंत्र ऑडिट करते हैं, वहीं PAC की ज़िम्मेदारी इन निष्कर्षों की जाँच करना और सिफारिशों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि आवंटित धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए जिसके लिए वह स्वीकृत किया गया था, और उससे अपेक्षित परिणाम प्राप्त होने चाहिए। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना और उनकी गुणवत्ता, निरंतरता तथा परिणामों का आकलन करना विधायी समितियों की अहम भूमिका है।
तकनीक के उपयोग पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ने विधायी समितियों के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभाओं को संसदीय समितियों के लिए उपलब्ध प्रणाली की तर्ज पर 'डिजिटल ऑडिट निगरानी प्लेटफॉर्म' विकसित करने चाहिए।
साथ ही उन्होंने आगाह किया कि तकनीक को मानवीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायक होना चाहिए, न कि उसकी जगह लेनी चाहिए। CAG और PAC के अधिकारियों को तकनीकी बदलावों के साथ क़दम मिलाने के लिए नियमित प्रशिक्षण मिलना चाहिए, और विधायकों के पास भी आधुनिक तकनीक का उपयोग करने के लिए आवश्यक कौशल होना चाहिए।
सर्वदलीय एकजुटता का संदेश
बिड़ला ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही के साझा लक्ष्य को हासिल करने में राजनीतिक और वैचारिक मतभेद आड़े नहीं आने चाहिए। उन्होंने विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने और देशभर में लागू किए जाने पर भी बल दिया।
सम्मेलन के आयोजन के लिए उन्होंने केरल विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन एवं अन्य संबद्ध लोगों का आभार व्यक्त किया। बिड़ला ने कहा कि केरल की लोकतांत्रिक परंपराएँ और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवा में उसका उल्लेखनीय योगदान इस बैठक के लिए इसे एक उपयुक्त स्थान बनाता है।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब सार्वजनिक वित्त प्रबंधन में पारदर्शिता की माँग राष्ट्रीय विमर्श में तेज़ी से उभर रही है। 'केरल प्रस्ताव' के क्रियान्वयन की दिशा में अब राज्य विधानसभाओं की पहल निर्णायक साबित होगी।