तिरुवनंतपुरम में PAC अध्यक्षों का दो दिवसीय सम्मेलन: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में भारत की संसद तथा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विधायिकाओं की लोक लेखा समितियों (PAC) के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का विषय 'ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन — PAC की बदलती भूमिका' रखा गया है। बिरला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस आयोजन की जानकारी साझा की।
सम्मेलन का महत्व और उद्देश्य
अपने उद्घाटन भाषण में ओम बिरला ने कहा कि केरल की लोकतांत्रिक परंपराओं से समृद्ध धरती पर संसद और राज्य विधानमंडलों की PAC के प्रतिनिधियों का एकत्रित होना अत्यंत सार्थक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सार्वजनिक धन के उपयोग की निष्पक्ष और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना ही इस समिति का मूल उद्देश्य है।
बिरला ने रेखांकित किया कि लोक लेखा समिति का ऐतिहासिक महत्व रहा है — यह समिति आज़ादी से पहले भी अस्तित्व में थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद एक महत्वपूर्ण संसदीय परंपरा विकसित की गई, जिसके अंतर्गत विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य को PAC का सभापति बनाया जाता है — जो भारतीय लोकतंत्र की बड़ी ताकत है।
सार्वजनिक धन की निगरानी में PAC की भूमिका
लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संसद और राज्य विधानमंडल कानून बनाते हैं और बजट पारित करते हैं। इस बजट के माध्यम से जनता के धन को इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, सामाजिक कल्याण योजनाओं और जनकल्याण के कार्यों पर व्यय किया जाता है। इस धन का निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करना PAC की केंद्रीय जिम्मेदारी है।
बिरला ने यह भी कहा कि सामाजिक कल्याण योजनाओं में केवल बजट आवंटन और धनराशि व्यय हो जाना पर्याप्त नहीं है। उस व्यय का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा, इसका मूल्यांकन करना भी PAC की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि PAC दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संसदीय निष्पक्षता के साथ काम करती है, क्योंकि इसका साझा उद्देश्य शासन में जवाबदेही और कार्यपालिका में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
तकनीक के उपयोग का आह्वान
बदलते परिप्रेक्ष्य में ओम बिरला ने PAC के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बेहतर तकनीक के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से आँकड़ों का बेहतर विश्लेषण किया जा सकता है, खर्च के रुझानों को समझा जा सकता है, संभावित जोखिमों की पहचान हो सकती है और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें सार्वजनिक वित्त प्रबंधन में डिजिटल उपकरणों को तेज़ी से अपना रही हैं। बिरला ने हालाँकि यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक के साथ-साथ जवाबदेही और मानवीय संवेदनशीलता का समन्वय भी आवश्यक है, ताकि सरकारी धन का उपयोग केवल योजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी सहायक हो।
सम्मेलन से अपेक्षाएँ
लोकसभा अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में संसद और राज्य विधानमंडलों की लोक लेखा समितियाँ अपने अनुभव, विचार और दृष्टिकोण साझा करेंगी तथा एक-दूसरे की बेस्ट प्रैक्टिसेज से सीखेंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन से उपयोगी सुझाव सामने आएंगे जो PAC को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने में सहायक होंगे।
यह सम्मेलन भारत के संसदीय लोकतंत्र में वित्तीय जवाबदेही के ढाँचे को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।