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तिरुवनंतपुरम में PAC अध्यक्षों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया उद्घाटन

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तिरुवनंतपुरम में PAC अध्यक्षों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया उद्घाटन

सारांश

तिरुवनंतपुरम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने PAC अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन में ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन पर मंथन के साथ AI व डेटा एनालिसिस से PAC को सशक्त बनाने की पहल पर जोर दिया गया।

मुख्य बातें

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तिरुवनंतपुरम में PAC अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।
सम्मेलन का विषय: 'ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन — PAC की बदलती भूमिका' ।
बिरला ने PAC की परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य को PAC का सभापति बनाने की परंपरा स्वतंत्रता के बाद से चली आ रही है।
उन्होंने AI और डेटा एनालिसिस के ज़रिये वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने का आह्वान किया।
सम्मेलन में देशभर की विधायिकाओं के PAC प्रतिनिधि सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ साझा करेंगे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 4 नवंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में भारत की संसद तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की विधायिकाओं की लोक लेखा समितियों (PAC) के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का केंद्रीय विषय है — 'ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन: PAC की बदलती भूमिका'। बिरला ने एक्स पर पोस्ट कर इस आयोजन की जानकारी साझा की।

सम्मेलन का संदर्भ और महत्व

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर की विधायिकाओं के PAC अध्यक्ष और सदस्य एक मंच पर एकत्र हुए हैं। बिरला ने कहा कि उन्हें खुशी है कि लोकतांत्रिक परंपराओं से समृद्ध केरल की धरती पर यह महत्वपूर्ण विमर्श हो रहा है।

उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानमंडल कानून बनाते हैं और बजट पारित करते हैं। इस बजट के ज़रिये यह सुनिश्चित किया जाता है कि जनता का धन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, सामाजिक कल्याण योजनाओं और जनहित के कार्यों पर व्यय हो।

PAC की ऐतिहासिक भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष ने लोक लेखा समिति के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह समिति आज़ादी से पहले भी अस्तित्व में थी। स्वतंत्रता के बाद भारत ने एक महत्वपूर्ण संसदीय परंपरा विकसित की, जिसके अंतर्गत विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य को इस समिति का सभापति बनाया जाता है।

बिरला ने कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग की निष्पक्ष और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है। यह भारतीय लोकतंत्र की बड़ी शक्ति है, क्योंकि इसमें सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मिलकर काम करते हैं।

प्रभाव मूल्यांकन और जवाबदेही पर जोर

बिरला ने स्पष्ट किया कि सामाजिक कल्याण योजनाओं में केवल बजट आवंटन और धनराशि का व्यय पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि उस व्यय का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा, इसका मूल्यांकन करना भी PAC की ज़िम्मेदारी है। उनके अनुसार यह समिति दलीय हितों से ऊपर उठकर संसदीय निष्पक्षता के साथ कार्य करती है, क्योंकि इसका एकमात्र साझा उद्देश्य शासन में जवाबदेही और कार्यपालिका में पारदर्शिता लाना है।

तकनीक और AI का आह्वान

लोकसभा अध्यक्ष ने बदलते दौर में PAC के कार्य को प्रभावी बनाने के लिए बेहतर तकनीक के उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से खर्च के रुझानों को समझा जा सकता है, संभावित जोखिमों की पहचान की जा सकती है और वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि तकनीक के साथ-साथ जवाबदेही और मानवीय संवेदनशीलता का समन्वय भी आवश्यक है, ताकि सरकारी धन का उपयोग केवल योजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाए।

सम्मेलन से क्या अपेक्षाएँ

बिरला ने आशा व्यक्त की कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में PAC के सभापति और सदस्य अपने अनुभव, विचार और दृष्टिकोण साझा करेंगे, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) से सीखेंगे और उपयोगी सुझाव सामने आएंगे। यह सम्मेलन देशभर की लोक लेखा समितियों को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह सम्मेलन केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा या इससे राज्यस्तरीय PAC को वास्तविक दाँत और नाखून मिलेंगे। AI और डेटा एनालिसिस के उपयोग का आह्वान स्वागतयोग्य है, परंतु कई राज्य विधानमंडलों में PAC की बैठकें ही अनियमित रहती हैं — तकनीक से पहले बुनियादी क्रियाशीलता सुनिश्चित करना ज़रूरी है। मुख्यधारा की कवरेज उद्घाटन भाषण तक सीमित रहती है; असली खबर वह होगी जब सम्मेलन से निकले सुझाव नीति में तब्दील हों।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुवनंतपुरम में आयोजित PAC सम्मेलन क्या है?
यह भारत की संसद तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की विधायिकाओं की लोक लेखा समितियों के अध्यक्षों का दो दिवसीय सम्मेलन है, जिसका उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तिरुवनंतपुरम में किया। सम्मेलन का विषय 'ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन — PAC की बदलती भूमिका' है।
लोक लेखा समिति (PAC) की क्या भूमिका होती है?
लोक लेखा समिति सार्वजनिक धन के उपयोग की निष्पक्ष और प्रभावी निगरानी करती है। यह सुनिश्चित करती है कि बजट में आवंटित धनराशि निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप खर्च हो और सामाजिक कल्याण योजनाओं का समाज पर वांछित प्रभाव पड़े।
PAC में विपक्ष को सभापति देने की परंपरा कब से है?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद भारत ने यह महत्वपूर्ण संसदीय परंपरा विकसित की कि PAC का सभापति विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य को बनाया जाए। इससे सार्वजनिक धन की निगरानी में निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
इस सम्मेलन में AI और तकनीक पर क्या चर्चा हुई?
ओम बिरला ने PAC के कामकाज को प्रभावी बनाने के लिए डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे खर्च के रुझानों को समझा जा सकता है, जोखिमों की पहचान हो सकती है और वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
इस सम्मेलन से क्या अपेक्षाएँ हैं?
सम्मेलन में देशभर की PAC के प्रतिनिधि अपने अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ साझा करेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ने आशा जताई कि इससे उपयोगी सुझाव सामने आएंगे जो PAC को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने में सहायक होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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