तिरुवनंतपुरम में PAC अध्यक्षों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 4 नवंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में भारत की संसद तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की विधायिकाओं की लोक लेखा समितियों (PAC) के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का केंद्रीय विषय है — 'ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन: PAC की बदलती भूमिका'। बिरला ने एक्स पर पोस्ट कर इस आयोजन की जानकारी साझा की।
सम्मेलन का संदर्भ और महत्व
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर की विधायिकाओं के PAC अध्यक्ष और सदस्य एक मंच पर एकत्र हुए हैं। बिरला ने कहा कि उन्हें खुशी है कि लोकतांत्रिक परंपराओं से समृद्ध केरल की धरती पर यह महत्वपूर्ण विमर्श हो रहा है।
उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानमंडल कानून बनाते हैं और बजट पारित करते हैं। इस बजट के ज़रिये यह सुनिश्चित किया जाता है कि जनता का धन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, सामाजिक कल्याण योजनाओं और जनहित के कार्यों पर व्यय हो।
PAC की ऐतिहासिक भूमिका
लोकसभा अध्यक्ष ने लोक लेखा समिति के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह समिति आज़ादी से पहले भी अस्तित्व में थी। स्वतंत्रता के बाद भारत ने एक महत्वपूर्ण संसदीय परंपरा विकसित की, जिसके अंतर्गत विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य को इस समिति का सभापति बनाया जाता है।
बिरला ने कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग की निष्पक्ष और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है। यह भारतीय लोकतंत्र की बड़ी शक्ति है, क्योंकि इसमें सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मिलकर काम करते हैं।
प्रभाव मूल्यांकन और जवाबदेही पर जोर
बिरला ने स्पष्ट किया कि सामाजिक कल्याण योजनाओं में केवल बजट आवंटन और धनराशि का व्यय पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि उस व्यय का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा, इसका मूल्यांकन करना भी PAC की ज़िम्मेदारी है। उनके अनुसार यह समिति दलीय हितों से ऊपर उठकर संसदीय निष्पक्षता के साथ कार्य करती है, क्योंकि इसका एकमात्र साझा उद्देश्य शासन में जवाबदेही और कार्यपालिका में पारदर्शिता लाना है।
तकनीक और AI का आह्वान
लोकसभा अध्यक्ष ने बदलते दौर में PAC के कार्य को प्रभावी बनाने के लिए बेहतर तकनीक के उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से खर्च के रुझानों को समझा जा सकता है, संभावित जोखिमों की पहचान की जा सकती है और वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि तकनीक के साथ-साथ जवाबदेही और मानवीय संवेदनशीलता का समन्वय भी आवश्यक है, ताकि सरकारी धन का उपयोग केवल योजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाए।
सम्मेलन से क्या अपेक्षाएँ
बिरला ने आशा व्यक्त की कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में PAC के सभापति और सदस्य अपने अनुभव, विचार और दृष्टिकोण साझा करेंगे, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) से सीखेंगे और उपयोगी सुझाव सामने आएंगे। यह सम्मेलन देशभर की लोक लेखा समितियों को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।