15 सितंबर 2026
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यूसीसी पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा सवाल: 'राज्यों में नहीं, संसद में लाओ कानून'; एनडीए में भी मतभेद

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यूसीसी पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा सवाल: 'राज्यों में नहीं, संसद में लाओ कानून'; एनडीए में भी मतभेद

सारांश

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यूसीसी को राज्य-दर-राज्य लागू करने की कोशिश पर सीधा सवाल दागा — 'बहुमत है तो संसद में लाओ।' एनडीए सहयोगी जद-यू के बिहार में विरोध ने इस बहस को और पेचीदा बना दिया है।

मुख्य बातें

उमर अब्दुल्ला ने 15 सितंबर 2026 को श्रीनगर में कहा कि यूसीसी को राज्यों में नहीं, संसद में लाया जाना चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि केवल भाजपा शासित राज्यों में लागू कानून को 'यूनिवर्सल' नहीं कहा जा सकता।
रिपोर्टों के अनुसार, एनडीए सहयोगी जनता दल-यूनाइटेड ने बिहार में यूसीसी लागू करने से इनकार किया है।
अब्दुल्ला ने 'एक देश, एक चुनाव' और आरक्षण जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए यूसीसी पर भी संसदीय प्रक्रिया की माँग की।
उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा शासित राज्यों द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की कोशिशों पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के इस विषय पर कानून राज्यों में नहीं, बल्कि संसद में लाया जाना चाहिए, जो पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है।

मुख्य बयान और तर्क

अब्दुल्ला ने सीधे सवाल दागते हुए कहा, 'अगर आपके पास बहुमत है, तो इसे संसद में लाएं। आप अलग-अलग राज्यों में ऐसा क्यों कर रहे हैं?' उनका तर्क था कि जब तक यूसीसी केवल भाजपा शासित राज्यों तक सीमित है, तब तक इसे 'यूनिवर्सल' नहीं कहा जा सकता। उन्होंने याद दिलाया कि देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भाजपा की सरकार नहीं है।

एनडीए में मतभेद की ओर इशारा

अब्दुल्ला ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के भीतर असहमति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार, जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) ने साफ कह दिया है कि बिहार में यूसीसी लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'अगर उनके अपने सहयोगी ही इसके लिए तैयार नहीं हैं, तो वे कैसे कह सकते हैं कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए?'

विधायी प्रक्रिया पर सवाल

अब्दुल्ला ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार अन्य बड़े विधायी मुद्दों — जैसे 'एक देश, एक चुनाव' या आरक्षण — पर संसद का हवाला देती रही है, लेकिन यूसीसी के मामले में राज्यों के रास्ते से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, 'इसे संसद में लाएं और देखते हैं कि क्या आप इसे पास करा पाते हैं।'

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है और कई अन्य भाजपा शासित राज्य भी इसी दिशा में कदम उठाने की तैयारी में हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केंद्र सरकार पर संसद में व्यापक बहस कराने का दबाव बढ़ रहा है। विपक्ष का एक बड़ा तबका लंबे समय से यह माँग करता आया है कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर सभी दलों और समुदायों की राय ली जाए।

आगे क्या होगा

अब्दुल्ला के इस बयान से यूसीसी पर राष्ट्रीय बहस एक बार फिर तेज होने के संकेत मिलते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए सहयोगियों की असहमति केंद्र सरकार की रणनीति को जटिल बना सकती है। आने वाले दिनों में अन्य राज्य सरकारों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह मुद्दा संसद के पटल पर कब और कैसे आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अब्दुल्ला ने यूसीसी पर क्या कहा?
उमर अब्दुल्ला ने 15 सितंबर 2026 को कहा कि यूसीसी जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषय पर कानून अलग-अलग राज्यों में नहीं, बल्कि संसद में लाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर उनके पास बहुमत है तो वे इसे संसद में क्यों नहीं लाते।
यूसीसी को लेकर एनडीए में मतभेद क्यों है?
रिपोर्टों के अनुसार, एनडीए सहयोगी जनता दल-यूनाइटेड ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में यूसीसी लागू नहीं किया जाएगा। अब्दुल्ला ने इसी को आधार बनाकर तर्क दिया कि जब गठबंधन के अपने साझेदार सहमत नहीं हैं, तो यूसीसी को पूरे देश में लागू करने का दावा कमज़ोर पड़ता है।
क्या यूसीसी किसी राज्य में लागू हो चुका है?
हाँ, उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। इसके बाद कई अन्य भाजपा शासित राज्य भी यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी में हैं।
उमर अब्दुल्ला के अनुसार यूसीसी पर फैसला कौन करेगा?
अब्दुल्ला का कहना है कि यूसीसी जैसे विषय पर फैसला संसद को करना चाहिए, क्योंकि संसद ही पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है। उनके अनुसार अलग-अलग राज्यों द्वारा इसे लागू करना इस कानून की सार्वभौमिकता को कमज़ोर करता है।
यूसीसी विवाद का व्यापक राजनीतिक असर क्या है?
यह विवाद केंद्र-राज्य संबंधों और गठबंधन राजनीति दोनों पर असर डालता है। एनडीए के भीतर असहमति और विपक्ष की माँगें मिलकर यह संकेत देती हैं कि यूसीसी का रास्ता राज्यों से होकर नहीं, बल्कि संसद से होकर जाना होगा — अन्यथा इसकी वैधता पर सवाल उठते रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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