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ऑपरेशन सिंदूर: सिर्फ 4 दिनों में पाकिस्तान को युद्धविराम मांगना पड़ा — राजनाथ सिंह

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ऑपरेशन सिंदूर: सिर्फ 4 दिनों में पाकिस्तान को युद्धविराम मांगना पड़ा — राजनाथ सिंह

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी — यह भारत की बदली हुई रणनीतिक भाषा थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, सिर्फ चार दिनों में पाकिस्तान को युद्धविराम की गुहार लगानी पड़ी। तीनों सेनाओं के समन्वय और आधुनिक तकनीक के संयोग ने इसे भारतीय सैन्य इतिहास का एक नया मील का पत्थर बना दिया।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2025 को बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने केवल 4 दिनों में पाकिस्तान को युद्धविराम की अपील करने पर विवश कर दिया।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया गया।
समारोह में CDS जनरल अनिल चौहान , वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी उपस्थित रहे।
राजनाथ सिंह ने अभियान को भारत के सैन्य इतिहास की अभूतपूर्व सफलता बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार इस अभियान ने भारत की बहुआयामी और सटीक सैन्य क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2025 को नई दिल्ली में खुलासा किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने केवल चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को युद्धविराम की अपील करने पर विवश कर दिया। उन्होंने इस अभियान को भारत की निर्णायक इच्छाशक्ति, आधुनिक सैन्य सामर्थ्य और तीनों सेनाओं के असाधारण समन्वय का जीवंत प्रमाण बताया।

स्मारक प्रकाशन का विमोचन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह का वातावरण गर्व, सम्मान और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत रहा।

अभियान की ऐतिहासिक विशिष्टता

राजनाथ सिंह ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि भारत के अब तक के युद्धों और सैन्य अभियानों की तुलना में 'ऑपरेशन सिंदूर' कई मायनों में अभूतपूर्व और अत्यधिक प्रभावशाली रहा। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों और रणनीतियों से नहीं जीते जाते — नेतृत्व, साहस, मानसिक दृढ़ता और दबाव में सटीक निर्णय लेने की क्षमता सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है।

गौरतलब है कि इस अभियान की रणनीतिक योजना, संयुक्त सैन्य समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर पर सैनिकों के साहसिक प्रदर्शन की चर्चा अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हो चुकी है।

स्मारक प्रकाशन का महत्त्व

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह स्मारक प्रकाशन केवल घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण नहीं है — यह उन सैनिकों की भावनाओं, संघर्षों और अनुभवों को भी सामने लाता है जिन्होंने विकट परिस्थितियों में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस प्रकाशन से प्रेरणा लेकर ऐसे जिम्मेदार नागरिक बनें जो देश की संप्रभुता और सुरक्षा के महत्त्व को गहराई से समझ सकें।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध की सीमाओं से आगे बढ़कर तेज़, सटीक और बहुआयामी सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में पूरी तरह सक्षम हैं। इस अभियान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा।

आगे की राह

इस स्मारक प्रकाशन को सैनिकों के साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को समर्पित एक जीवंत दस्तावेज़ माना जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। यह अभियान भारत की सैन्य नीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्मारक प्रकाशन और आधिकारिक समारोहों के बीच यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि अभियान के दौरान हुई क्षति, कूटनीतिक दबाव और युद्धविराम की शर्तों का स्वतंत्र सत्यापन कब सार्वजनिक होगा। भारत की सैन्य पारदर्शिता की परीक्षा इस बात से होगी कि क्या यह आख्यान केवल विजय-उत्सव तक सीमित रहता है, या भविष्य की नीति के लिए जवाबदेही का ढाँचा भी तैयार करता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर क्या था और इसका परिणाम क्या रहा?
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों का एक बहुआयामी सैन्य अभियान था, जिसमें तीनों सेनाओं ने संयुक्त रूप से भाग लिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, इस अभियान के मात्र 4 दिनों के भीतर पाकिस्तान को युद्धविराम की अपील करनी पड़ी।
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को पिछले अभियानों से अलग क्यों बताया?
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभियान आधुनिक तकनीक, तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट समन्वय और सटीक रणनीतिक निर्णय-क्षमता के कारण भारत के पूर्व के युद्धों व अभियानों से कई मायनों में अलग और अधिक प्रभावशाली रहा। उन्होंने इसे भारतीय सैन्य इतिहास की अभूतपूर्व सफलता बताया।
29 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में क्या हुआ?
नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया। इस समारोह में CDS जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी सहित सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ऑपरेशन सिंदूर के स्मारक प्रकाशन में क्या है?
रक्षा मंत्री के अनुसार यह प्रकाशन केवल घटनाओं का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि इसमें उन सैनिकों की भावनाओं, संघर्षों और अनुभवों को भी दर्ज किया गया है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की। इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है।
विशेषज्ञ ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य क्षमता के संदर्भ में कैसे देखते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध की सीमाओं से आगे बढ़कर तेज़, सटीक और बहुआयामी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। इस अभियान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सैन्य दृढ़ता का संदेश भी दिया।
राष्ट्र प्रेस
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