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ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ: भारतीय सेना ने गन हिल (प्वाइंट 5140) पर चढ़कर कारगिल शहीदों को श्रद्धांजलि दी

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ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ: भारतीय सेना ने गन हिल (प्वाइंट 5140) पर चढ़कर कारगिल शहीदों को श्रद्धांजलि दी

सारांश

ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ पर भारतीय सेना 17,000 फीट ऊंचे गन हिल पर पहुंची — वही चोटी जिसे 20 जून 1999 को बिना एक जवान खोए जीता गया था। 25 पूर्व और 101 मौजूदा जवानों की यह यात्रा महज ट्रेक नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस को सलाम है जिसने द्रास सेक्टर में दुश्मन की रीढ़ तोड़ी थी।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 13 जुलाई 2025 को ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ पर द्रास में गन हिल (प्वाइंट 5140) तक विशेष स्मरण अभियान आयोजित किया।
प्वाइंट 5140 पर 20 जून 1999 की सुबह 5 बजे 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने कब्जा किया था — 17,000 फीट की ऊंचाई पर बिना एक भी जवान गंवाए।
'शत्रुनाश' तोपखाना अभियान में बोफोर्स तोपों और मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर ने दुश्मन के बंकर ध्वस्त किए।
वर्ष 2023 में तोपखाने की भूमिका के सम्मान में प्वाइंट 5140 का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर 'गन हिल' रखा गया।
अभियान में 25 पूर्व सैनिक और स्थानीय इकाइयों के 101 जवान शामिल हुए।

भारतीय सेना ने 13 जुलाई 2025 को ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर द्रास स्थित ऐतिहासिक सैन्य स्थल गन हिल (प्वाइंट 5140) तक एक विशेष स्मरण अभियान आयोजित किया। यह अभियान 1999 के कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों के साहस, बलिदान और अदम्य सैन्य कौशल को सम्मान देने के उद्देश्य से चलाया गया।

गन हिल का सामरिक महत्व

गन हिल, जिसे पहले प्वाइंट 5140 के नाम से जाना जाता था, द्रास-कारगिल राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान द्रास घाटी की निगरानी का एक प्रमुख केंद्र है। 1999 के युद्ध के दौरान यह दुश्मन का एक सुदृढ़ ठिकाना और निगरानी केंद्र था, जिस पर नियंत्रण पाना द्रास सेक्टर में भारतीय सेना की रणनीतिक सफलता के लिए अनिवार्य था।

निर्णायक युद्ध का इतिहास

13-14 जून 1999 की रात 18 ग्रेनेडियर्स ने 'हम्प' नामक महत्वपूर्ण क्षेत्र पर कब्जा कर प्वाइंट 5140 की घेराबंदी का पहला चरण पूरा किया। इसके बाद 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने दो बोफोर्स तोपों की सहायता से 'रॉकी नॉब' पर धावा बोला और उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। सटीक तोपखाने की कार्रवाई में दुश्मन के तीन बंकर और कई ठिकाने ध्वस्त किए गए।

प्वाइंट 5140 पर अंतिम और निर्णायक हमला 19-20 जून 1999 की रात शुरू हुआ। इस दौरान 'शत्रुनाश' नाम से व्यापक तोपखाना अभियान चलाया गया, जिसमें बोफोर्स तोपों और मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर समेत अनेक तोपखाना इकाइयों ने भाग लिया। दोनों दिशाओं से लगातार की गई गोलाबारी ने दुश्मन की रक्षा पंक्ति को बुरी तरह कमजोर कर दिया।

तोपखाने की इस सघन कार्रवाई के बाद पैदल सेना ने असाधारण साहस और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए। 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने 20 जून 1999 की सुबह 5 बजे तक प्वाइंट 5140 पर तिरंगा फहरा दिया। इस सफलता के साथ आसपास के कई अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर भी नियंत्रण स्थापित हुआ, जिससे द्रास सेक्टर में दुश्मन की समूची रक्षा व्यवस्था चरमरा गई।

भारतीय तोपखाने की ऐतिहासिक उपलब्धि

भारतीय सेना के अनुसार, इस अभियान की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि 17,000 फीट की ऊंचाई पर भारी किलेबंदी वाले इस लक्ष्य को बिना एक भी भारतीय जवान की जान गंवाए हासिल किया गया। यह सफलता भारतीय तोपखाने की सटीकता, मारक क्षमता और प्रभावशीलता का जीवंत प्रमाण है। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में तोपखाने की इसी निर्णायक भूमिका को सम्मान देते हुए प्वाइंट 5140 का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर 'गन हिल' रखा गया।

अभियान में भागीदारी

इस स्मरण अभियान में ऑपरेशन विजय 1999 के दौरान तोपखाना अभियानों में सक्रिय रहीं इकाइयों के 25 सैनिकों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही स्थानीय सैन्य इकाइयों के 101 जवानों ने भी अभियान में भागीदारी निभाई। पूर्व सैनिकों और वर्तमान जवानों की इस संयुक्त भागीदारी ने सेना की गौरवशाली परंपरा और अटूट एकजुटता को रेखांकित किया।

स्मरण और प्रेरणा की यात्रा

भारतीय सेना ने स्पष्ट किया कि गन हिल अभियान महज एक पर्वतारोहण कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्मरण, सम्मान और प्रेरणा की एक पवित्र यात्रा है। यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को साहस, कर्तव्यनिष्ठा, निस्वार्थ सेवा और देशभक्ति के मूल्यों से प्रेरित करने का माध्यम है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब देश अपने उन वीरों को याद करता है जिन्होंने 1999 में दुर्गम पहाड़ों पर भारत की संप्रभुता की रक्षा की थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका महत्व केवल स्मरण तक सीमित नहीं है — यह उस सैन्य सिद्धांत की पुनः पुष्टि है जिसमें तोपखाने और पैदल सेना के तालमेल ने असंभव को संभव किया। 'शत्रुनाश' जैसे अभियानों की सफलता आज के आधुनिक युद्ध-परिदृश्य में भी प्रासंगिक है, जब भारत अपनी तोपखाना क्षमता का विस्तार कर रहा है। यह ध्यान देने योग्य है कि प्वाइंट 5140 की जीत बिना एक जवान खोए हासिल हुई — यह उपलब्धि सैन्य योजना और निष्पादन की उत्कृष्टता को रेखांकित करती है, जिससे भावी पीढ़ियों को सीखना चाहिए।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गन हिल (प्वाइंट 5140) क्या है और यह कहाँ स्थित है?
गन हिल, जिसे पहले प्वाइंट 5140 कहा जाता था, जम्मू-कश्मीर के द्रास क्षेत्र में द्रास-कारगिल राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 5 किलोमीटर दूर 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक प्रमुख सामरिक चोटी है। 1999 के कारगिल युद्ध में यह दुश्मन का मुख्य निगरानी और रक्षा केंद्र था।
प्वाइंट 5140 पर कब और किसने कब्जा किया था?
13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने 20 जून 1999 की सुबह 5 बजे प्वाइंट 5140 पर भारतीय तिरंगा फहराया। इससे पहले 18 ग्रेनेडियर्स ने 13-14 जून 1999 की रात 'हम्प' क्षेत्र पर कब्जा कर आधार तैयार किया था।
प्वाइंट 5140 का नाम 'गन हिल' कब और क्यों रखा गया?
वर्ष 2023 में प्वाइंट 5140 का नाम आधिकारिक तौर पर 'गन हिल' रखा गया। यह नाम कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोपों और मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सहित भारतीय तोपखाने की निर्णायक और ऐतिहासिक भूमिका को सम्मान देने के लिए दिया गया।
ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ पर गन हिल अभियान में कितने सैनिक शामिल हुए?
इस अभियान में ऑपरेशन विजय 1999 के तोपखाना अभियानों में भाग लेने वाली इकाइयों के 25 सैनिकों के साथ-साथ स्थानीय सैन्य इकाइयों के 101 जवान भी शामिल हुए। पूर्व और वर्तमान सैनिकों की इस संयुक्त भागीदारी ने सेना की परंपरा को जीवंत रखा।
'शत्रुनाश' अभियान क्या था और इसकी भूमिका क्या रही?
'शत्रुनाश' 19-20 जून 1999 की रात प्वाइंट 5140 की अंतिम लड़ाई से पहले चलाया गया व्यापक तोपखाना अभियान था। इसमें बोफोर्स तोपों और मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर ने दोनों दिशाओं से लगातार गोलाबारी कर दुश्मन के तीन बंकर और कई ठिकाने ध्वस्त किए, जिससे पैदल सेना के लिए आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ।
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