पेपर लीक पर विपक्ष का हमला: छात्रों से माफी मांगें PM मोदी और गृह मंत्री, केवल बिल पर्याप्त नहीं
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मॉनसून सत्र में 27 जुलाई को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला — पेपर लीक, छात्र आंदोलन, बिहार में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीति को लेकर एक के बाद एक सवाल दागे गए। समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के सांसदों ने एकजुट होकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
छात्रों से माफी की माँग
सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री देश के छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनका आरोप था कि नई दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ।
सरोज ने कहा कि सरकार केवल संसद में चर्चा करके अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उनके अनुसार प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक रोकने के ठोस उपाय नहीं हैं — उसमें केवल समय-सीमा बढ़ाने और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का उल्लेख है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चर्चा से पहले सरकार को छात्रों से माफी माँगनी चाहिए।
पेपर लीक माफिया पर जवाबदेही का सवाल
सपा सांसद राजीव राय ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या पेपर लीक गिरोह के कथित मास्टरमाइंड पर भी प्रस्तावित कानून लागू होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जो वर्षों से मामलों का सामना कर रहे हैं, वे अब भी ऊँचे पदों पर बने हुए हैं।
राय ने तर्क दिया कि यदि सरकार की नीयत साफ है, तो ऐसे आरोपी व्यक्तियों को पद पर बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में पेपर लीक को लेकर छात्रों में व्यापक आक्रोश है।
उत्तर प्रदेश 2027: सपा का पीडीए फॉर्मूला
सपा सांसद ज़िया-उर-रहमान बर्क ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर कहा कि उनकी पार्टी पूरी मजबूती के साथ सरकार बनाने के लक्ष्य से चुनाव लड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूला आगे भी जारी रहेगा।
गठबंधन में शामिल दलों का फैसला पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव उचित समय पर करेंगे। इसी क्रम में सपा सांसद आनंद भदौरिया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कानून-व्यवस्था संबंधी बयान पर पलटवार करते हुए दावा किया कि 2027 में वंचित, पिछड़े और दलित वर्ग भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से बाहर कर देंगे। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि उत्तर प्रदेश में न कर्फ्यू है, न दंगा — प्रदेश विकास के पथ पर अग्रसर है।
पंजाब में सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज का मामला
पंजाब के बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर कथित लाठीचार्ज का मामला भी संसद के बाहर गूंजा। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने सफाई कर्मचारियों को 'रब दे बंदे' (ईश्वर के लोग) बताते हुए कहा कि मात्र ₹12,000 मासिक वेतन पर काम करने वाले ये कर्मचारी सम्मान के सबसे बड़े हकदार हैं।
वडिंग ने कहा कि उनकी पार्टी पंजाब बंद का समर्थन करती है और जब तक दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होकर उन्हें जेल नहीं भेजा जाता, कांग्रेस संघर्ष जारी रखेगी।
अकाली दल का दोहरा निशाना
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने छात्र मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि केवल कानून और बिल बनाने से ज़मीनी स्तर पर बदलाव नहीं आता। उन्होंने सवाल उठाया कि BJP बार-बार विधेयक तो लाती है, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान नहीं देती।
हरसिमरत कौर ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साधा और कहा कि अरविंद केजरीवाल आंदोलन के दौरान बड़े-बड़े वादे करते थे, लेकिन अब उन्हीं की पार्टी की सरकार में सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज जैसी घटनाएँ हो रही हैं। मॉनसून सत्र में विपक्ष ने इन तमाम मुद्दों पर केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाए रखा — और आने वाले दिनों में यह दबाव और बढ़ने के आसार हैं।