ओवैसी के गठबंधन बयान पर कांग्रेस का इनकार, सुरेंद्र राजपूत बोले — हमारी तरफ से कोई बात नहीं
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026 — ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की ओर से 2 अक्टूबर तक गठबंधन को लेकर दिए गए बयान पर विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनकी तरफ से AIMIM के साथ किसी गठबंधन पर न कोई चर्चा हुई है और न ही कोई बातचीत। समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी सशर्त रुख अपनाते हुए गेंद ओवैसी के पाले में डाल दी है।
कांग्रेस प्रवक्ता का स्पष्ट इनकार
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'हम मीडिया से अपील करते हैं कि वे भ्रम न फैलाएं। हमारी तरफ से गठबंधन की कोई बात नहीं हो रही है।' उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ओवैसी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच 'पर्दे के पीछे' गठबंधन है और किसी के कान पर बंदूक रखकर गठबंधन नहीं बनाया जा सकता। राजपूत ने यह भी कहा कि जिस तरह ओवैसी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की आलोचना करते हैं, उसे देखते हुए गठबंधन की कोई संभावना नहीं है।
इमरान मसूद और आसिम वकार की टिप्पणी
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि भले ही ओवैसी के 5-7 विधायक चुनकर आ जाएं, वे अंततः BJP सरकार का समर्थन करते हैं। उन्होंने बिहार का हवाला देते हुए कहा, 'सरकार तो भाजपा की ही बनी थी।' मसूद ने यह भी जोड़ा कि सिर्फ मुस्लिम वोटों के दम पर न चुनाव जीता जा सकता है और न ही किसी को जिताया जा सकता है।
कांग्रेस नेता आसिम वकार ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1985 में ओवैसी के पिता सलाहुद्दीन ओवैसी सांसद बने थे और तब वे कांग्रेस के साथ थे। उन्होंने मुरादाबाद, भागलपुर और बाबरी मस्जिद के मुद्दों का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि 2014 तक असदुद्दीन ओवैसी भी कांग्रेस के साथ थे।
समाजवादी पार्टी का सशर्त रुख
सपा नेता अशुतोष वर्मा ने कहा कि 2024 का चुनाव सपा और कांग्रेस ने मिलकर लड़ा और BJP को 33 सीटों पर समेट दिया। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी चाहते हैं कि BJP हारे तो उनका स्वागत है, लेकिन पहले उन्हें दक्षिण में BJP सरकार हटाकर दिखानी होगी। सपा नेता उदयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि 'इंडिया' गठबंधन में किसे शामिल करना है, यह गठबंधन के नेता तय करते हैं और सपा का लक्ष्य BJP की 'संविधान विरोधी और लोकतंत्र विरोधी' सरकार को हटाना है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की रणनीतिक तैयारियाँ चल रही हैं। गौरतलब है कि AIMIM ने पिछले चुनावों में अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर उम्मीदवार उतारकर विपक्षी वोटों के विभाजन की आलोचना झेली है। ऐसे में ओवैसी का गठबंधन संबंधी बयान विपक्षी खेमे में बेचैनी का कारण बना है।
आगे की स्थिति
कांग्रेस और सपा के इनकार के बाद अब यह देखना होगा कि 2 अक्टूबर की ओवैसी की निर्धारित समयसीमा तक AIMIM किस दिशा में आगे बढ़ता है। विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन वार्ता की संभावना फिलहाल बेहद कम नज़र आती है।