पाकिस्तान में 125 साल पुराना मंदिर ध्वस्त, वीएचपी ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 1 सितंबर को पाकिस्तान में 125 वर्ष पुराने मंदिर को गिराए जाने की घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। बंसल ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों को कट्टरपंथी तत्वों के निशाने पर होने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं, और यह घटना उसी चिंताजनक प्रवृत्ति की एक और कड़ी है।
मंदिर ध्वंस पर वीएचपी की प्रतिक्रिया
बंसल ने कहा कि यदि किसी संगठन या कट्टरपंथी समूह द्वारा मंदिर को निशाना बनाया गया है और इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होती, तो इससे पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू आबादी में लगातार गिरावट और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की खबरें वैश्विक चिंता का विषय हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की।
बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता
बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित हमलों और उनके लापता होने की खबरों पर भी बंसल ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना वहाँ की सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बंसल ने बांग्लादेश सरकार से हिंदुओं के विरुद्ध हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष जाँच कराने और लापता लोगों को उनके परिजनों तक सुरक्षित पहुँचाने की माँग की।
कर्नाटक मंत्री और केरल ग्रैंड मुफ्ती के बयानों पर आपत्ति
वीएचपी प्रवक्ता ने कर्नाटक के एक मंत्री द्वारा इस्लाम को 'सबसे अच्छा धर्म' बताए जाने और हज यात्रा की इच्छा जताने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। बंसल ने कहा कि किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत रूप से किसी भी धर्म में आस्था रखना उसका अधिकार है, किंतु संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री से सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से ऐसे बयान देने वाले मंत्री की जवाबदेही तय करने की माँग की और इसे पार्टी की कथित 'तुष्टिकरण की राजनीति' से जोड़ा।
केरल के ग्रैंड मुफ्ती द्वारा महिलाओं को 'आभूषण' की तरह बताने और उन्हें घर की चारदीवारी में रखने संबंधी कथित बयान पर भी बंसल ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से दूर रखने की सोच आधुनिक लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के सर्वथा विपरीत है। बंसल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से इस कथित बयान पर अपनी स्पष्ट राय सार्वजनिक करने की माँग की।
मौलाना मदनी के बयान पर वीएचपी का रुख
बंसल ने मौलाना मदनी के बयान पर कहा कि उन्हें बोलने से पहले यह विचार करना चाहिए कि उनके शब्द मुस्लिम समाज और देश को किस दिशा में ले जाएँगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज को केवल उन लोगों से नहीं आँका जाना चाहिए जो आतंकवाद या हिंसा से जुड़े हैं — बड़ी संख्या में मुसलमान देशभक्त नागरिक के रूप में सामान्य जीवन जी रहे हैं। बंसल ने कहा कि मुस्लिम समाज को ऐसे विचारों से दूरी बनानी चाहिए जो पूरे समुदाय को एक ही कटघरे में खड़ा करते हों।
राष्ट्रीय एकता और 'सिलेक्टिव सेक्युलरिज्म' पर सवाल
बंसल ने 'वंदे मातरम' और 'भारत माता की जय' जैसे राष्ट्रीय नारों के विरोध पर भी आपत्ति जताई और इसे राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक बताया। उन्होंने कांग्रेस पर 'सिलेक्टिव सेक्युलरिज्म' का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि किसी एक धर्म से जुड़े बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी जाती है, तो समान मानदंड सभी धर्मों के लिए लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भारतीय महिलाएँ शिक्षा, प्रशासन, सेना, विज्ञान, खेल और अंतरिक्ष — हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं; ऐसे में महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से दूर रखने की सोच पर सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। आने वाले दिनों में वीएचपी इस मुद्दे पर अपना अभियान जारी रखने का संकेत दे चुकी है।