पाकिस्तान में गुरुद्वारों की बदहाली: विदेशों में विरासत संरक्षण के दावों पर उठे गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में सिख धार्मिक विरासत की वास्तविक स्थिति और इस्लामाबाद के उन दावों के बीच गहरी खाई उजागर हो रही है, जो वह विदेशों में सिख समुदाय के सामने पेश करता है। खालसा वॉक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे दशकों से उपेक्षा, जर्जर हालत और अतिक्रमण का शिकार हैं — जबकि पाकिस्तानी अधिकारी अमेरिका और अन्य देशों में सिख प्रवासी समुदाय को धार्मिक पर्यटन और विरासत जीर्णोद्धार के बड़े वादे सुना रहे हैं।
विदेशों में अभियान, देश में उपेक्षा
सोशल मीडिया पर सामने आई खबरों के अनुसार, पंजाब प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा ने हाल ही में अमेरिका में कई गुरुद्वारों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रवासी सिख समुदाय से 'अडॉप्ट ए गुरुद्वारा' पहल के अंतर्गत विरासत संरक्षण में भागीदारी की अपील की और नवंबर में आयोजित होने वाले गुरुपर्व समारोहों के लिए न्योता दिया। उन्होंने वीज़ा प्रक्रिया सरल बनाने का आश्वासन भी दिया।
हालांकि, सोशल मीडिया पर साझा की गई कुछ पोस्ट में आरोप लगाया गया कि अमेरिका की गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से नकद राशि और कैशियर चेक भी लिए गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
आर्थिक गलियारे का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब पुरातत्व महानिदेशालय से कथित तौर पर जुड़े अंजुम जावेद ने कैलिफोर्निया के लैथ्रोप में आयोजित 'द सिख किंगडम' कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने ननकाना साहिब से खैबर दर्रे तक एक आर्थिक गलियारा विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें जमरूद किले और बाबा फूला सिंह छावनी के पुनर्विकास की योजना भी शामिल है।
उन्होंने कथित तौर पर दावा किया कि विरासत विकास परियोजनाओं के लिए करीब 70 करोड़ डॉलर जुटाए गए हैं, जिनमें विश्व बैंक से प्राप्त 9.4 करोड़ डॉलर भी शामिल हैं। इस परियोजना के ज़रिए प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में सिख पर्यटकों को पाकिस्तान लाने की योजना बताई गई।
ज़मीनी हकीकत: फर्रुखाबाद में 125 साल पुराना गुरुद्वारा ध्वस्त
पाकिस्तान में सिख विरासत की उपेक्षा का सबसे ताज़ा और दर्दनाक उदाहरण जुलाई 2026 में सामने आया, जब पंजाब प्रांत के फर्रुखाबाद में 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को ध्वस्त कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, एक स्थानीय कारोबारी ने कथित तौर पर बिना कानूनी अनुमति और अदालत के आदेश के इस ऐतिहासिक इमारत को मशीनों से तुड़वाया।
खालसा वॉक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 जून की रात फर्रुखाबाद के सिख समुदाय के लिए अत्यंत पीड़ादायक रही। यह गुरुद्वारा सिंह सभा आंदोलन के दौर में स्थापित हुआ था और कई पीढ़ियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा था। ध्वस्तीकरण के बाद स्थानीय सिख समुदाय ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद ही संबंधित अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया।
प्रशासनिक विफलता पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित विभाग के एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि स्थानीय सिखों के विरोध प्रदर्शन से पहले विभाग ने इस ध्वस्तीकरण पर ध्यान नहीं दिया था। यह स्वीकारोक्ति इस गंभीर प्रश्न को जन्म देती है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की विरासत सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि पाकिस्तान में गुरुद्वारों की बदहाली कोई इकलौती घटना नहीं है — कई धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण हो चुका है, कुछ का उपयोग अन्य प्रयोजनों के लिए किया जा रहा है, और सिख समुदाय के विरुद्ध हमले व धार्मिक भेदभाव की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
विश्वसनीयता का संकट
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से अमेरिका में सिख समुदाय तक पहुँच बनाने की कोशिशों और देश के भीतर सिख धार्मिक स्थलों की वास्तविक स्थिति के बीच का यह अंतर्विरोध पाकिस्तान के पूरे विरासत-संरक्षण अभियान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में सिख प्रवासी समुदाय पाकिस्तान में अपने पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर सतर्क नज़र रख रहा है।