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जम्मू-कश्मीर का इस्लामीकरण पाकिस्तान का पुराना एजेंडा: पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य

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जम्मू-कश्मीर का इस्लामीकरण पाकिस्तान का पुराना एजेंडा: पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य

सारांश

पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने एक साथ कई संवेदनशील मुद्दों पर बेबाकी से बात की — पाकिस्तान का जम्मू-कश्मीर में इस्लामीकरण का एजेंडा, 36 साल पुराने सर्वानंद प्रेमी हत्याकांड में न्याय की उम्मीद, जनसांख्यिकीय बदलाव पर केंद्रीय आयोग का अध्ययन और जेलों में वीआईपी संस्कृति पर सख्त आपत्ति।

मुख्य बातें

पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का इस्लामीकरण पाकिस्तान का दशकों पुराना एजेंडा है।
सर्वानंद प्रेमी हत्याकांड में 36 साल बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग समेत कई इलाकों में छापेमारी की।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के जनसांख्यिकीय आयोग ने जम्मू में डेमोग्राफिक बदलाव के अध्ययन के लिए दौरा किया।
वैद्य ने कहा कि कश्मीरी पंडित, शिक्षक और मजदूर आतंकी संगठनों के सॉफ्ट टारगेट बने हुए हैं।
प्रज्वल रेवन्ना के जेल में मोबाइल इस्तेमाल पर वैद्य ने वीआईपी संस्कृति की आलोचना करते हुए केंद्रीय जेल समीक्षा की माँग की।

पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद्य ने 12 अगस्त को श्रीनगर में कहा कि जम्मू-कश्मीर का इस्लामीकरण पाकिस्तान का दशकों पुराना एजेंडा है, और इसी के तहत कश्मीरी पंडितों को बार-बार निशाना बनाया जाता रहा है। उन्होंने सर्वानंद प्रेमी हत्याकांड, जनसांख्यिकीय बदलाव पर केंद्रीय आयोग के दौरे और जेलों में वीआईपी संस्कृति समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी।

सर्वानंद प्रेमी हत्याकांड: देर से ही सही, न्याय की उम्मीद

सर्वानंद प्रेमी हत्याकांड पर वैद्य ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले को अपने हाथ में लिया है और अनंतनाग समेत कई इलाकों में छापेमारी की गई है। उनके अनुसार, यह कदम महत्वपूर्ण है और अधिकारियों को एक-एक कर पूरे मामले की परतें खोलनी चाहिए।

उन्होंने स्वीकार किया कि इस मामले में 36 वर्ष बीत चुके हैं — जो एक बहुत लंबा अंतराल है। उन्होंने कहा, 'अब इस मामले में कई गवाह जिंदा भी होंगे या नहीं, इसकी कोई निश्चित जानकारी नहीं है। इसके बावजूद जो किया जा सकता है, वो किया जाना चाहिए। अगर पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो निश्चित रूप से चालान होना चाहिए।' गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में एसआईटी गठित करने से पहले ही इनकार कर चुका है।

पाकिस्तान का एजेंडा और कश्मीरी पंडितों पर खतरा

वैद्य ने कहा कि पाकिस्तान का यह पुराना मंसूबा रहा है कि किसी भी तरह जम्मू-कश्मीर का इस्लामीकरण किया जाए। उनके अनुसार, 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों का कत्लेआम और बड़े पैमाने पर विस्थापन इसी सोच का नतीजा था।

उन्होंने कहा कि आज भी कश्मीरी पंडित — विशेषकर वे जो प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत कार्यरत हैं या जिन्होंने सरकारी कार्यक्रमों में योगदान दिया है — सॉफ्ट टारगेट बने हुए हैं। उनके अनुसार, शिक्षक, मजदूर और बाहरी लोग भी इन हमलों की जद में आते हैं। वैद्य ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति बिगड़ने के कारण वह अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचने के लिए ऐसे हमलों को हवा देता है, क्योंकि सेना पर सीधा हमला उसके लिए संभव नहीं।

जनसांख्यिकीय आयोग का दौरा और बदलती डेमोग्राफी

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित जनसांख्यिकीय आयोग के दौरे पर वैद्य ने कहा कि यह आयोग उन इलाकों का विशेष अध्ययन कर रहा है जहाँ जनसंख्या संरचना में बदलाव दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू में जिन लोगों से आयोग मिला, उन्होंने तथ्यों और आँकड़ों के साथ विस्तृत जानकारी दी होगी।

उनके अनुसार, बांग्लादेश और नेपाल से लगी सीमाओं पर भी जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिशें हुई हैं। वैद्य ने कहा कि यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं — यूरोप में भी इसी तरह की स्थिति देखी जा रही है। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और देश को बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठ से बचाया जाए।

जेलों में वीआईपी संस्कृति पर चिंता

प्रज्वल रेवन्ना द्वारा जेल के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल के मामले पर वैद्य ने कहा कि यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश की जेलों में कुछ कैदियों को वीआईपी सुविधाएँ मिलती हैं।

उनके अनुसार, जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं, सफाई की स्थिति खराब है और राज्य सरकारें इन मुद्दों को अनदेखा करती हैं। वैद्य ने माँग की कि जेल प्रशासन में केंद्रीय समीक्षा हो, उचित प्रशिक्षण दिया जाए और नियुक्तियाँ सरकारी स्तर पर हों — ताकि नियमों के अनुसार किसी को भी, चाहे वह कोई भी हो, विशेष सुविधा न मिले।

आगे क्या

जनसांख्यिकीय आयोग के अध्ययन पूरा होने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर नीतिगत कदम उठाए जाने की उम्मीद है। सर्वानंद प्रेमी मामले में पुलिस की सक्रियता से पीड़ित परिवारों को न्याय की आस जगी है, हालाँकि दशकों की देरी इस प्रक्रिया को जटिल बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह अभी अनिश्चित है। जनसांख्यिकीय आयोग का गठन नीतिगत दिशा का संकेत देता है, पर बिना पारदर्शी पद्धति और सार्वजनिक रिपोर्ट के, इसके निष्कर्षों की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। जेल सुधार पर वैद्य की माँग सर्वदलीय सहमति का विषय है, फिर भी यह मुद्दा बार-बार उठने के बावजूद ठोस बदलाव से दूर रहा है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने पाकिस्तान के एजेंडे पर क्या कहा?
वैद्य के अनुसार, पाकिस्तान का यह पुराना एजेंडा है कि किसी भी तरह जम्मू-कश्मीर का इस्लामीकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों का कत्लेआम और विस्थापन इसी सोच का परिणाम था, और आज भी कश्मीरी पंडित व अन्य कमजोर तबके सॉफ्ट टारगेट बने हुए हैं।
सर्वानंद प्रेमी हत्याकांड में अब तक क्या हुआ है?
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले को अपने हाथ में लेकर अनंतनाग समेत कई इलाकों में छापेमारी की है। यह मामला लगभग 36 साल पुराना है और सर्वोच्च न्यायालय एसआईटी गठन से इनकार कर चुका है, फिर भी वैद्य ने कहा कि पर्याप्त सबूत मिलने पर चालान होना चाहिए।
केंद्रीय जनसांख्यिकीय आयोग का दौरा किस उद्देश्य से हुआ?
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित यह आयोग उन इलाकों का अध्ययन कर रहा है जहाँ जनसंख्या संरचना में बदलाव दर्ज किए गए हैं। अध्ययन पूरा होने के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर नीतिगत कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
प्रज्वल रेवन्ना के जेल में मोबाइल इस्तेमाल पर वैद्य का क्या कहना है?
वैद्य ने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और कहा कि यह समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश की जेलों में वीआईपी संस्कृति मौजूद है। उन्होंने केंद्रीय जेल समीक्षा और नियमों के समान पालन की माँग की।
कश्मीरी पंडितों को किन लोगों से सबसे अधिक खतरा है?
वैद्य के अनुसार, विशेष रूप से वे कश्मीरी पंडित जो प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत काम कर रहे हैं या जिन्होंने सरकारी कार्यक्रमों में योगदान दिया है, आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं। शिक्षक, मजदूर और बाहरी लोग भी इस खतरे की जद में आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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