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पेपर लीक पर पीडीपी प्रवक्ता जुहैब यूसुफ मीर: परीक्षा निजी हाथों में देना खतरनाक, युवाओं का भविष्य दाँव पर

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पेपर लीक पर पीडीपी प्रवक्ता जुहैब यूसुफ मीर: परीक्षा निजी हाथों में देना खतरनाक, युवाओं का भविष्य दाँव पर

सारांश

नीट पेपर लीक विवाद के बीच पीडीपी प्रवक्ता जुहैब यूसुफ मीर ने श्रीनगर से तीखा सवाल दागा — परीक्षाएँ निजी हाथों में क्यों? वायुसेना के विमानों से पेपर भेजने की ज़रूरत ही बताती है कि सिस्टम में भरोसा टूट चुका है और लाखों युवाओं का भविष्य दाँव पर है।

मुख्य बातें

पीडीपी प्रवक्ता जुहैब यूसुफ मीर ने 30 मई 2026 को श्रीनगर में कहा कि नीट रीटेस्ट के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों से पेपर भेजना परीक्षा तंत्र की विफलता का प्रमाण है।
मीर ने चेताया कि परीक्षाएँ निजी कंपनियों को सौंपने से भ्रष्टाचार और पेपर लीक की आशंका बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि स्नातक छात्रों में स्किल गैप के कारण बड़ी संख्या में युवा रोज़गार पाने में असमर्थ हैं।
मीर के अनुसार, भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कमज़ोर है और देश सीधे कृषि से सेवा क्षेत्र में चला गया, जिससे रोज़गार के अवसर घटे।
BJP पर आरोप लगाया कि वह टीवी डिबेट्स में गैर-ज़रूरी मुद्दों में उलझाकर असली समस्याओं से ध्यान भटका रही है।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के प्रवक्ता जुहैब यूसुफ मीर ने 30 मई 2026 को श्रीनगर में कहा कि नीट रीटेस्ट के लिए प्रश्नपत्र भारतीय वायुसेना के विमानों से भेजने की नौबत आना यह साबित करता है कि देश की परीक्षा प्रणाली में गहरी खामियाँ हैं और सरकारी तंत्र पर भरोसे की कमी है। उनका यह बयान नीट पेपर लीक विवाद के बीच आया है, जिसने पूरे देश में छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश पैदा किया है।

निजीकरण पर चिंता

मीर ने कहा कि देश में धीरे-धीरे परीक्षाओं का संचालन निजी कंपनियों और एजेंसियों को सौंपा जा रहा है, जो एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। उनके अनुसार, जब परीक्षा की ज़िम्मेदारी निजी हाथों में जाती है तो भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी समस्याएँ उभरती हैं, क्योंकि इन संस्थाओं पर पर्याप्त सरकारी नियंत्रण नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे सरकारी संस्थान हों या निजी एजेंसियाँ — दोनों में खामियाँ देखी जा रही हैं, और परीक्षा की पवित्रता दोनों मोर्चों पर खतरे में है।

छात्रों के भविष्य पर सीधा असर

पीडीपी प्रवक्ता ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएँ लाखों छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और मज़बूत ढाँचे के अंतर्गत संचालित होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की धाँधली की गुंजाइश न रहे। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं।

बेरोज़गारी और स्किल गैप की समस्या

मीर ने देश की युवा आबादी — जिसे डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा जाता है — की स्थिति पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में छात्र स्नातक तो हो रहे हैं, लेकिन उनके पास उद्योग की ज़रूरत के अनुसार कौशल नहीं है, जिससे वे रोज़गार पाने में असमर्थ हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में स्किल डेवलपमेंट और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा जितना ज़रूरी है।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कमज़ोरी

पीडीपी प्रवक्ता ने कहा कि भारत सीधे कृषि से सेवा क्षेत्र की ओर बढ़ गया है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का 'मिडिल लेयर' कमज़ोर रह गया है। उनके अनुसार, यदि उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत किया जाए तो रोज़गार के अवसर बढ़ सकते हैं और युवाओं को बेहतर भविष्य मिल सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में बेरोज़गारी दर को लेकर विभिन्न अर्थशास्त्री और विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं।

सरकार पर आरोप

मीर ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं के प्रति पर्याप्त रूप से संवेदनशील नहीं है। उन्होंने कहा कि टीवी डिबेट्स में जानवरों और 'राष्ट्रीय पशु' जैसे विषयों पर बहस हो रही है, जबकि अर्थव्यवस्था की स्थिति गंभीर है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) असली मुद्दों — रोज़गार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली — से ध्यान हटाने में लगी है। उन्होंने सरकार से माँग की कि वह कौशल-आधारित प्रशिक्षण पर ध्यान दे ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विपक्ष इन मुद्दों पर व्यावहारिक विकल्प सुझाने की बजाय सरकार पर हमले तक सीमित रहता है। असली ज़िम्मेदारी यह है कि पेपर लीक रोकने के लिए स्वतंत्र ऑडिट तंत्र और परीक्षा एजेंसियों की सार्वजनिक जवाबदेही तय हो — जो न तो सरकार ने अब तक की है और न विपक्ष ने ठोस रूप से माँगी है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीडीपी प्रवक्ता जुहैब यूसुफ मीर ने नीट पेपर लीक पर क्या कहा?
मीर ने कहा कि नीट रीटेस्ट के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों से पेपर भेजने की ज़रूरत यह साबित करती है कि परीक्षा तंत्र में गहरी खामियाँ हैं और भरोसे की भारी कमी है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और मज़बूत ढाँचे के तहत चलाने की माँग की।
परीक्षाओं का निजीकरण क्यों चिंताजनक है?
मीर के अनुसार, जब परीक्षा संचालन निजी कंपनियों को सौंपा जाता है तो उन पर पर्याप्त सरकारी नियंत्रण नहीं होता, जिससे भ्रष्टाचार और पेपर लीक की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी — दोनों संस्थाओं में खामियाँ देखी जा रही हैं।
भारत में युवा बेरोज़गारी के पीछे मीर ने क्या कारण बताए?
मीर ने कहा कि स्नातक छात्रों में उद्योग की ज़रूरत के अनुसार कौशल की कमी है, जिससे वे रोज़गार पाने में असमर्थ हो रहे हैं। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कमज़ोर होने और देश के सीधे कृषि से सेवा क्षेत्र में जाने से रोज़गार के मध्यवर्ती अवसर घटे हैं।
मीर ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
मीर ने आरोप लगाया कि BJP टीवी डिबेट्स में जानवरों और 'राष्ट्रीय पशु' जैसे गैर-ज़रूरी विषयों पर बहस करवाकर रोज़गार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है। उन्होंने कहा कि इस बीच अर्थव्यवस्था की स्थिति गंभीर होती जा रही है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मज़बूत करने से युवाओं को कैसे फायदा होगा?
मीर के अनुसार, यदि मैन्युफैक्चरिंग और उद्योग क्षेत्र को मज़बूत किया जाए तो रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे और युवा आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने सरकार से स्किल डेवलपमेंट और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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