खड़गे बोलते रहे, पटना के बापू सभागार में सीटें रहीं खाली; कांग्रेस कार्यक्रम में भीड़ न आना चर्चा में
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 25 अक्टूबर 2026 को पटना के बापू सभागार में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम को संबोधित किया। हालाँकि, कार्यक्रम के दौरान सामने आए वीडियो और तस्वीरों में सभागार की बड़ी संख्या में सीटें खाली नज़र आईं, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ को लेकर सवाल उठने लगे।
कार्यक्रम का स्वरूप और भीड़ का हाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ मुख्य रूप से मंच और सामने की कुछ पंक्तियों तक ही सीमित रही। बताया जा रहा है कि खड़गे के संबोधन से पहले ही कई कांग्रेसी कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल छोड़कर जा चुके थे। भाषण के दौरान भी कई समर्थक और कार्यकर्ता सभागार से बाहर निकलते दिखे, और एक समय ऐसा आया जब मंच पर नेताओं की मौजूदगी के बावजूद हॉल का बड़ा हिस्सा खाली पड़ा था।
खड़गे का संबोधन — मुद्दे और मांगें
खड़गे ने अपने भाषण में चुनाव प्रणाली, ईवीएम, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा समेत कई मुद्दों पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने देश में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग एक बार फिर दोहराई और पिछले वर्षों में हुई चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
इसके साथ ही खड़गे ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को आधुनिक बिहार के निर्माण का प्रमुख शिल्पकार बताया। उन्होंने कहा कि बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री ने जमींदारी उन्मूलन, भूमि सुधार, शिक्षा, सिंचाई और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाए, और छुआछूत के विरुद्ध अभियान में भी अग्रणी भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में हंगामा — युवक ने किया हस्तक्षेप
कार्यक्रम के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया जब खड़गे के संबोधन के बीच एक युवक ने हस्तक्षेप कर दिया। युवक कथित तौर पर खुद को कांग्रेस समर्थक बता रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उसने यह कहने की कोशिश की कि इस तरह की राजनीतिक लड़ाई से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता से नहीं जाने वाले।
इसके बाद मंच के सामने माहौल गरमा गया और कुछ कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर युवक के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की। घटना के बाद कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर सभी दलों की सक्रियता बढ़ी हुई है। कांग्रेस के लिए बिहार एक चुनौतीपूर्ण मैदान रहा है, जहाँ पार्टी की जमीनी उपस्थिति लंबे समय से कमज़ोर मानी जाती है। गौरतलब है कि खड़गे की अध्यक्षता में पार्टी ने राज्य-स्तरीय संगठन को मज़बूत करने के प्रयास किए हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में दिखी खाली सीटें उन प्रयासों की सीमाओं की ओर इशारा करती हैं।
आगे क्या
कांग्रेस की ओर से अभी तक कार्यक्रम में कम उपस्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हंगामे में शामिल युवक के बारे में भी पार्टी की तरफ से स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। आने वाले दिनों में यह घटना बिहार में कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति पर बहस को और तेज़ कर सकती है।