बिहार कैबिनेट विस्तार 7 मई को: चिराग पासवान बोले — पिछली सरकार का फॉर्मूला ही रहेगा आधार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने मंगलवार, 5 मई को स्पष्ट किया कि बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में होने वाले कैबिनेट विस्तार का आधार पिछली सरकार का वही फॉर्मूला होगा जिसमें एनडीए के घटक दलों के बीच पदों का संतुलित बंटवारा किया गया था। शपथ ग्रहण समारोह 7 मई को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित होगा और इसकी तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार पर चिराग पासवान का बयान
मीडिया से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा, ''पिछली सरकार में जो फॉर्मूला था, उसमें बदलाव के कोई कारण दिखाई नहीं देते हैं। पिछली बार जिस तरीके से मंत्रिमंडल बना था, वह होगा।'' उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) के कोटे से कुछ मंत्रियों के शपथ लेना पिछली बार बाकी रह गया था और संभवतः इस बार वह पूरा कर लिया जाएगा।
पिछली सरकार में क्या था गणित
पृष्ठभूमि के रूप में यह जानना ज़रूरी है कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जब सम्राट चौधरी ने शपथ ली, तब जदयू कोटे से दो उप मुख्यमंत्री बनाए गए थे। पिछली सरकार में BJP के दो उप मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री थे, जबकि जदयू के खाते में मुख्यमंत्री सहित 9 मंत्री थे। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) के 2 और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के एक-एक मंत्री शामिल थे।
नए चेहरों को मिलेगा मौका
सूत्रों के अनुसार, BJP, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो के बीच पदों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है। हालाँकि इस बार कई पुराने नामों की जगह नए चेहरों को मौका मिलना निश्चित माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं और एनडीए अपनी गठबंधन राजनीति को और मज़बूत करना चाहता है।
पश्चिम बंगाल का भी ज़िक्र
चिराग पासवान ने यह भी कहा कि बिहार में नए मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने के बाद पश्चिम बंगाल में भी नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी की जाएगी। गौरतलब है कि गांधी मैदान में आयोजित होने वाला यह समारोह राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है, क्योंकि इसमें एनडीए की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश होगी।
आगे क्या होगा
राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम जनता की निगाहें 7 मई के शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं। मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नामों की आधिकारिक घोषणा समारोह से कुछ घंटे पहले होने की उम्मीद है। यह विस्तार बिहार की गठबंधन राजनीति की दिशा और आने वाले चुनावों के लिए एनडीए की रणनीति का अहम संकेत होगा।