सुप्रीम कोर्ट में PIL: स्कूल-अस्पताल समेत सार्वजनिक इमारतों के लिए राष्ट्रीय फायर सेफ्टी फ्रेमवर्क की माँग
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में 26 जून 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें देशभर के उच्च-जोखिम वाले सार्वजनिक स्थलों — जैसे स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और कमर्शियल बिल्डिंग — के लिए एक समान 'राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन सुरक्षा ढाँचा' (National Minimum Fire and Life-Safety Framework) बनाने और लागू करने के निर्देश देने की माँग की गई है। यह याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने अपनी ओर से दायर की है।
याचिका में क्या माँगा गया है
PIL में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की माँग की गई है कि वे सार्वजनिक इमारतों के लिए एक समान न्यूनतम अग्नि एवं जीवन-सुरक्षा मानक तय करें — चाहे अलग-अलग राज्यों में मौजूदा नियम-कानून कैसे भी हों। प्रस्तावित ढाँचे में स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल, गेस्ट हाउस, मनोरंजन स्थल, कमर्शियल बिल्डिंग और सार्वजनिक आवाजाही वाले अन्य स्थल शामिल किए जाने की बात कही गई है।
याचिका में फायर सेफ्टी नियमों के अनुपालन की निगरानी, नियमित निरीक्षण, आपातकालीन निकासी योजना और उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों तथा भवन-स्वामियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी तंत्र बनाने की माँग भी की गई है।
मौजूदा व्यवस्था की खामियाँ
याचिका में कहा गया है कि अग्नि सुरक्षा से जुड़े मौजूदा नियम विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में असमान और बिखरे हुए हैं। इससे मानकों में अंतर आता है और नियमों को लागू करने में कमियाँ रह जाती हैं, जिससे जन-सुरक्षा को निरंतर खतरा बना रहता है। याचिका में स्पष्ट कहा गया है, 'भयानक आग की घटनाओं का बार-बार होना सिस्टम की नियामक विफलता, बिखरे हुए कानूनी मानकों और नियमों को लागू करने के अपर्याप्त तरीकों को दिखाता है, जिससे लोगों की सुरक्षा को लगातार खतरा बना रहता है।'
गौरतलब है कि नेशनल बिल्डिंग कोड, मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज़, NDMA दिशानिर्देश और मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 जैसे दस्तावेज़ पहले से मौजूद हैं, फिर भी ज़मीनी स्तर पर एकरूप क्रियान्वयन नहीं हो पाया है।
जिन बड़ी घटनाओं का हवाला दिया गया
याचिका में देश की कई बड़ी अग्निकांड त्रासदियों का उल्लेख किया गया है, जो इस माँग की पृष्ठभूमि बनती हैं। इनमें उपहार सिनेमा अग्निकांड, AMRI अस्पताल अग्निकांड, सूरत के तक्षशिला आर्केड कोचिंग सेंटर अग्निकांड, अनाज मंडी अग्निकांड, राजकोट TRP गेम ज़ोन अग्निकांड के साथ-साथ हाल की दिल्ली के मालवीय नगर गेस्ट हाउस और लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर में लगी आग शामिल हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब कई कानूनी प्रावधान और न्यायालयी निर्देश पहले से विद्यमान हैं, फिर भी बार-बार होने वाली घटनाएँ प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करती हैं।
संवैधानिक आधार और पूर्व न्यायिक संदर्भ
PIL में तर्क दिया गया है कि यह मामला अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी का सवाल उठाता है। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों — जिनमें 'अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत संघ' (स्कूलों में अग्नि सुरक्षा) और अस्पतालों में आग की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान कार्यवाही शामिल है — का भी सहारा लिया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
याचिकाकर्ता के अनुसार, 24 जून को केंद्र और राज्य अधिकारियों को एक आवेदन दिया गया था, जिसमें राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन-सुरक्षा ढाँचा बनाने की माँग की गई थी, परंतु कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई करेगा और केंद्र व राज्य सरकारों का पक्ष जानेगा। यदि न्यायालय इसे स्वीकार करता है, तो यह देश में अग्नि सुरक्षा विनियमन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम हो सकता है।