25 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड हाईकोर्ट का यौन हिंसा पर बड़ा फैसला: जीरो एफआईआर से पुनर्वास तक 19 निर्देश जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड हाईकोर्ट का यौन हिंसा पर बड़ा फैसला: जीरो एफआईआर से पुनर्वास तक 19 निर्देश जारी

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने यौन हिंसा पीड़ितों के लिए एक व्यापक न्यायिक ढाँचा तैयार किया है — जीरो एफआईआर से लेकर पुनर्वास तक 19 निर्देश। टू फिंगर टेस्ट पर पूर्ण प्रतिबंध और हेल्पलाइन को आपातकालीन सेवा से जोड़ने का आदेश इस फैसले को राज्य में महिला सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम बनाता है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 9 जून 2026 को यौन हिंसा पीड़ितों के लिए 19 निर्देश जारी किए।
सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान मामले में यह आदेश पारित किया।
डीजीपी को बीएनएसएस, 2023 के तहत सभी यौन अपराध मामलों में जीरो एफआईआर अनिवार्य रूप से दर्ज करने का निर्देश।
सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में विवादित टू फिंगर टेस्ट पर पूर्ण प्रतिबंध; उल्लंघन को पेशेवर कदाचार माना जाएगा।
महिला हेल्पलाइन 181 को आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ने पर विचार करने का आदेश।
वन स्टॉप सेंटरों की निगरानी के लिए महिलाओं की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्देश।

झारखंड हाईकोर्ट ने 9 जून 2026 को यौन हिंसा और दुष्कर्म पीड़ितों के संरक्षण, त्वरित न्याय और पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार व पुलिस प्रशासन को 19 महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है।

मुख्य घटनाक्रम

चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान ये निर्देश पारित किए। मामले में अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया एमिकस क्यूरी के रूप में उपस्थित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की रिपोर्टिंग को लेकर व्यवस्थागत खामियों पर सवाल उठते रहे हैं।

पुलिस को निर्देश

हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया कि यौन अपराध के सभी मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत जीरो एफआईआर अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए। शिकायत दर्ज करने में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी आदेश दिया गया है। साथ ही पुलिसकर्मियों को ऐसे संवेदनशील मामलों में व्यवहार और प्रक्रिया को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने को कहा गया है।

वन स्टॉप सेंटर और चिकित्सा सुधार

अदालत ने महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को राज्य के सभी वन स्टॉप सेंटरों की कमियाँ दूर कर सुविधाएँ बेहतर बनाने का निर्देश दिया। इन केंद्रों की निगरानी के लिए महिलाओं की अध्यक्षता में समिति गठित करने और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई का भी आदेश है। खंडपीठ ने सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में दुष्कर्म पीड़िताओं की जाँच के दौरान विवादित 'टू फिंगर टेस्ट' पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया और कहा कि इसका उल्लंघन पेशेवर कदाचार माना जाएगा।

जागरूकता, आत्मरक्षा और पुनर्वास

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दूरदराज के इलाकों की लड़कियों के बीच कानूनी जागरूकता बढ़ाने तथा स्कूलों, कॉलेजों और गाँवों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण शुरू करने का निर्देश दिया। आवश्यकता पड़ने पर पीड़िता और उसके परिवार के समुचित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। गौरतलब है कि पुनर्वास की यह माँग लंबे समय से महिला अधिकार संगठनों की प्राथमिकता रही है।

हेल्पलाइन को आपातकालीन सेवा से जोड़ने का निर्देश

अदालत ने महिला हेल्पलाइन 181 को अधिक प्रभावी बनाने और इसे आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ने की संभावना पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया। अदालत का मानना है कि इस एकीकरण से संकट की स्थिति में महिलाओं को त्वरित सहायता मिल सकेगी। इन निर्देशों के अनुपालन की समयसीमा और अगली सुनवाई की तारीख आगामी आदेश में निर्धारित की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अनुपालन की होगी — राज्य में वन स्टॉप सेंटरों की जर्जर स्थिति और जीरो एफआईआर के बावजूद शिकायत दर्ज न होने की शिकायतें पहले से दर्ज हैं। टू फिंगर टेस्ट पर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही रोक लगा चुका है, फिर भी राज्यों में इसका चलन बंद नहीं हुआ — यह दर्शाता है कि न्यायिक आदेश बिना प्रशासनिक जवाबदेही के निष्प्रभावी रहते हैं। हेल्पलाइन 181 को 112 से जोड़ने का विचार सराहनीय है, किंतु ग्रामीण झारखंड में नेटवर्क और जनशक्ति की कमी एक बड़ी बाधा है। इन निर्देशों की अनुपालन रिपोर्ट और समयसीमा तय किए बिना यह फैसला केवल एक और न्यायिक दस्तावेज़ बनकर रह सकता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने यौन हिंसा पर कौन से 19 निर्देश जारी किए हैं?
झारखंड हाईकोर्ट ने 9 जून 2026 को जीरो एफआईआर की अनिवार्यता, टू फिंगर टेस्ट पर प्रतिबंध, वन स्टॉप सेंटरों में सुधार, महिला हेल्पलाइन को आपातकालीन सेवा से जोड़ने और पीड़िताओं के पुनर्वास सहित 19 निर्देश जारी किए। ये निर्देश राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सभी पर लागू होते हैं।
जीरो एफआईआर क्या है और इसे अनिवार्य क्यों किया गया?
जीरो एफआईआर वह प्रावधान है जिसके तहत यौन अपराध की शिकायत किसी भी थाने में दर्ज की जा सकती है, चाहे घटना उस थाना क्षेत्र में हुई हो या नहीं। हाईकोर्ट ने इसे बीएनएसएस, 2023 के तहत अनिवार्य करते हुए कहा कि शिकायत दर्ज न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, ताकि पीड़िता को न्याय में देरी न हो।
टू फिंगर टेस्ट पर प्रतिबंध का क्या अर्थ है?
टू फिंगर टेस्ट एक विवादित चिकित्सा जाँच पद्धति है जिसे वैज्ञानिक और न्यायिक दृष्टि से अमान्य माना जा चुका है। झारखंड हाईकोर्ट ने सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए कहा कि इसका उल्लंघन पेशेवर कदाचार की श्रेणी में आएगा।
वन स्टॉप सेंटरों में क्या बदलाव होंगे?
हाईकोर्ट ने महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को सभी वन स्टॉप सेंटरों की कमियाँ दूर कर सुविधाएँ बेहतर बनाने का निर्देश दिया है। इन केंद्रों की निगरानी के लिए महिलाओं की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
इन निर्देशों से झारखंड की महिलाओं पर क्या असर पड़ेगा?
इन निर्देशों के लागू होने पर दूरदराज के इलाकों की महिलाओं को कानूनी जागरूकता, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और त्वरित हेल्पलाइन सहायता मिल सकेगी। पीड़िताओं और उनके परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे न्याय की प्रक्रिया अधिक समग्र और संवेदनशील बनेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले