झारखंड हाईकोर्ट का यौन हिंसा पर बड़ा फैसला: जीरो एफआईआर से पुनर्वास तक 19 निर्देश जारी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने 9 जून 2026 को यौन हिंसा और दुष्कर्म पीड़ितों के संरक्षण, त्वरित न्याय और पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार व पुलिस प्रशासन को 19 महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
मुख्य घटनाक्रम
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान ये निर्देश पारित किए। मामले में अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया एमिकस क्यूरी के रूप में उपस्थित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की रिपोर्टिंग को लेकर व्यवस्थागत खामियों पर सवाल उठते रहे हैं।
पुलिस को निर्देश
हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया कि यौन अपराध के सभी मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत जीरो एफआईआर अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए। शिकायत दर्ज करने में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी आदेश दिया गया है। साथ ही पुलिसकर्मियों को ऐसे संवेदनशील मामलों में व्यवहार और प्रक्रिया को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने को कहा गया है।
वन स्टॉप सेंटर और चिकित्सा सुधार
अदालत ने महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को राज्य के सभी वन स्टॉप सेंटरों की कमियाँ दूर कर सुविधाएँ बेहतर बनाने का निर्देश दिया। इन केंद्रों की निगरानी के लिए महिलाओं की अध्यक्षता में समिति गठित करने और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई का भी आदेश है। खंडपीठ ने सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में दुष्कर्म पीड़िताओं की जाँच के दौरान विवादित 'टू फिंगर टेस्ट' पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया और कहा कि इसका उल्लंघन पेशेवर कदाचार माना जाएगा।
जागरूकता, आत्मरक्षा और पुनर्वास
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दूरदराज के इलाकों की लड़कियों के बीच कानूनी जागरूकता बढ़ाने तथा स्कूलों, कॉलेजों और गाँवों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण शुरू करने का निर्देश दिया। आवश्यकता पड़ने पर पीड़िता और उसके परिवार के समुचित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। गौरतलब है कि पुनर्वास की यह माँग लंबे समय से महिला अधिकार संगठनों की प्राथमिकता रही है।
हेल्पलाइन को आपातकालीन सेवा से जोड़ने का निर्देश
अदालत ने महिला हेल्पलाइन 181 को अधिक प्रभावी बनाने और इसे आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ने की संभावना पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया। अदालत का मानना है कि इस एकीकरण से संकट की स्थिति में महिलाओं को त्वरित सहायता मिल सकेगी। इन निर्देशों के अनुपालन की समयसीमा और अगली सुनवाई की तारीख आगामी आदेश में निर्धारित की जाएगी।