पीयूष गोयल का एक्सपोर्ट काउंसिल को संदेश: भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि भारतीय उत्पादों और सेवाओं को वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उद्योग और सरकार को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भारत की एक विश्वसनीय व्यापारिक भागीदार के रूप में वैश्विक पहचान और मज़बूत हो सके।
बदलते वैश्विक व्यापार परिवेश पर चर्चा
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, गोयल ने बैठक में कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ, टैरिफ संरचना में बदलाव, सप्लाई चेन का पुनर्गठन और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में नई नियामक अपेक्षाएँ कारोबारी माहौल को तेज़ी से बदल रही हैं। उन्होंने माना कि ये बदलाव निर्यातकों के लिए चुनौतियाँ पैदा करते हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यही परिस्थितियाँ भारत के लिए एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरने का अवसर भी हैं।
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यापार तनाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन के बीच कई देश अपने व्यापारिक गठजोड़ बदल रहे हैं, और भारत इस पुनर्संरेखण में एक प्रमुख विकल्प के रूप में उभर रहा है।
निर्यातकों को गुणवत्ता और नवाचार पर ज़ोर
पीयूष गोयल ने भारतीय उद्योग को बदलते अंतरराष्ट्रीय कारोबारी माहौल के प्रति चुस्त और सक्रिय बने रहने की सलाह दी। उन्होंने निर्यातकों को उत्पाद की गुणवत्ता, इनोवेशन, लागत प्रतिस्पर्धा, सप्लाई की विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका कहना था कि इन्हीं मानकों पर खरा उतरने से वैश्विक वैल्यू चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है।
मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि दुनिया की भारत को एक मैन्युफैक्चरिंग, सोर्सिंग और निवेश गंतव्य के रूप में देखने में रुचि बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग और विदेशी कारोबारियों के बीच लगातार संवाद के ज़रिए इन संभावनाओं को ठोस व्यापारिक परिणामों में बदलना ज़रूरी है।
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल को निर्देश
गोयल ने एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल को अपने अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने, संभावित खरीदारों की पहचान करने और स्थापित एवं उभरते बाज़ारों में कारोबारी साझेदारियाँ विकसित करने के लिए कहा। उन्होंने बदलती वैश्विक माँग और उभरते सप्लाई चेन अवसरों को देखते हुए उत्पाद एवं बाज़ार विविधीकरण पर फ़ोकस करने की ज़रूरत बताई।
उन्होंने काउंसिल से आग्रह किया कि वे उन उत्पादों की पहचान करें जिनमें निर्यात की असीम संभावनाएँ हैं, नए बाज़ार तलाशें और बाज़ार-विशेष रणनीतियाँ तैयार करें। साथ ही उन्होंने स्थापित क्षेत्रों में भारत के प्रतिस्पर्धी लाभों को मज़बूत करने और उभरते क्षेत्रों में क्षमता निर्माण पर भी ज़ोर दिया।
एमएसएमई के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन
केंद्रीय मंत्री ने कारोबार करने में आसानी बेहतर बनाने, व्यापार संबंधी बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने और निर्यातकों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार के चल रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जो विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए निर्यात वित्त, बाज़ार पहुँच और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से जुड़ी बाधाओं को दूर करने में सहायक होगा।
आगे चलकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि काउंसिल इन दिशानिर्देशों को ज़मीनी स्तर पर किस तरह लागू करती है और क्या MSME निर्यातकों को वास्तविक लाभ मिल पाता है।