राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम, प्रियंका को मंदिर मार्ग थाने भेजा — PM आवास से विपक्ष को पुलिस ने हटाया
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत दर्जनों विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर से हटाकर अलग-अलग स्थानों पर पहुँचा दिया। राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को मंदिर मार्ग थाना और अन्य कई सांसदों को किंग्सवे कैंप क्षेत्र में भेजा गया।
मुख्य घटनाक्रम
विपक्षी दल संसद भवन से मार्च करते हुए प्रधानमंत्री आवास पहुँचे और वहाँ धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत बड़ी संख्या में विपक्षी सांसद और कार्यकर्ता शामिल थे।
बातचीत के प्रयास के तहत केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह मौके पर पहुँचे और राहुल गांधी से वार्ता की। सूत्रों के अनुसार, मंत्री का कहना था कि सदन में चर्चा कराने की माँग स्वीकार कर ली गई थी, लेकिन विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुआ। बातचीत विफल रहने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने नेताओं से स्थान खाली करने को कहा।
जब प्रदर्शनकारी नहीं हटे, तो पुलिस ने उन्हें बसों में बिठाकर विभिन्न स्थानों पर पहुँचाया और भीड़ को तितर-बितर किया।
सपा नेताओं की छात्रों से मुलाकात
अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने अपने अन्य पार्टी सांसदों के साथ अनशन पर बैठे और घायल छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश, एआईएसए उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष और एआईएसए दिल्ली विश्वविद्यालय सचिव अंजलि से मिलकर उनके आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
सपा नेताओं ने छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग की निंदा की और आश्वासन दिया कि छात्रों से जुड़े मुद्दे संसद में मजबूती से उठाए जाएँगे। सांसद राजीव राय, इकरा हसन, प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज ने भी छात्रों से मुलाकात कर एकजुटता जताई।
सरकार की स्थिति और विपक्ष का रुख
केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार, सरकार ने सदन में चर्चा का प्रस्ताव दिया था, जिसे विपक्ष ने कथित तौर पर पहले स्वीकार किया, लेकिन बाद में पीछे हट गया। विपक्षी दलों ने इस दावे को खारिज करते हुए अपना विरोध जारी रखा।
यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि इस प्रकार के संसद-से-सड़क तक के विरोध-प्रदर्शन भारतीय विपक्षी राजनीति में लंबे समय से एक रणनीतिक हथियार रहे हैं।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे संसद के भीतर और बाहर अपना दबाव जारी रखेंगे। छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों को आने वाले दिनों में सदन में उठाए जाने की संभावना है। पुलिस की कार्रवाई और कथित बल प्रयोग पर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।