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राहुल गांधी की बहस की चुनौती सरकार स्वीकार करे: हुसैन दलवई का BJP पर तीखा हमला

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राहुल गांधी की बहस की चुनौती सरकार स्वीकार करे: हुसैन दलवई का BJP पर तीखा हमला

सारांश

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मुंबई में एक साथ कई मोर्चों पर BJP को घेरा — राहुल गांधी की बहस की चुनौती से लेकर जिन्ना तुलना, दीया मिर्जा विवाद और नक्सल वाले आरोप तक। उनका सार एक ही था: सरकार सवालों से भागती है।

मुख्य बातें

हुसैन दलवई ने कहा कि केंद्र सरकार को राहुल गांधी की देशव्यापी बहस की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।
दलवई के अनुसार, संसद के कई सत्रों में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह सदन में अनुपस्थित रहे।
मंगल प्रभात लोढ़ा की राहुल गांधी की जिन्ना से तुलना को दलवई ने ऐतिहासिक तथ्यों का विकृतिकरण बताया।
अभिनेत्री दीया मिर्जा पर हुई कार्रवाई को दलवई ने धार्मिक पहचान के आधार पर जानबूझकर किया गया निशाना करार दिया।
अमित शाह के 'नक्सल-मानसिकता' वाले बयान को दलवई ने खारिज करते हुए कांग्रेस को महात्मा गांधी के अहिंसा सिद्धांतों की पार्टी बताया।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 4 नवंबर 2026 को मुंबई में कहा कि केंद्र सरकार को राहुल गांधी की उस बहस की चुनौती को स्वीकार करना चाहिए जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की समग्र स्थिति पर खुली चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। दलवई ने आरोप लगाया कि सरकार संसद के भीतर भी विपक्ष के सवालों का सार्थक जवाब देने से कतराती है।

संसदीय जवाबदेही पर सवाल

दलवई ने कहा कि राहुल गांधी ने बिल्कुल सही बात कही है — संसद के कई सत्रों में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित नहीं रहे, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार संसदीय प्रक्रिया को उचित महत्व नहीं देती। उन्होंने कहा, 'अब अमित शाह कह रहे हैं कि एसआईआर के मुद्दे पर संसद में बहस होगी, तो उन्हें बहस कराने में क्या परेशानी है?' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार संसदीय सत्रों में सरकार की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठा रहा है।

जिन्ना वाली तुलना पर कड़ी प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा राहुल गांधी की तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से किए जाने पर दलवई ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोढ़ा को पहले देश के विभाजन से जुड़ा इतिहास समझना चाहिए। दलवई ने याद दिलाया कि महात्मा गांधी ने स्पष्ट कहा था कि उनके शरीर के टुकड़े हो सकते हैं, लेकिन देश के टुकड़े नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर विभाजन की जिम्मेदारी डालना ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना है।

दीया मिर्जा विवाद और हाई कोर्ट की टिप्पणी

अभिनेत्री दीया मिर्जा से जुड़े विवाद पर दलवई ने हाई कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया। उन्होंने सवाल किया कि दीया मिर्जा ने ऐसा क्या कहा था जो किसी धर्म के खिलाफ था — उन्होंने तो केवल प्रदूषण न फैलाने की बात कही थी। दलवई ने पुणे में गणपति विसर्जन के दौरान उठे सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय माधुरी दीक्षित समेत अन्य लोग भी मौजूद थे, लेकिन सवाल केवल दीया मिर्जा से पूछे गए। उनके अनुसार, दीया मिर्जा को मुस्लिम समझकर जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

नक्सल-मानसिकता के आरोप पर पलटवार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कांग्रेस को नक्सल-मानसिकता वाला बताए जाने पर दलवई ने कहा कि नक्सलवाद और हिंसा के खिलाफ कांग्रेस ने ही ऐतिहासिक रूप से काम किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों को मानने वाली पार्टी है, और राहुल गांधी हमेशा गरीबों, मजदूरों और किसानों के मुद्दे उठाते हैं। गौरतलब है कि यह बयानबाजी ऐसे समय में तेज हुई है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मियाँ चरम पर हैं। दलवई ने कहा कि राहुल गांधी देश को बचाने और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात करते हैं, इसलिए उन्हें नक्सलवादी कहना पूरी तरह गलत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित विपक्षी रणनीति का हिस्सा है जो संसदीय अनुपस्थिति, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और विपक्ष पर 'नक्सल' का लेबल लगाने — तीनों मोर्चों पर एक साथ जवाब देती है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार वाकई खुली बहस से बचती है, या यह विपक्ष की एक ऐसी चुनौती है जिसे अस्वीकार करने में ही राजनीतिक फायदा है। दीया मिर्जा प्रकरण और जिन्ना तुलना जैसे मुद्दों को एक ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोड़ना दर्शाता है कि कांग्रेस 'अल्पसंख्यक निशाने पर' का एक व्यापक नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन बयानों को अलग-अलग देखती है, जबकि इनकी राजनीतिक संगति महाराष्ट्र के चुनावी समीकरणों से सीधे जुड़ी है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुसैन दलवई ने राहुल गांधी की बहस की चुनौती पर क्या कहा?
दलवई ने कहा कि राहुल गांधी ने बिल्कुल सही बात कही है और सरकार को उनकी देशव्यापी बहस की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में भी विपक्ष के सवालों का ठीक से जवाब नहीं देती।
मंगल प्रभात लोढ़ा ने राहुल गांधी की जिन्ना से तुलना क्यों की और दलवई ने क्या जवाब दिया?
महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने राहुल गांधी की तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से की। दलवई ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों का विकृतिकरण बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा देश के विभाजन का विरोध किया था और महात्मा गांधी ने खुद कहा था कि देश के टुकड़े नहीं होने चाहिए।
दीया मिर्जा विवाद पर दलवई का क्या रुख है?
दलवई ने इस मामले में हाई कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया और कहा कि दीया मिर्जा ने केवल प्रदूषण न फैलाने की बात कही थी, जो किसी धर्म के खिलाफ नहीं थी। उनके अनुसार दीया मिर्जा को मुस्लिम समझकर जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
अमित शाह के 'नक्सल-मानसिकता' वाले बयान पर कांग्रेस की क्या प्रतिक्रिया है?
दलवई ने कहा कि नक्सलवाद और हिंसा के खिलाफ कांग्रेस ने ही काम किया है और पार्टी महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों में विश्वास रखती है। उन्होंने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि वे गरीबों, मजदूरों और किसानों के मुद्दे उठाते हैं, इसलिए उन्हें नक्सलवादी कहना पूरी तरह गलत है।
संसद में सरकार की अनुपस्थिति पर दलवई ने क्या कहा?
दलवई ने कहा कि संसद के कई सत्रों में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सदन में नहीं आए, जिससे लगता है कि वे संसदीय प्रक्रिया को ज्यादा महत्व नहीं देते। उन्होंने सवाल किया कि यदि अमित शाह एसआईआर मुद्दे पर संसद में बहस की बात करते हैं, तो राहुल गांधी की खुली चुनौती स्वीकार करने में क्या परेशानी है।
राष्ट्र प्रेस
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