राष्ट्रीय एकता दिवस: PM मोदी ने एकता नगर में सरदार पटेल को नमन, बोले — 10-12 साल में 50 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2026 को गुजरात के एकता नगर स्थित परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लिया और सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से पहले के 10 से 12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीयों ने गरीबी को पीछे छोड़ दिया।
सरदार पटेल को श्रद्धांजलि और एकता का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरदार पटेल ने आज़ादी के बाद 550 से अधिक रियासतों को अपने लौह संकल्प से एकता के सूत्र में पिरोया था — एक ऐसा कार्य जो स्वतंत्र भारत की नींव को मज़बूत करने में निर्णायक सिद्ध हुआ। उन्होंने कहा कि गणतंत्र नागरिकों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करता है, जबकि एकता राष्ट्र को आगे बढ़ने की शक्ति देती है।
इस वर्ष समारोह का स्वरूप बदला हुआ था — परंपरागत सुबह के आयोजन के स्थान पर शाम को एकत्र होकर कार्यक्रम मनाया गया। सुबह देशभर में लाखों नागरिकों ने 'रन फॉर यूनिटी' में भाग लिया, जिसमें असाधारण उत्साह देखने को मिला।
गरीबी उन्मूलन पर बड़ा दावा
मोदी ने गरीबी के मुद्दे पर सीधा हमला करते हुए कहा कि 'गरीबी हटाओ' का नारा देने वाले नेता खुद अमीर होते चले गए। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पहले देश में हर 100 में से 27 से अधिक लोग — यानी एक चौथाई से ज़्यादा आबादी — अत्यधिक गरीबी की चपेट में थी। उनके अनुसार, आज यह अनुपात घटकर 3 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है।
गौरतलब है कि यह दावा विश्व बैंक की रिपोर्ट पर आधारित बताया गया है, जो भारत में अत्यधिक गरीबी की दर में ऐतिहासिक गिरावट को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ग़रीबी में वृद्धि की चिंताएँ बढ़ रही हैं।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की एकता
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों में युद्ध जारी हैं, बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ दबाव में हैं, और वैश्विक सप्लाई चेन बिखरी हुई है। ऐसे संकट के समय में भारत की राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे को उन्होंने देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया।
उन्होंने विशेष रूप से ऊर्जा संकट का ज़िक्र किया। उनके अनुसार, कई देशों को डीजल और पेट्रोल की खरीद पर सीमाएँ लगानी पड़ीं और भारत को लेकर भी आशंकाएँ जताई जा रही थीं। हालाँकि, उन्होंने दावा किया कि भारत ने इस वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अपने नागरिकों पर नहीं पड़ने दिया — जो देश की प्रशासनिक और रणनीतिक क्षमता का प्रमाण है।
समारोह का राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व
राष्ट्रीय एकता दिवस प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर मनाया जाता है। एकता नगर — जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निकट स्थित है — इस आयोजन का केंद्र रहता है। यह स्थल स्वयं सरदार पटेल की स्मृति को समर्पित है और राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यधिक प्रतीकात्मक है।
यह पहली बार नहीं है जब मोदी ने इस मंच से गरीबी उन्मूलन के आँकड़े प्रस्तुत किए हैं। पिछले कई अवसरों पर भी सरकार ने सामाजिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से जनजीवन में बदलाव के दावे किए हैं।
आगे क्या
मोदी ने देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि एकजुटता और सामूहिक संकल्प के बल पर भारत हर चुनौती का सामना कर सकता है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत की आंतरिक मज़बूती को उन्होंने भविष्य की नींव बताया।