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कोलकाता PMLA अदालत का बड़ा फैसला: इको डायग्नोस्टिक को ₹3.05 करोड़ और प्रोग्नोसिस मेडिकल को ₹23.63 लाख वापस

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कोलकाता PMLA अदालत का बड़ा फैसला: इको डायग्नोस्टिक को ₹3.05 करोड़ और प्रोग्नोसिस मेडिकल को ₹23.63 लाख वापस

सारांश

कोलकाता की विशेष PMLA अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग के शिकार दो कंपनियों को उनकी धनराशि वापस दिलाई — इको डायग्नोस्टिक को ₹3.05 करोड़ और प्रोग्नोसिस मेडिकल को ₹23.63 लाख। बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय पर पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग में प्रभाव का झूठा दावा कर ₹26.15 करोड़ की ठगी का आरोप है।

मुख्य बातें

कोलकाता की विशेष अदालत (PMLA) ने 17 जून 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग पीड़ितों को धनराशि बहाल करने का आदेश दिया।
मेसर्स इको डायग्नोस्टिक प्राइवेट लिमिटेड को ₹3.05 करोड़ और मेसर्स प्रोग्नोसिस मेडिकल सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को ₹23.63 लाख लौटाए जाएँगे।
मुख्य आरोपी बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय पर पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग में प्रभाव का झूठा दावा कर लगभग ₹26.15 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।
आरोपी के खिलाफ 22 सितंबर 2025 को विशेष PMLA अदालत में आरोप तय किए जा चुके हैं।
ED ने बैंक खाते फ्रीज किए, तलाशी ली और अचल संपत्तियाँ जब्त कीं; पीड़ितों को राशि वापसी पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

कोलकाता की विशेष अदालत (पीएमएलए) ने 17 जून 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के शिकार दो कंपनियों को उनकी अपराध-अर्जित राशि (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम — POC) वापस दिलाने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया। अदालत ने मेसर्स इको डायग्नोस्टिक प्राइवेट लिमिटेड को ₹3.05 करोड़ और मेसर्स प्रोग्नोसिस मेडिकल सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को ₹23.63 लाख की धनराशि बहाल करने का निर्देश दिया। यह आदेश प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जाँची जा रही बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय और अन्य के विरुद्ध चल रही मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की कार्यवाही में आया है।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता के बिधाननगर स्थित इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय, स्वरूप घोष और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के आरोपों में PMLA, 2002 के तहत जाँच शुरू की थी। इसी व्यक्ति के विरुद्ध आनंदपुर पुलिस स्टेशन में एक अतिरिक्त एफआईआर भी दर्ज की गई थी, जिसे भी जाँच में शामिल किया गया।

धोखाधड़ी का तरीका

आरोप है कि बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग में अपने कथित प्रभाव का झूठा दावा करते हुए, निविदा संबंधी बयाना राशि के नाम पर 'एसीडब्ल्यूबीएचएफडब्ल्यू सर्विसेज' नामक फर्जी बैंक खाते के माध्यम से मेसर्स प्रोग्नोसिस मेडिकल सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग ₹26.15 करोड़ की धोखाधड़ी की। इस धनराशि को बाद में विभिन्न संस्थाओं तथा आरोपी एवं उसके परिवार के सदस्यों के निजी खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।

ईडी की जाँच में सामने आया कि अपराध से अर्जित इस धन (POC) का उपयोग अचल संपत्तियों की खरीद और विभिन्न निवेशों में किया गया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी निविदाओं की आड़ में धोखाधड़ी के मामले देशभर में बढ़ रहे हैं।

ईडी की कार्रवाई और आरोप तय होना

जाँच के दौरान ED ने तलाशी अभियान चलाया, संबंधित बैंक खातों में जमा राशि फ्रीज की और बयाना राशि से अर्जित अचल संपत्तियाँ जब्त कीं। इसके बाद PMLA की धारा 45 के तहत विशेष न्यायालय के समक्ष अभियोग शिकायत दर्ज की गई। मुख्य आरोपी बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय के खिलाफ 22 सितंबर 2025 को औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए।

पीड़ितों को संपत्ति बहाली का आधार

PMLA के उद्देश्यों के अनुरूप — जिसमें वैध दावेदारों को POC की बहाली शामिल है — ED ने विशेष न्यायालय के समक्ष कुर्क, जब्त या फ्रीज की गई संपत्तियों को पीड़ित कंपनियों को जारी करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसी आधार पर अदालत ने यह आदेश पारित किया।

आगे की स्थिति

मामले में मुख्य आरोपियों के विरुद्ध विशेष PMLA अदालत में सुनवाई जारी है। यह फैसला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि यह दर्शाता है कि PMLA के तहत कुर्क संपत्तियाँ अंततः पीड़ितों तक पहुँच सकती हैं — एक ऐसी प्रक्रिया जो अब तक लंबी और जटिल मानी जाती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और शेष धनराशि की वसूली का रास्ता अभी लंबा है। स्वास्थ्य क्षेत्र की निविदाओं में इस तरह की धोखाधड़ी एक गहरी प्रणालीगत खामी की ओर इशारा करती है, जिसमें फर्जी सरकारी संपर्क और बनावटी बैंक खाते आसानी से विश्वसनीय लग सकते हैं। असली सवाल यह है कि क्या शेष पीड़ित राशि की वसूली समयबद्ध तरीके से होगी, या यह मामला भी अदालती प्रक्रिया में वर्षों तक उलझा रहेगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता PMLA अदालत ने किन कंपनियों को धनराशि वापस करने का आदेश दिया?
विशेष अदालत (PMLA) ने मेसर्स इको डायग्नोस्टिक प्राइवेट लिमिटेड को ₹3.05 करोड़ और मेसर्स प्रोग्नोसिस मेडिकल सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को ₹23.63 लाख वापस करने का आदेश दिया है। ये दोनों कंपनियाँ बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय और अन्य द्वारा की गई धोखाधड़ी की शिकार थीं।
बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय पर क्या आरोप हैं?
बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय पर आरोप है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग में अपने प्रभाव का झूठा दावा कर, फर्जी बैंक खाते के माध्यम से मेसर्स प्रोग्नोसिस मेडिकल सिस्टम्स से लगभग ₹26.15 करोड़ की धोखाधड़ी की। उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के आरोपों में PMLA, 2002 के तहत मामला चल रहा है।
ED ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
प्रवर्तन निदेशालय ने बिधाननगर और आनंदपुर पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर के आधार पर PMLA जाँच शुरू की। ED ने तलाशी अभियान चलाया, बैंक खाते फ्रीज किए, अचल संपत्तियाँ जब्त कीं और PMLA की धारा 45 के तहत विशेष न्यायालय में अभियोग शिकायत दर्ज की।
मुख्य आरोपी के खिलाफ आरोप कब तय हुए?
मुख्य आरोपी बुद्धादित्य चट्टोपाध्याय के खिलाफ विशेष PMLA अदालत में 22 सितंबर 2025 को आरोप तय किए गए। मामले में सुनवाई अभी जारी है।
PMLA के तहत पीड़ितों को संपत्ति वापसी कैसे होती है?
PMLA का प्रावधान है कि अपराध से अर्जित धन (POC) को वैध दावेदारों को बहाल किया जा सकता है। इस मामले में ED ने कुर्क, जब्त या फ्रीज संपत्तियों को पीड़ित कंपनियों को जारी करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जिसके आधार पर विशेष अदालत ने बहाली का आदेश पारित किया।
राष्ट्र प्रेस
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