क्या सरकार ने महात्मा गांधी के विचारों की हत्या की?
सारांश
Key Takeaways
- महात्मा गांधी के विचारों की हत्या की गई है।
- मनरेगा का नाम बदलने पर प्रदर्शन होंगे।
- केंद्र और राज्य सरकारों का योगदान 60-40 प्रतिशत में बदल गया है।
- कांग्रेस ने जन-जन तक अपना संदेश पहुंचाने का कार्य करने का संकल्प लिया है।
- महात्मा गांधी की विचारधारा को बचाने का प्रयास किया जाएगा।
वाराणसी, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी के विचारों की हत्या करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गोडसे ने महात्मा गांधी के शरीर की हत्या की थी, उसी तरह केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर महात्मा गांधी के विचारों की हत्या की है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकृत नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष की तरफ से आगामी दिनों में मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में प्रदर्शन करने की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है, जिसे जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि हम इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। हम उन्हें बताएंगे कि किस तरह से इस सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर गलत काम किया है। इसके बावजूद अगर सरकार ने मनरेगा में किए बदलाव को वापस नहीं लिया तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जिस दिन हमारी सरकार आएगी, उस दिन महज 24 घंटे के भीतर मनरेगा में हुए बदलाव को वापस लिया जाएगा, क्योंकि यह गलत नहीं होगा कि मनरेगा में हुआ बदलाव सीधे तौर पर देश के श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात है।
इसके अलावा, कांग्रेस सांसद ने अपने वाराणसी दौरे की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अपने इस दौरे के दौरान वे मुख्य रूप से बाबा के दर्शन करेंगे, जिसमें वे देश के लोगों और कांग्रेस के लिए प्रार्थना करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मनरेगा पर चर्चा के दौरान सत्तारूढ़ दल के लोगों ने हमारे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। यदि वे हमारे किसी एक सवाल का जवाब दे पाते तो हम उस चर्चा को सार्थक कह सकते थे।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि पहले इस योजना के तहत 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता था और शेष 10 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाता था, लेकिन अब सरकार ने इस योजना में बदलाव करते हुए यह प्रावधान किया कि केंद्र सरकार की ओर से महज 60 फीसदी का योगदान दिया जाएगा और शेष 40 फीसदी राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा। आज की तारीख में अधिकांश राज्य सरकारें विभिन्न प्रकार की आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में आप ही बताइए कि क्या ये राज्य सरकारें इस योजना को सफलतापूर्वक संचालित करने में सफल हो पाएंगी।
उन्होंने कहा कि पहले इस योजना में ‘गारंटी’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया जाता था, जिसका सीधा अभिप्राय था कि हर सूरत में श्रमिकों को रोजगार मिलेगा। उन्हें रोजगार दिलाने में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा, लेकिन अब इस योजना में किए गए संशोधन में दिल्ली और लखनऊ में लोगों को योजना के फायदे दिलाए जाएंगे। यह व्यावहारिक रूप से ठीक नहीं है।
वहीं, प्रियंका गांधी के जन्मदिन के अवसर पर भी कांग्रेस सांसद ने उनकी तारीफ की। उन्होंने दावा किया कि आज की तारीख में मैं उनमें दूसरी इंदिरा गांधी देखता हूं। मौजूदा समय में वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी हैं। निस्संदेह इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता कि उनके अंदर राजनीतिक कौशल विद्यमान है, जिसके तहत वह देश की राजनीतिक स्थिति को नई दिशा व दशा दे सकती हैं।
उन्होंने पीडीए की ओर से आधिकारिक बयान जारी किए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरा हिंदुत्व अलग है। निश्चित तौर पर मैं हिंदू हूं। मेरी पूजा पद्धति हिंदू धर्म के अनुरूप है, लेकिन मैं यह समझता हूं कि एक मुस्लिम को भी इबादत करने का उतना ही हक है जितना एक ईसाई को है। हमारा हिंदुत्व सभी को साथ लेकर चलने का है। हम किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करते।
इसके अलावा, उन्होंने उत्तर प्रदेश की दालमंडी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर कहा कि जहां कहीं पर भी भाजपा की सरकार रहती है, वहां पर ये लोग ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देते हैं। इसमें कुछ भी नया नहीं है।