युद्ध का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है: भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव का ट्रंप की टिप्पणी पर जवाब
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव ने 15 जुलाई को रांची में कहा कि किसी भी युद्ध का प्रभाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। उन्होंने यह बात ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणी के संदर्भ में कही।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर चिंता
शाहदेव ने कहा कि जब दो देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष चल रहा हो, तब ऐसे निर्णय नहीं लिए जाने चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करें। उन्होंने समुद्री जलमार्गों की नाकेबंदी और जहाजों से शुल्क वसूलने की किसी भी कोशिश को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए इसका विरोध किया।
उनके अनुसार, यदि ऊर्जा आपूर्ति बाधित होती है या अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अवरोध उत्पन्न किए जाते हैं, तो इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है। इसलिए अमेरिका, ईरान और अन्य संबंधित देशों को शीघ्र युद्ध समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
युद्धविराम और मध्यस्थता पर सवाल
शाहदेव ने कहा कि युद्धविराम के बाद भी स्थिति स्थिर नहीं रह सकी। उन्होंने दावा किया कि जिस देश को मध्यस्थ की भूमिका दी गई थी, उस पर पहले से ही यह संदेह था कि वह समझौते को दीर्घकालिक रूप से कायम नहीं रख पाएगा। उनके अनुसार, भारत लगातार युद्ध समाप्त करने की अपील करता रहा है, क्योंकि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों और विश्व अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ता है।
भारत पर अपेक्षाकृत कम असर का दावा
शाहदेव ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दीर्घकालिक नीतियों के कारण भारत पर वैश्विक संकट का प्रभाव अन्य देशों की तुलना में कम रहा। उन्होंने कहा कि जहाँ अन्य देशों में तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, वहीं भारत की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रही।
अयोध्या मामले और न्यायिक विवादों पर रुख
अयोध्या से जुड़े एक मामले पर शाहदेव ने कहा कि विशेष जाँच दल (SIT) सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय लेन-देन समेत विभिन्न पहलुओं की जाँच कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जाँच एजेंसियाँ पूरे षड्यंत्र का खुलासा करने में जुटी हैं।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे धार्मिक मुद्दों पर राजनीति न करें और अयोध्या तथा रामलला के जन्मस्थान की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करें। मस्जिद-मंदिर से जुड़े न्यायिक विवादों पर उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विवादों का समाधान संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने तुष्टीकरण की राजनीति अपनाई, जबकि वर्तमान सरकार न्यायालय में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रही है।