पुणे नौकरी रैकेट: PMC में फर्जी नियुक्ति पत्र, IT में नकली सर्टिफिकेट; महाराष्ट्र सरकार ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधान परिषद में 29 जून 2026 को पुणे में सक्रिय एक बड़े नौकरी धोखाधड़ी सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ, जो पुणे नगर निगम (PMC) में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने और IT क्षेत्र में नकली अनुभव प्रमाणपत्र, वेतन पर्ची व पीएफ खाते उपलब्ध कराने का काम कर रहा था। आरोपों के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार से ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की वसूली की जा रही थी। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सदन में आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू करेगी।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य सत्यजीत तांबे और भाई जगताप ने 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के माध्यम से यह मुद्दा सदन के सामने रखा। तांबे ने बताया कि पुणे राज्य का एक प्रमुख IT केंद्र होने के कारण लाखों युवा रोज़गार की तलाश में वहाँ आते हैं। इसका अनुचित लाभ उठाते हुए कुछ गिरोह TCS जैसी बड़ी कंपनियों के नाम पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, Form-16, वेतन पर्ची और बैंक स्टेटमेंट तैयार कर रहे थे।
तांबे ने यह भी बताया कि बेंगलुरु स्थित एक कंपनी द्वारा उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की जाँच के बाद यह पूरा धोखाधड़ी का जाल उजागर हुआ। उन्होंने ऐसे घोटालों के शिकार युवाओं के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन स्थापित करने की माँग भी रखी।
संदिग्धों के नाम और शिकायतों का ब्यौरा
विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने सदन में अकोला के नीलेश राठौड़, भरतलाल पांडे और अभिनव मिश्रा के नाम संदिग्धों के रूप में लेते हुए उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग की। मंत्री सामंत ने सदन को बताया कि PMC से जुड़ी प्रारंभिक शिकायत में किसी का नाम विशेष रूप से नहीं था, और एक मामले में शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर ₹70 लाख में से ₹50 लाख वापस मिलने के बाद शिकायत वापस ले ली थी। हालाँकि, एक ही व्यक्ति का नाम तीन अलग-अलग शिकायतों में सामने आने के कारण सरकार ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच जारी रखने का निर्णय लिया।
सरकार की प्रतिक्रिया
उद्योग मंत्री उदय सामंत ने स्पष्ट किया कि गृह विभाग इस मामले की निष्पक्ष जाँच करेगा और दोषी पाए जाने पर ऐसे कानूनों के तहत कार्रवाई होगी जिनमें 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि यह रैकेट केवल पुणे तक सीमित नहीं है, और राज्य के सभी पुलिस आयुक्तालयों को इसी प्रकार के मामलों की जाँच के निर्देश जारी किए जाएंगे। शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का आश्वासन भी दिया गया।
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक प्रवीण पोटे ने पुलिस विभाग के कामकाज पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 30 जनवरी को शिकायत दर्ज होने के बावजूद छह महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई — यह देरी गंभीर चिंता का विषय है। उनका तर्क था कि ऐसे मामलों में पुलिस को तत्काल स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सरकारी भर्ती घोटालों को लेकर पहले से ही जनाक्रोश है। गौरतलब है कि पुणे देश के प्रमुख IT केंद्रों में से एक है और यहाँ हर साल बड़ी संख्या में युवा रोज़गार की तलाश में आते हैं — जो इस प्रकार के सिंडिकेट के लिए आसान शिकार बन जाते हैं। राज्य सरकार की जाँच के दायरे और नतीजों पर अब सभी की नज़र टिकी है।