29 जून 2026
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पुणे नौकरी रैकेट: PMC में फर्जी नियुक्ति पत्र, IT में नकली सर्टिफिकेट; महाराष्ट्र सरकार ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए

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पुणे नौकरी रैकेट: PMC में फर्जी नियुक्ति पत्र, IT में नकली सर्टिफिकेट; महाराष्ट्र सरकार ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए

सारांश

पुणे में एक सिंडिकेट PMC में फर्जी नियुक्ति पत्र और IT क्षेत्र में नकली अनुभव प्रमाणपत्र बेचकर युवाओं से ₹5-10 लाख तक ठग रहा था। महाराष्ट्र विधान परिषद में मामला उठने के बाद उद्योग मंत्री उदय सामंत ने स्वतः संज्ञान जांच और राज्यव्यापी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मुख्य बातें

पुणे में एक सिंडिकेट PMC में फर्जी नियुक्ति पत्र और IT क्षेत्र में नकली अनुभव प्रमाणपत्र, वेतन पर्ची व पीएफ खाते उपलब्ध करा रहा था।
प्रत्येक उम्मीदवार से कथित तौर पर ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की वसूली की जा रही थी।
उद्योग मंत्री उदय सामंत ने महाराष्ट्र विधान परिषद में स्वतः संज्ञान जांच और दोषियों पर 10 वर्ष तक कारावास वाले कानूनों के तहत कार्रवाई का आश्वासन दिया।
नीलेश राठौड़ , भरतलाल पांडे और अभिनव मिश्रा (अकोला) के नाम सदन में संदिग्धों के रूप में लिए गए।
एक मामले में शिकायतकर्ता ने ₹70 लाख में से ₹50 लाख वापस मिलने के बाद शिकायत वापस ली, फिर भी सरकार जांच जारी रखेगी।
BJP विधायक प्रवीण पोटे ने 30 जनवरी से शिकायत दर्ज होने के बावजूद छह महीने तक कोई कार्रवाई न होने पर पुलिस की कड़ी आलोचना की।

महाराष्ट्र विधान परिषद में 29 जून 2026 को पुणे में सक्रिय एक बड़े नौकरी धोखाधड़ी सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ, जो पुणे नगर निगम (PMC) में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने और IT क्षेत्र में नकली अनुभव प्रमाणपत्र, वेतन पर्ची व पीएफ खाते उपलब्ध कराने का काम कर रहा था। आरोपों के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार से ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की वसूली की जा रही थी। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सदन में आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू करेगी।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य सत्यजीत तांबे और भाई जगताप ने 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के माध्यम से यह मुद्दा सदन के सामने रखा। तांबे ने बताया कि पुणे राज्य का एक प्रमुख IT केंद्र होने के कारण लाखों युवा रोज़गार की तलाश में वहाँ आते हैं। इसका अनुचित लाभ उठाते हुए कुछ गिरोह TCS जैसी बड़ी कंपनियों के नाम पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, Form-16, वेतन पर्ची और बैंक स्टेटमेंट तैयार कर रहे थे।

तांबे ने यह भी बताया कि बेंगलुरु स्थित एक कंपनी द्वारा उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की जाँच के बाद यह पूरा धोखाधड़ी का जाल उजागर हुआ। उन्होंने ऐसे घोटालों के शिकार युवाओं के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन स्थापित करने की माँग भी रखी।

संदिग्धों के नाम और शिकायतों का ब्यौरा

विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने सदन में अकोला के नीलेश राठौड़, भरतलाल पांडे और अभिनव मिश्रा के नाम संदिग्धों के रूप में लेते हुए उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग की। मंत्री सामंत ने सदन को बताया कि PMC से जुड़ी प्रारंभिक शिकायत में किसी का नाम विशेष रूप से नहीं था, और एक मामले में शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर ₹70 लाख में से ₹50 लाख वापस मिलने के बाद शिकायत वापस ले ली थी। हालाँकि, एक ही व्यक्ति का नाम तीन अलग-अलग शिकायतों में सामने आने के कारण सरकार ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच जारी रखने का निर्णय लिया।

सरकार की प्रतिक्रिया

उद्योग मंत्री उदय सामंत ने स्पष्ट किया कि गृह विभाग इस मामले की निष्पक्ष जाँच करेगा और दोषी पाए जाने पर ऐसे कानूनों के तहत कार्रवाई होगी जिनमें 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि यह रैकेट केवल पुणे तक सीमित नहीं है, और राज्य के सभी पुलिस आयुक्तालयों को इसी प्रकार के मामलों की जाँच के निर्देश जारी किए जाएंगे। शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का आश्वासन भी दिया गया।

पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक प्रवीण पोटे ने पुलिस विभाग के कामकाज पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 30 जनवरी को शिकायत दर्ज होने के बावजूद छह महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई — यह देरी गंभीर चिंता का विषय है। उनका तर्क था कि ऐसे मामलों में पुलिस को तत्काल स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सरकारी भर्ती घोटालों को लेकर पहले से ही जनाक्रोश है। गौरतलब है कि पुणे देश के प्रमुख IT केंद्रों में से एक है और यहाँ हर साल बड़ी संख्या में युवा रोज़गार की तलाश में आते हैं — जो इस प्रकार के सिंडिकेट के लिए आसान शिकार बन जाते हैं। राज्य सरकार की जाँच के दायरे और नतीजों पर अब सभी की नज़र टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुलिस तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सरकार का 'स्वतः संज्ञान' आश्वासन तब तक अधूरा है जब तक जाँच का दायरा, समयसीमा और परिणाम सार्वजनिक न किए जाएँ। राज्यव्यापी जाँच के निर्देश सही दिशा में हैं, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या दोषियों पर मुकदमा चलता है या मामला फिर फाइलों में दब जाता है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे नौकरी रैकेट क्या है और इसमें क्या होता था?
पुणे में एक सिंडिकेट पुणे नगर निगम (PMC) में नकली हस्ताक्षर और मुहरों से फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करता था और IT क्षेत्र में नकली अनुभव प्रमाणपत्र, वेतन पर्ची व पीएफ खाते उपलब्ध कराता था। प्रत्येक उम्मीदवार से कथित तौर पर ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की वसूली की जाती थी।
महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
उद्योग मंत्री उदय सामंत ने महाराष्ट्र विधान परिषद में घोषणा की कि गृह विभाग स्वतः संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच करेगा। दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक कारावास के प्रावधान वाले कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी और राज्य के सभी पुलिस आयुक्तालयों को इसी प्रकार के मामलों की जांच के निर्देश जारी किए जाएंगे।
इस रैकेट में किन संदिग्धों के नाम सामने आए हैं?
विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने सदन में अकोला के नीलेश राठौड़, भरतलाल पांडे और अभिनव मिश्रा के नाम संदिग्धों के रूप में लिए। मंत्री सामंत ने पुष्टि की कि इन तीनों की भूमिकाओं की गहन जाँच की जाएगी।
यह धोखाधड़ी कैसे उजागर हुई?
बेंगलुरु स्थित एक कंपनी द्वारा उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की जाँच (बैकग्राउंड वेरिफिकेशन) के दौरान फर्जी दस्तावेज़ों का पर्दाफाश हुआ। इसके बाद कांग्रेस MLC सत्यजीत तांबे और भाई जगताप ने 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के जरिए यह मुद्दा महाराष्ट्र विधान परिषद में उठाया।
पुलिस की निष्क्रियता पर क्या सवाल उठे हैं?
BJP विधायक प्रवीण पोटे ने सवाल उठाया कि 30 जनवरी को शिकायत दर्ज होने के बावजूद छह महीने तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने माँग की कि ऐसे गंभीर मामलों में पुलिस को तत्काल स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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